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राखी गढ़ी में उपजा विवाद समाप्त, ग्रामीणों के विरोध के आगे झुका प्रशासन

Rakhi Garhi dispute ends, administration bows to villagers protest

श्मशान भूमि को लेकर चल रहा था विवाद 



तहलका न्यूज, नारनौंद सुनील कोहाड़। 

हड़प्पा सभ्यता के ऐतिहासिक गांव राखी गढ़ी में श्मशान घाट की भूमि को लेकर चल रहा विवाद आखिरकार पांच दिन बाद समाप्त हो गया। ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए प्रशासन ने गांव से 500 मीटर दूर उनको भूमि दी गई है। धरने पांचवें दिन प्रशासन की तरफ से एसडीएम विकास यादव और बीडीपीओ सत्यवान धरना स्थल पर पहुंचे और ग्रामीणों द्वारा गठित कमेटी से बात कर उनको श्मशान घाट के लिए भूमि देने की घोषणा की। इस घोषणा के साथ ही गांव राखीगढ़ी में टीलों पर अंतिम संस्कार करने को लेकर उपजा विवाद समाप्त हो गया। 



ग्रामीणों की ये हैं मांगे

ग्रामीणों ने 11 व्यक्तियों की कमेटी संदीप लोरा की अध्यक्षता में गठित की हुई थी। जिसमें गांव की सरपंच मीनाक्षी भी शामिल थीं। कमेटी की मांग थी कि गांव के पास ही अंतिम संस्कार के लिए भूमि देकर उस पर श्मशान घाट बनाया जाए। एक वर्ग के लोगों के लिए कब्रिस्तान के लिए भूमि दी जाए और उसमें सभी सुविधाएं दी जाए। पशुओं को दफनाने के लिए भी एक एकड़ भूमि दी जाए। पुरातत्व विभाग द्वारा टीलों पर तैनात कर्मचारियों का तबादला किया जाए। महिलाओं की मांग थी कि उनको गोबर डालने के लिए उचित जगह दी जाएं।





सरकार उपले व गोबर डालने के लिए भी जमीन उपलब्ध करवाए

सावित्री, सुलोचना, रामकली, अनीता, शीला, सुदेश, अंगूरी, मुकेश नहीं बताया कि प्रशासन ने श्मशान घाट की भूमि की मांग पूरी करके अच्छा काम किया है। लेकिन महिलाओं को उपले बनाने के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि जिस जमीन पर वह पहले उपले बनाती थीं वह जमीन पुरातत्व विभाग ने ले ली है। हमें सरकार उपले व गोबर डालने के लिए भी जमीन उपलब्ध करवाए।



जल्द पूरी की जाएंगी मांगें: विकास यादव

एसडीएम विकास यादव ने बताया कि ग्रामीणों की जो मांगें थीं उनको जल्द पूरा किया जाएगा और जब तक दूसरी जगह श्मशान घाट पूरी तरह से बनकर तैयार नहीं हो जाता। तब तक अंतिम संस्कार के लिए उचित जगह का इंतजाम कर दिया है। कब्रिस्तान व पशु दफनाने के लिए के लिए भी एक-एक एकड़ भूमि की व्यवस्था कर दी है।



इस अवसर पर मास्टर रणवीर सिंह, अमरजीत मलिक, बिजेंदर नंबरदार, किताब सिंह, सुंदरलाल, बलवंत, तेजवीर, हनुमान राजेश इत्यादि विशेष तौर पर मौजूद थे।

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