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प्रशासन के आदेशों को ठेंगा दिखा रहा है श्मशान की जमीन पर अवैध कब्जा

 

Government employees have taken possession of five acres of land of Talwandi Rana crematorium right under the nose of the district administration

जिला उपायुक्त को शिकायत के बाद भी पांच माह से पत्र-पत्र खेल रहे हैं अधिकारी

आठ मई 2023 को पंचों ने दी थी जिला प्रशासन को शिकायत

अवैध कब्जा हटवाने के लिए तीन माह पहले पंचायत भी पास कर चुकी है प्रस्ताव पारित



तहलका न्यूज, हिसार।

 कागजी तौर पर जिला प्रशासन पंचायती एवं सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जे हटवाने के लाख दावे करता हो, मगर जमीनी हकीकत कुछ ओर ही है। निकटवर्ती गांव तलवंडी राणा के श्मशान घाट पर जिला प्रशासन के चहेते कुछ सरकारी कर्मचारियों एवं एक दर्जन से अधिक दबंगों ने कब्जा कर रखा है। यह अवैध कब्जा हटवाने के लिए तलवंडी राणा के 16 पंच हर दरवाजा खटखटा चुके हैं, मगर जिला प्रशासन विगत पांच माह से ग्रामीणों से पत्र-पत्र खेल रहा है। अवैध कब्जा हटवाने के लिए ग्राम पंचायत भी तीन माह पहले प्रस्ताव पारित कर चुकी है। उसके बावजूद भी अवैध कब्जा हटाने की बजाय, जिला प्रशासन तमाशबीन बना हुआ है। ध्यान हो कि तलवंडी राणा पंचायत के 16 पंचों ने आठ मई 2023 को जिला उपायुक्त कार्यालय से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को करीब पांच माह पहले शिकायत देकर गांव के मुख्य श्मशान घाट की जमीन से अवैध कब्जा हटवाने की गुहार लगाई थी। उसके बावजूद भी जिला प्रशासन कोई कार्यवाही करने की बजाय एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय को ही पत्रचार कर रहे हैं। पंचायत के अनुरोध एवं पंचों की बार-बार शिकायत के बावजूद भी मामले में कार्यवाही एक इंच आगे नही बढ़ पाई है।





इन 16 पंचों ने की थी शिकायत:-

तलवंडी राणा श्मशान घाट की जमीन को अवैध कब्जा मुक्त करवाने के लिए पंच सोनू, रवि कुमार, सरिता, सुदेश, रीना, संदीप, सुनील, सुरेन्द्र, राजबाला, सुमित्रा वर्मा, पूजा, किरण रानी, मनीष, प्रवेश कुमार एवं बलवंत पंच सहित कुल 16 पंचों, छह पूर्व पंचों ने जिला प्रशासन को करीब पांच पहले शिकायत दी थी। उसके बाद ग्राम पंचायत तलवंडी राणा ने करीब तीन माह पहले प्रस्ताव पारित करके भी अवैध कब्जा हटवाने की गुहार लगाई थी।





कहां-कहां भेजी है शिकायत:-

गांव तलवंडी राणा के 16 पंचों एवं दूसरे जन-प्रतिनिधियों ने गांव की श्मशान भूमि से अवैध कब्जा हटवाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल, उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला, गृह मंत्री अनिल विज, पंचायत मंत्री देवेन्द्र बबली, जिला उपायुक्त हिसार सहित करीब एक दर्जन मंत्रियों से गुहार लगाई थी।





कब्जा हटवाने वालों का ही कब्जा:-

ग्रामीणों व पंचों के अनुसार तलवंडी राणा जमीन कब्जाने वालों में सीधा संबंध जिला प्रशासन के मुख्य अधिकारियों से है। इनमें से कई कर्मचारी जिला प्रशासन के मुख्य अधिकारियों के चहेते हैं और उनकी शह पर ही इन कर्मचारियों ने श्मशान भूमि कर कब्जा कर रखा है। चर्चा ये भी है कि जिस विभाग ने कब्जा हटवाना है कब्जा करने वाले कर्मचारी भी उन्हीं विभागों में तैनात हैं। ग्रामीणों के अनुसार वर्तमान में तलवंडी राणा की मुख्य श्मशान भूमि की करीब पांच-छह एकड़ पर इनका कब्जा है, और ये प्रत्येक वर्ष खेती की जुताई एवं बुवाई की आड़ में आधे से एक एकड़ जमीन कब्जा लेते हैं।






क्या है कहते हैं नियम:-

भू-राजस्व अधिनियम की धारा-91 के यदि पटवारी की मौका रिपोर्ट के आधार पर सरकारी जमीन पर किसी का अतिक्रमण/कब्जा पाया जाता है तो प्रशासन इसे अविलंब कब्जा मुक्त करवाने का प्रावधान है। इसमें कब्जा कार्यवाही का पूरा खर्च रकम कब्जा धारक से वसूलने का भी नियम है। साथ ही अतिक्रमी को तीन माह की साधारण कारावास की सजा भी हो सकती है। यदि किसी सरकारी कर्मचारी सरकारी भूमि पर कब्जा साबित हो जाता है तो उसके खिलाफ सामान्य कार्यवाही के साथ-साथ विभागीय कार्यवाही भी हो सकती है।


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