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Bhiwani news Hindi : शिकायतों के बावजूद नहीं टूट रही अधिकारियों की नींद, सफाई नहीं होने से सिवाड़ा तालू लिंक का टेल 'सूखा '

 Bhiwani news Hindi : Despite complaints, sleep of officers is not breaking, due to lack of cleanliness, tail of Sivada Talu link 'dry'

बुर्जी संख्या 12 के आसपास 90 डिग्री के चार मोड़, घास व झाड़ियां भी रोक रही पानी की राह !

तहलका न्यूज भिवानी।


जिले के अधिकांश माइनरों के टेल निल यानी की अभी भी सूखी है। सफाई न होने की वजह से पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंचा पा रहा है। यह स्थिति अधिकांश माइनरों की बनी है। जिसकी वजह से माइनरों के अंतिम छोर पर पड़ने वाले खेत बिना सिंचाई के रहने के आसार बन गए है सबसे बुरी स्थिति तालू सिवाड़ा लिंक माइनर की बनी है। उक्त माइनर पर चार से पांच फुट तक घास फूस उगे है जो कि पानी की राह में रोड़ा बने हुए हैं। सुंदर बीच से निकलने वाले तालू सिंवाड़ा लिंक माइनर की सफाई नहीं होने से अंतिम छोर ही नहीं उससे पहले करीब दस बुर्जी तक पानी नहीं पहुंच पाया है। जिसकी वजह माइनर में उगे झाड़ व झंखाड़ है। घास फूस की वजह से पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पा रहा है। माइनर के हैड से लेकर टेल पर घास उगा हुआ है।


एक-एक फुट गाद जमा


तालू सिवाड़ा लिंक माइनर की सफाई न करने की वजह से एक- एक फुट बाद जमी है। गाद की वजह से पानी आगे बहने की बजाए हैड पर जमा रहता है। माइनर की तलहटी में ज्यादा गाद होने की वजह से पानी आगे नहीं वह पा रहा है। इसी तरह माइनर पर बने पुलों में भी शिल्ट जमी है जिसकी वजह से पानी आगे नहीं निकलता। बताते है उक्त माइनर में बुर्जी संख्या 12 के आसपास नब्बे डिग्री पर चार मोड़ बने है। जहाँ पर डेढ़ फुट तक गाद जमी है। गाद की वजह से पानी आगे नहीं आ रहा। इस बारे में किसानों ने कई बार अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन समस्या जस को तस बनी है।


अन्य की स्थिति भी खराब


तालू सिवाड़ा लिंक माइनर ही नहीं, बल्कि जिले के अन्य माइनरों की भी यही स्थिति बनी हुई है। राजपुरा माइनर तालू माइनर, गुजरानी माइनर की सफाई न होने की वजह से पानी अंतिम छोर पर नहीं पहुंच पाया है। सभी माइनरों की सफाई न होने के चलते यह स्थिति बनी है। सफाई नहीं होने से अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। जिससे अनेक किसानों के खेतों पर बिना सिंचाई के रहने का खतरा मंडराता दिखाई दे रहा है। सिंचाई विभाग ने खेतों को सिचाई के लिए जिले की नहरों के लिए 21 सौ क्यूसेक पानी की डिमांड भेजी थी। लेकिन 1721 क्यूसेक पानी ही मिल पाया है।




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