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एचएयू में भ्रष्टाचार चरम पर, hau कुलपति के संरक्षण में चहेतों की पौ बारह - मनोज राठी

Corruption is at its peak in HAU, under the patronage of HAU Vice Chancellor, all the favorites are there.

-मुख्यमंत्री, डीजीपी व अन्य को की जाएगी भ्रष्टाचार की शिकायत-

-किसान मेला आयोजित न करके विश्वविद्यालयों ने किसानों पर डाला बोझ-

-आप नेता ने लगाए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, तथ्य किए पेश-


हिसार। आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता एवं किसान मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष मनोज राठी ने हिसार स्थित हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार के बड़े आरोप लगाए हैं। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री, पुलिस महानिदेशक व अन्य को शिकायत भेजने का दावा करते हुए कुलपति व उनके चहेतों पर कार्रवाई की मांग की है।





मनोज राठी शनिवार को पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने ब्यौरेवार एचएयू में फैले भ्रष्टाचार व अनियमिताओं का जिक्र किया और कहा कि कुलपति के संरक्षण में उनके चहेते भी भ्रष्टाचार करने में पीछे नहीं है। उन्होंने कहा कि कई वर्षों से हर वर्ष 13 व 14 सितम्बर को किसान मेला लगता है, जिसमें किसान सरसों व अन्य फसलों के बीज लेकर जाते हैं। इस बार मेला नहीं लगा तो किसानों को बीज नहीं मिल पाया और वे अब प्राइवेट दुकानदारों के हाथों लुटने को मजबूर है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सरसों की बिजाई एक अक्टूबर से शुरू होनी है लेकिन एचएयू की ओर से कृषि मेला 8, 9 10 अक्टूबर को लगाया जा रहा है। यह सब प्राइवेट लोगों के हाथों सरसों व अन्य फसलों के बीज बिकवाने की योजना का हिस्सा है और इसमें लाखों का लेन-देन व भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने मांग की कि किसानों को आज से ही सरसों व अन्य फसलों के बीज मिलने चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एचएयू में लगभग 100-125 युवाओं को नौकरियां दी गई है, उनको नौकरियां देने में भी भारी भ्रष्टाचार हुआ है। उनमें से कुछ युवाओं ने उनसे मिलकर उन्हें ऐसा बताया भी है। अपने तीन-चार साथियों की मार्फत कुलपति सारा माल खा रहे हैं और डकार भी नहीं ले रहे।





मनोज राठी ने आरोप लगाया कि एचएयू में लगभग दो करोड़ की लागत से सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और कुलपति ने उनकी रिपेयरिंग का ठेका एक करोड़ का दिया है, जो बड़े घोटाले की ओर सेे इशारा कर रहा है। इसी तरह एचएयू के कृषि विज्ञान केन्द्र कौल में एक करोड़ से अधिक का चाइनीज सामान लगाया है, जबकि सरकार के सीधे आदेश है कि किसी भी सरकारी कार्यालय या संस्थान में चाइनीज सामान नहीं लगाया जा सकता लेकिन कुलपति के लिए सरकार के इन आदेशों के कोई मायने नहीं है। यूनिवर्सिटी के कोई वैज्ञानिक यदि कुलपति के इन कार्यों के खिलाफ आवाज उठाते हैं तो उनकी दूरदराज बदली कर दी जाती है। उन्होंने कहा कि गुुड़गांव में बनने वाले बिजनेस मैनेजमेंट कॉलेज का 75 करोड़ में काम होने का टेंडर जारी हुआ था लेकिन कुलपति ने बिना कोई सरकारी परमिशन लिए, 12 करोड़ का एक टेंडर और जारी कर दिया। इसी तरह कुलपति ने अपने चहेतों को ऐसी सीटों पर नियुक्त कर रखा है, जो उन्हें मोटा पैसा कमाकर देता है। इनमें एक रिटायरमेंट अधिकारी है, जिन्हें पुर्ननियुक्ति पर रखा गया है। उन्होंने कहा कि विश्व बैंक के पैसे से कुछ नव वैज्ञानिकों को रिसर्च के लिए बाहर जाना था लेकिन कुलपति ने रंजिशवश उन्हें जाने नहीं दिया और अपने चहेतों को भेज दिया। उन्होंने प्रदेश के जागरूक नागरिकों से अपील की कि वे एचएयू में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुट हो जाए और इस विश्वविद्यालय को बचाने में अपना सहयोग दें।



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