हरियाणा का ऐसा गांव जहां अंतिम यात्रा चार लोगों के कंधों पर नहीं बल्कि ट्रैक्टर में निकाली जाती है
village in Haryana where the last rites are not carried out on the shoulders of four people but in tractor - Bhiwani News Today
जनप्रतिनिधियों व प्रशासन को अवगत करवाने के बावजूद नहीं हो रहा समाधानः मल्हान
हरियाणा न्यूज भिवानी : हरियाणा सरकार विकास के नए-नए आयाम स्थापित करने का दावा तो खूब करती है। लेकिन सरकार की अधिकतर योजनाएं दम तोड़ती हुई नजर आ रही है। पिछले 10 सालों में हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री दो बार गांव का दौरा कर अनेक वायदे कर चुके हैं। परंतु मुख्यमंत्री के गांव के दावों की पोल उसे समय दम तोड़ती हुई नजर आती हैं जब व्यक्ति की मौत के बाद भी उसे चार आदमियों के कंधे नसीब नहीं होते और उसकी अंतिम यात्रा चार लोगों के कंधों की बजाय ट्रैक्टर ट्राली में ले जाकर श्मशान घाट तक पहुंचाया जाता है। हरियाणा का ऐसा ही गांव भिवानी जिले का प्रेम नगर है जहां पर व्यक्ति की मौत होने पर शमशान घाट जाने के लिए रास्ता भी नहीं है।
भिवानी जिले के गांव प्रेमनगर में अनुसूचित जाति के शमशान घाट पर पहुंचने का रास्ता कच्चा हैं और उबड़-खाबड़ है, जहां पानी भरा रहता है, जिसके चलते जब किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो शमशान घाट तक शव को ले जाने के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। रविवार को भी यही परेशानी रही, जब गांव की वाल्मीकि बस्ती में बुजुर्ग की मृत्यु हो जाने पर उनकी शव यात्रा को कंधो की बजाय ट्रैक्टर ट्रॉली में लेकर जाना पड़ा।
यहीं नहीं शव यात्रा में शामिल लोगों को भी पानी में से निकलकर जाना पड़ा। पूर्व सरपंच प्रतिनिधि एवं अधिवक्ता संदीप मल्हान ने बताया कि ग्रामीणों को पिछले 6-7 वर्षो से ऐसी परेशानी से गुजरना पड़ रहा है। इस रास्ते को पक्का करने के लिए कई बार जनप्रतिनिधि व जिला प्रशासन को अवगत करवाया जा चुका है। पूर्व मुख्यमंत्री दो-दो बार आ चुके है तथा हर बार गांव के विकास के लिए अनेक घोषणाएं कर चुके है, लेकिन ये घोषणाएं हवा-हवाई हो गई, जिनका जमीनी स्तर पर कोई औचित्य नजर नहीं रहा। उन्होंने कहा कि अब गांव अपनी भूमि सरकार को दिए जाने के फैसले पर पछता रहा है, क्योंकि सरकार इस गांव के विकास एवं उत्थान के लिए कोई सकारात्मक सोच नहीं रख रही।
उन्होंने कहा कि जिले के शैक्षणिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए गांव प्रेमनगर द्वारा दी गई 131 एकड़ पंचातजी भूमि के बदले के युवाओं को विश्वविद्यालय 3 नौकरियों में न आरक्षण मिला और न गांव में विकास कार्य हुए। सरपंच राजेश बूरा ने बताया कि वास्तव में भूमि के बदले विश्वविद्यालय में नौकरियों का आरक्षण एवं अन्य रियायते ग्रामीणों को दी जानी चाहिए तथा साथ ही गांव के विकास के लिए मुख्यमंत्री अनेक घोषणाएं कर चुके है, जिन्हें जल्द पूरा किया जाना चाहिए।

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