पर्दे के पीछे अमित शाह से बातचीत, औपचारिकता आज
क्या पर्दे के पीछे किसानों से बनी सहमति, औपचारिकता बाकी
ये है आंदोलन खत्म करवाने की वजह
दिल्ली -
किसानों को आंदोलन करते हुए एक साल से ज्यादा समय बीत चुका है। कृषि कानूनों को वापिस लेने के बाद भाजपा सरकार किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं उठाना चाहेगी। खास सूत्रों की मानें तो अनोपचारिक रुप से किसानों व सरकार के बीच लगभग सब कुछ तय हो चुका है। सोमवार को आधिकारिक रूप से बातचीत हो सकती है और किसान सात दिसंबर को होने वाली एसकेएम की बैठक में आंदोलन खत्म करने की घोषणा कर देंगे।
तीनों कृषि कानून निरस्त होने के बाद भी किसान आंदोलन खत्म करने को तैयार नहीं हैं और वो एम एस पी सहित अन्य मांगों को लेकर आंदोलन खत्म करने के मूड में नहीं दिखाई दे रहे हैं। सूत्रों की मानें तो मोदी सरकार ने किसान आंदोलन खत्म करवाने की पूरी जिम्मेवारी गृहमंत्री अमित शाह को सौंपी गई है कि किसी भी तरह से आंदोलन को खत्म करवा किसानों की घर वापसी हो जाए। इसको लेकर किसान संगठनों व गृहमंत्री अमित शाह के बीच पर्दे के पीछे एम एस पी पर कमेटी गठित करने, किसानों पर दर्ज मामले रद्द करने को लेकर सरकार व किसान लगभग सहमत हो चुकें है। वहीं आंदोलन में शहादत देने वाले किसानों के परिजनों को मुआवजा देने व एक दो मुद्दों पर भी चर्चा हो रही है। सूत्रों की मानें तो सोमवार को किसानों और सरकार के बीच सार्वजनिक रूप से बातचीत हो सकती है और सात दिसंबर से पहले भी आंदोलन खत्म का ऐलान किसी भी समय हो सकता है।
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किसान नेता रवि आजाद ने बताया कि अभी तक सरकार की तरफ से औपचारिक तौर पर बातचीत का कोई संदेश नहीं आया है। उन्होंने कहा कि सरकार तत्परता से किसानों से बातचीत कर किसानों की मांगों को पूरा करे। अन्यथा संयुक्त किसान मोर्चा सात दिसंबर को होने वाली बैठक में आगे की रणनीति तैयार कर ठोस निर्णय लेगा।
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किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि सभी किसान एकजुटता के साथ अपने हकों की लड़ाई लड़ रहे हैं। मीडिया में जो टेंट उखाड़ने व घर वापसी की खबरें आ रही हैं वो निराधार हैं। जब तक किसानों की मांगों को पूरा नहीं किया जाता तब तक किसान आंदोलन पर अगरसर रहेंगे। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने जल्द ही किसानों से बातचीत नहीं की तो संयुक्त किसान मोर्चा ठोस निर्णय लेगा।
ये है आंदोलन खत्म करवाने की वजह
पंजाब और यूपी सहित पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं उठाना चाहती। किसान आंदोलन में पंजाब और यूपी के किसान काफी सक्रिय हैं और आंदोलन खत्म नहीं हुआ तो इसका फायदा विपक्षी पार्टियों को मिल सकता है।





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