बाढ़ के बाद किसानों के अरमानों पर ओलावृष्टि, फसलें तबाह | After flood, hailstorm destroys farmers' wishes, crops destroyed
After flood, hailstorm destroys farmers' wishes, crops destroyed
जुलाई-अगस्त में बाद से हजारों एकड़ में किसानों की फसल हुई थी बर्बाद
हरियाणा न्यूज , इंद्रीः यमुना बेल्ट के कई गांवों में मौसम के बदले मिजाज ने किसानों के अरमानों पर पानी फिर गया है। किसान बाढ़ के नुकसान का दर्द झेल ही रहे थे कि एक दिन पहले आसमान से बरसी आफत ने किसानों को फिर से रुला दिया।
क्षेत्र के कई गांवों में दूसरे दिन भी ओलों के रूप में जमी बर्फनुमा परतों ने लोगों को पहाड़ी स्थलों जैसा एहसास कराया। तुसंग, राजेपुर, उमरपुर समेत कई गांवों में भारी ओलावृष्टि से शुक्रवार को भी खेतों में ओलों की परत खेतों में जमी दिखी। कुछ किसान इन्हें हटाते नजर आए। तुसंग के खेतों में 24 घंटे बाद भी ओलों की बर्फनुमा सिल्ली जैसी परत जमी रही। सैकड़ों एकड़ में घास, सब्जी, गेहूं व सरसों की फसल खराब हो गई। कई खेतों में बर्फबारी जैसे हालात से पता नहीं चल रहा कि उनमें क्या फसल थी। टमाटर, गोभी, गाजर, मेथी, सरसों और घास आदि की कुछ फसलें पूरी तरह नष्ट हो गईं। तहसील कार्यालय की ओर से कुछ टीम खेतों में नुकसान की रिपोर्ट बनाने भी गईं।
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ईख की फसल भी हुई छलनी : वीरवार को क्षेत्र के कुछ हिस्सों में वर्षा के साथ ओले पड़े और सब्जी, घास, व सरसों की फसलें नष्ट हो गईं तो कहीं अपेक्षाकृत कम नुकसान हुआ। गेहूं के खेतों में भी पानी भरा रहा। ओलों से ईख की फसल छलनी हो गई। कुछ क्षेत्रों में टमाटर झाड़ दिए। आलू को भी काफी नुकसान पहुंचा।
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बर्बाद फसल का मुआवजा दे सरकारः जगमाल
60 वर्षीय किसान जगमाल सिंह ने बताया कि गांव में इतनी ओलावृष्टि कभी नहीं देखी 1500- 600 एकड़ में घास, सब्जी, तोड़िया, गोभी, सरसों व गेहूं की फसलें नष्ट हो गई। उनकी चार एकड़ सरसों की फसल नष्ट हो गई। पहले हुए नुकसान का मुआवजा नहीं मिला। आगे भी उम्मीद नहीं कि मुआवजा मिलेगा।
सब बर्बाद हो गया: इकबाल
इकबाल सिंह ने बताया कि गांव में 20,30 व 50 ग्राम तक वजनी ओले पड़े। भारी ओलावृष्टि हुई। बहुत नुकसान हुआ। ढाई एकड़ में सरसों व गेहूं की फसल नष्ट हो गई। ओलावृष्टि ने तबाही मचा दी। सरकार नुकसान का मुआवजा दे। सब बर्बाद हो गया।
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कभी नहीं देखा ऐसा नजारा : नौरती राम
70 वर्षीय किसान नौरती राम ने बताया कि छह कनाल में सरसों की फसल ओलों की भेंट चढ़ गई। सरकार मदद करे। बाढ़ से बर्बादी का मुआवजा नहीं मिला। ऐसा नजारा कभी नहीं देखा। सरसों, घास, तोड़िया व लहसुन आदि फसलें नष्ट हो गई। दूसरे दिन भी ओलों के ढेर लगे हैं। खेतों में बर्फनुमा मोटी परत जमी है। शुक्रवार को तहसील कार्यालय से टीम खेतों में नुकसान की रिपोर्ट बनाने के लिए आई।

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