Neemdiwali Tower Controversy Update : ग्रामीणों की अधिकारियों को दो टूक : जब तक समझौता नहीं तब तक काम नहीं
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नीमड़ीवाली गांव के टावर विवाद में प्रशासनिक अधिकारियों व ग्रामीणों के बीच हुई बैठक
हरियाणा न्यूज, भिवानी : नीमड़ीवाली गांव में एचवीपीएनएल के तहत बिजली के पोल लगाने को लेकर चल रहे विवाद में शुक्रवार को प्रशासनिक अधिकारियों और ग्रामीणों में बैठक हुई। जिसमें फैसला हुआ कि मामले में समझौता नहीं होने तक पोल लगाने का कार्य नहीं होगा। ग्रामीणों ने टाटा की बिछाई लाइन की तर्ज पर ही मुआवजा देने की बात कही। जिस पर अधिकारियों ने कहा कि अपनी फाइल बनाकर दें, जिसके तहत प्रस्ताव एचवीपीएनएल अधिकारियों और सरकार के पास रखा जाएगा। वहीं मामले में गिरफ्तार किए गए ग्रामीणों को वीरवार रात को रिहा कर दिया गया। neemdiwali tower controversy news,
उल्लेखनीय है कि पिछले तीनों दिनों से नीमड़ीवाली में एचवीपीएनएल की ओर से बिजली के पोल लगाने को लेकर विवाद चल रहा है। दो दिन पूर्व ग्रामीणों ने पोल लगाने का विरोध किया तो पुलिस ने करीब 40 ग्रामीणों को गिरफ्तार कर लिया। जिसमें 20 महिलाओं को तो उसी दिन रात को छोड़ दिया मगर अन्य को गिरफ्तार रखा। वीरवार को भी किसानों और पुलिस में धक्का-मुक्की हुई और गांव में बैठक भी हुई। शाम को ग्रामीणों ने जबरन खेत पहुंचकर काम रुकवा दिया। यहां भारी पुलिस फोर्स तैनात किया गया। वीरवार रात को जिला प्रशासन बातचीत को तैयार हुआ और ग्रामीणों की मांग के अनुसार गिरफ्तार किए गए करीब 20 ग्रामीणों को रिहा कर दिया। neemdiwali tower controversy case update
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इसी मामले में शुक्रवार दोपहर को प्रशासनिक अधिकारियों और ग्रामीणों में बैठक हुई। बैठक में प्रशासन की ओर से उपायुक्त नरेश नरवाल, पुलिस अधीक्षक वरुण सिंगला, एसडीएम दीपक बाबू लाल करवा के अलावा एचवीपीएनएल के अधिकारी शामिल रहे। वहीं ग्रामीणों की ओर से कमेटी सदस्य राकेश आर्य, सरपंच प्रतिनिधि लीलाराम, राजेश मंदेरना, मीर सिंह सिंहमार, सतबीर जांगड़ा, करतार गिल, बिजू, सुकर बोहरा, वीरभान गिल, ओम नंबरदार, गांव के बाहर से किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी, रवि आजाद, मंदीप नथुवान, रणधीर कुंगड़ शामिल रहे। बैठक में प्रतिनिधियों ने गांव नीमड़ीवाली को एक स्पेशल गांव का दर्जा देकर सुविधाएं देने की मांग की।
ग्रामीणों ने बताया कि यहां से काफी लाइनें गई हुई हैं। तार लटक रहे हैं। खेती करते समय करंट की संभावना रहती हैं। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि यहां कुछ समय पूर्व टाटा की ओर से लाइन बिछाई गई है और ग्रामीणों को 25 लाख रुपये प्रति टावर मुआवजा दिया है।
एचवीपीएनएल भी उसी तर्ज पर
मुआवजा दे। जिस पर उपायुक्त ने कहा कि उन कागजात के आधार पर एक फाइल तैयार करें। जिसमें सभी जरूरी दस्तावेज हों। तीन दिन में यह फाइल दे दें। जिन्हें एचवीपीएनएल अधिकारियों के पास भेजा जाएगा। जो उनके लेवल की मांग होगी उनसे पूरी कराएंगे। सरकार के लेवल की मांगों के लिए ऊपर लिखा जाएगा। बैठक में निर्णय हुआ कि जब तक समझौता नहीं होता तब तक काम नहीं होगा।
ग्रामीणों ने कहा कि अगर किसी दबाव में प्रशासन को काम शुरू करना पड़े तो पहले ग्रामीणों के साथ बैठक करें। ग्रामीणों पर दर्ज किए गए सभी मुकदमें खारिज किए जाएं और उनके वाहन उन्हें वापस दिए जाएं। साथ ही जो धरना खेत में चल रहा है, वह शांतिपूर्ण चलता रहे। इस समझौते के बाद 12 दिसंबर को होने वाली पंचायत को भी स्थगित कर दिया गया है। विवाद के बीच भारी संख्या में लेवल और पुलिस अपनी गाड़ियों, जेसीबी मशीनों के साथ खेतों में गई। खेतों में किसानों ने सरसों की बिजाई कर रखी थी।
जिस कारण जेसीबी और अन्य गाड़ियां खेतों के बीच से गुजरी और सारी फसल खराब हो गई। करीब 50 एकड़ में सरसों की फसल खराब होने का अनुमान है। औसतन 15 हजार रुपये प्रति एकड़ किसान को फसल बिजाई का खर्चा आया है। ऐसे में किसानों को यहां भी भारी नुकसान हुआ है।

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