RTI में बड़े घपले का खुलासा: पंचायत रिकॉर्ड में गांव में लाइब्रेरी, खरीदी एक लाख रुपए की पुस्तकें, गांव में ना लाइब्रेरी, ना ही पुस्तकें
RTI reveals big scam: Panchayat records show library in village, books worth Rs 1 lakh purchased, but there is no library or books in the village - Sirsa scam News
घुकांवाली की पंचायत ने 99 हजार रुपये में खरीदी पुस्तकें, सरपंच को पता ही नहीं कहां है लाइब्रेरी
![]() |
| मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत दिखाते ग्रामीण। |
हरियाणा न्यूज ओढां, राजू : विभागीय योजनाओं को धरातल पर किस तरह से पलीता लगाया जा रहा है इसका एक बड़ा उदाहरण ओढां खंड के गांव घुकांवाली में देखने को मिला। यहां पंचायत के रिकॉर्ड मेें पिछले करीब एक वर्ष से लाइब्रेरी चल रही है और इस के लिए करीब एक लाख रुपए की पुस्तकें भी खरीदी गई है जबकि गांव में ना ही तो छात्रों के पढ़ने के लिए लाइब्रेरी है और ना ही कोई पुस्तक है। बड़ी बात ये है कि इस लाइब्रेरी का न तो सरपंच को पता है और न ही बीडीपीओ कार्यालय को। पंचायत के 2 मेंबरों द्वारा जब इसका खुलासा किया गया तो सरपंच व बीडीपीओ कार्यालय के कर्मचारी एक-दूसरे पर बात थोपकर बचते नजर आए। लोगों ने मामले की शिकायत मुख्यमंत्री, उपायुक्त व कमिश्नर हिसार को भेजकर जांच की मांग उठाते हुए कार्रवाई करने की मांग की है।
दरअसल वार्ड नंबर 7 के पंच विनोद कुमार ने ग्राम सरपंच से गांव में लाइब्रेरी बारे आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगी थी। जो आरटीआई में जवाब मिला उसने लोगों को चौंका दिया। सरपंच ने आरटीआई में जानकारी दी कि ग्राम पंचायत द्वारा लाइब्रेरी के लिए 99 हजार रुपये की 509 पुस्तकें खरीदी गई। राशि का भुगतान अंबाला में एक पुस्तक प्रकाशन एजेंसी को चेक द्वारा किया गया। जबकि हैरान कर देने वाली बात तो ये है कि गांव में कोई लाइब्रेरी है ही नहीं। लोगों का कहना है कि सरपंच ने लाइब्रेरी को महज कागजों में चलती दिखाकर बीडीपीओ कार्यालय के कर्मचारियों के साथ मिलकर राजस्व विभाग को करीब एक लाख रुपये का चूना लगा डाला।
मामला उजागर होने के बाद न ही तो सरपंच के पास कोई संतुष्टिजनक जवाब है और न ही कार्यालय के कर्मचारियों के पास। सभी एक-दूसरे पर बात थोपते नजर आए। वहीं ग्रामीणों ने अधिकारियों से मांग करते हुए कहा कि इस मामले की जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
सरपंच बोलीं : मुझसे तो ग्राम सचिव ने करवाए थे चेक पर हस्ताक्षर
इस विषय में ग्राम सरपंच स्वर्णजीत कौर ने पूछे जाने पर तर्क दिया कि तत्कालीन ग्राम सचिव नारायण सिंह के कहने पर मैंने 99 हजार रुपये का चेक काटा था। ग्राम सचिव ने मुझसे कहा था कि उपायुक्त के आदेशानुसार गांव में लाइब्रेरी खोली जानी है। जिसके लिए पुस्तकें खरीदनी हैं। मुझे नहीं पता कि लाइब्रेरी कहां खोली गई है। मैंने तो 2 बार बीडीपीओ कार्यालय मेंं जाकर इस बारे पूछा भी था। जिस पर ग्राम सचिव ये जवाब देता रहा कि पुस्तकें आ जाएंगी। इस बारे ज्यादा जानकारी तो ग्राम सचिव नारायण सिंह ही दे सकता है। आप उनसे पूछ सकते हैं। लोग जो बात कह रहे हैं वो सच है। न तो गांव में लाइब्रेरी है और न ही हमारे पास किताबें। हम तो खुद चाहते हैं कि गांव में कोई अच्छी चीज आए।
ग्राम सचिव बोला : पुस्तकें तो सरपंच के पास ही होंगी
वहीं जब तत्कालीन ग्राम सचिव नारायण सिंह से बात की गई तो उसने कहा कि पुस्तकें तो पंचायत के पास ही होंगी, मेरे पास थोड़े ही है। पुस्तकों के बारे में तो पंचायत से पूछो कि कहां है। वैसे लाइब्रेरी तो है ही नहीं गांव में। वो किताबें डीडीपीओ व डीसी के कहने पर आईं थीं। बीडीपीओ कार्यालय में ही पड़ी होंगी कहीं। मुझे तो यहां से तबदील हुए एक वर्ष हो गया। ग्राम सचिव ने बात को बार-बार घुमाते हुए ये कहा कि किताबें तो आई हैं, हमारे डबवाली क्षेत्र में तो आ गई। मैं पूछ लेता हूं, यहीं कहीं पड़ी होंगी बीडीपीओ दफ्तर में। ग्राम सचिव पंचायत पर बात थोपते नजर आए। वहीं मौजूदा ग्राम सचिव सुलेन्द्र कुमार ने भी यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि वह तो करीब एक वर्ष पहले ही यहां आया है। उसे नहीं पता कि पुस्तकें कब और किसने खरीदी।
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री व उपायुक्त सहित अन्य उच्चाधिकारियों को भेजी शिकायत
ग्रामीण बोले : मामले की जांच कर हो कार्रवाई :-
पंच विनोद कुमार व सुखजीत सिंह, वकील सिंह, हाकम सिंह, मेजर सिंह, मनजीत सिंह, बिन्द्र सिंह व हरबंस सिंह ने कहा कि ग्राम पंचायत ने बीडीपीओ कार्यालय के कर्मचारियों के साथ मिलकर राजस्व विभाग को चूना लगाया है। इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। गांव में अगर लाइब्रेरी होती तो लोगों को फायदा मिलता। लेकिन सरपंच ने कर्मचारियों के साथ सांठ-गांठ कर कागजों में ही लाइब्रेरी खोल दी। करीब एक लाख रुपये की पुस्तकें खरीदी गई थीं तो वो कहां है। ये तो आरटीआई के माध्यम से पता चला अन्यथा ये लाइब्रेरी ऐसे ही कागजोंं में चलती रहती। ग्रामीणों ने कहा कि हो सकता है कि खंड के अन्य गांवों में भी इस तरह लाइब्रेरी चल रही हों।
हमसे कुछ समय पूर्व कुछ खंड के गांव कालांवाली, देसुमलकाना, मिठड़ी, नौरंग, नुहियांवाली व तिगड़ी में लाइब्रेरी हेतु पुरानी इमारतों के नवीनीकरण के लिए एस्टीमेट मांगे गए थे। गांव घुकांवाली में जो लाइब्रेरी बताई जा रही है वो हमारे पास रिकॉर्ड में नहीं है। इस बारे हमें कोई जानकारी नहीं है कि घुकांवाली में किसने पुस्तकें खरीदीं और कहां लाइब्रेरी है।
-- रविन्द्र कुमार, एसडीओ (पंचायती राज)


कोई टिप्पणी नहीं
Thanks