MSP की मांग को लेकर भुख हड़ताल पर बैठे किसान
MSP की मांग को लेकर भुख हड़ताल पर बैठे किसान
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सिंधु बार्डर - एम एस पी पर कानून बनाने की मांग जोर पकड़ती जा रही है। सरकार के रुख को भांपते हुए सरकार पर दबाव के लिए सिंधु बार्डर पर किसानों ने रविवार कोभुख हड़ताल पर बैठ गए। वहीं जो किसान तीन कृषि कानून निरस्त होने पर घर वापसी की तैयारी कर रहे थे उन किसानों को भी भुख हड़ताल पर बैठे इन किसानों ने एक बार फिर से सोचने के लिए मजबूर कर दिया है कि उनकी लड़ाई में शामिल इन किसानों को वो आज अकेला छोड़कर कैसे जा सकते हैं।
किसान नेता अमित सांगवान ने बताया कि किसान पिछले काफी सालों से एम एस पी पर कानून बनाए जाने की मांग करते आ रहे हैं। लेकिन सभी सरकारें कमेटी बनाने के नाम पर गुमराह करती रही हैं। किसानों के मुद्दे पर आज तक किसी भी कमेटी की सिफारिशों को लागू नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि सन् 2011 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली कमेटी ने भी किसानों को एम एस पी पर कानून बनाए जाने को लेकर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। लेकिन उस समय 3 साल तक न तो मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार ने लागू किया और ना ही 2014 से सत्ता में बैठी नरेंद्र मोदी सरकार ने। जब खुद प्रधानमंत्री अपनी ही रिपोर्ट को लागू नहीं कर रहा हो तो फिर अन्य कमेटियों की रिपोर्ट का तो औचित्य ही कुछ नहीं रह जाता।
ये किसान बैठे भुख हड़ताल पर
नरेश सांगवान अम्बाला, करतार सिंह कैथल, सरदार सतनाम सिंह पटियाला, राजेंद्र सांगवान सोनीपत, सरदार विक्रमजीत सिंह गुरदासपुर 5 दिसंबर रविवार को एम एस पी की मांग को लेकर भुख हड़ताल पर बैठ गए। इन्होंने कहा कि किसान को आर्थिक आजादी चाहिए। हमें पूंजी पतियों व कर्ज की बेड़ियों से मुक्ति चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें भीख नहीं अपना हक चाहिए। क्योंकि किसान कभी किसी का गला नहीं काटता। उन्होंने कहा कि आज छांव में बैठकर दो रुपए का पेन बनाने वाले को अपने सामान का अधिकतम मूल्य रखने का हक है तो देश का पेट भरने के लिए वो दिन रात, गर्मी सर्दी और बारिश में भी कड़ी मेहनत करने वाले किसान को उसकी फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य क्यों नहीं। भुख हड़ताल पर बैठे किसानों ने कहा कि हम भुखे मरना मंजूर है। गुलामी की जंजीरों में जिना नहीं।

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