रामराय गांव का नाम कैसे पड़ा ? देखें रामराय गांव का इतिहास
How Ramrai village got its name, history of Ramrai villageरामह्रद के नाम पर बसा गांव रामराये भगवान परशुराम की कर्मस्थली एवं तपोभूमि : तैराकियों के इस गांव में भगवान राम यहां आए और रामह्रद तीर्थ में स्वयंसेवी बनकर की सेवा :
हरियाणा में रामह्रद के नाम पर बसा गांव रामराये भगवान परशुराम की कर्मस्थली एवं तपोभूमि है। यह गांव पवित्र देवभूमि कुरूक्षेत्र के दक्षिण पश्चिम यक्ष कपिल द्वारपाल के रूप में विख्यात है। वामन पुराण के अनुसार यहां पर कपिल यक्ष की पत्नी उलूखल मेखला यक्षी देवी का प्राचीन महाभारत कालीन मन्दिर व कपिल यक्ष डेरा 5000 ई0 पूर्व पुराना है और रामह्रद तीर्थ स्थल 7000 ई0 पुराना है। जींद-हांसी राजमार्ग पर चितंग नहर के पास बसे इस रामराये गांव में भगवान परशुराम अपनी माता रेणुका के साथ गुजरात से कुरूक्षेत्र की देव भूमि में आए।
गांव में भगवान परशुराम के पांच अमृत कुण्ड नामत:रामह्रद तीर्थ,सन्निहित सरोवर, सूरजकुण्ड,कल्याणी कुण्ड,गोविंद कुण्ड व चारों तरफ घाट हैं और प्राचीन व अर्वाचीन दो मन्दिर भी हैं। गांव के पश्चिम में स्थित भगवान परशुराम का प्राचीन तीर्थ,रेणुका घाट एवं प्राचीन मन्दिर का नवीनीकरण किया गया है। गांव की महान विभूतियों में (स्वर्गीय) दलसिंह ढुल का नाम उल्लेखनीय रहा जो गांव के प्रथम विधायक बने थे। गांव के समाज सेवी परमेन्द्र सिंह ढुल भी जुलाना क्षेत्र से दो बार विधायक रह चुके हैं। शिक्षाविद एवं 18 पुराणों के स्वाध्याय ज्ञाता फूलकुमार शास्त्री,मुख्य समाज सेवी मोहनलाल शर्मा,सरपंच प्रतिनिधि गंगाप्रसाद शर्मा,हरिचरण शर्मा,ललित शर्मा, शिवकुमार शर्मा (पप्पू),डीआईपीआरओ रिटायर्ड सुरेन्द्र कुमार वर्मा कोथ के अनुसार रामराये के पवित्र कुण्डों/तीर्थों में भगवान परशुराम ने प्रजातन्त्र व्यवस्था स्थापित करने में हताहत हुए राजा महाराजाओं की मुक्ति के लिए तर्पण किया था।
रामह्रद वर्तमान रामराये कुरूक्षेत्र भूमि का दक्षिणी द्वार है। इसी द्वार से कारवों और पाण्डवों की सेनाओं ने तपस्या में लीन भगवान परशुराम के दर्शन कर तथा उनका आशीर्वाद ग्रहण कर कुरूक्षेत्र भूमि में प्रवेश/पदार्पण किया था। अज्ञातवास के समय एवं धर्मयुद्ध में विजय के बाद तीर्थ यात्रा के अवसर पर पाण्डवों ने यहां पर भगवान परशुराम के सरोवरों में स्नान व तर्पण किया था। श्रीमद् भागवत महापुराण के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण द्वापर में द्वारिकापुरी से यादवों सहित सूर्यग्रहण के अवसर पर रामह्रद दूसरा नाम समन्त पंचक तीर्थ में स्नानार्थ आए तथा सभी ने यज्ञ दानादि किये। लेकिन रामराये के ब्राह्मणों द्वारा सूर्य ग्रहण के समय दान स्वीकार नहीं किया गया और यह परम्परा आज भी कायम है। कहते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण और राधिका का पुनर्मिलन यही पर हुआ था। यहीं पर भगवान राम अपनी पत्नी सीता व अपने भाई लक्ष्मण के साथ रावण युद्ध समाप्ति के बाद स्नानार्थ आए और रामह्रद तीर्थ में स्वयंसेवी बनकर सेवा की यथा:" राम खुदाई रामराये लछमन बांधी पाल-सीता ढोवे टोकरी श्री रामचन्द्र की नार"।
भगवान परशुराम से संकल्पित होकर भगवान राम फिर विजयदसवीं पर अयोध्या गये। देवकी,वासुदेव तथा बाबा नन्द,यशोदा,भूमि आन्दोलन के पुरोधा आचार्य विनोबाभावे, पूर्व कार्यवाहक प्रधानमंत्री (स्वर्गीय) गुलजारीलाल नन्दा एवं उच्च कोटि के साधु सन्यासी भी स्नानार्थ आए। केवल रामराये ही कुरूक्षेत्र भूमि का ऐसा तीर्थ है जहां पूर्णिमा के दिन देव पूजन होता है। पुराणों के अनुसार कार्तिक की पूर्णिमा को दिन के 12 बजे सभी 68 तीर्थ 33 कोटि देवता रामह्रद में एकत्रित होते हैं। भगवान परशुराम के पंच कुण्डों का समष्टि रूप रामह्रद का दूसरा नाम समन्त पंचक तीर्थ है यह ब्रह्मा की पांच वेदियों में से एक उत्तर वेदी है। यहीं पर महाराजा कुरू ने बिहार के गया से आकर भगवान शिव के बैल तथा यमराज के पौण्ड्रक भैंसे को सोने के हल में जोतकर धर्म की खेती की अत: इस क्षेत्र को कुरूक्षेत्र नाम से पुकारा जाता है।
रामह्रद तीर्थ में प्रत्येक पूर्णिमा को लोग दूर-दराज से स्नान करने आते हैं और अपने पूर्वजों को समर्पित दान पुण्य कर प्रसन्न करते हैं। रामराये के तीर्थों में स्नान व मन्दिरों के दर्शन आदि करने से मनुष्य निष्पाप होकर मनोवांछित फल पाता है। वैशाखी, श्रावणी, कार्तिकी पूर्णिमा को विशेष मेला लगता है। यद्यपि यह तीर्थ कुरूक्षेत्र विकास बोर्ड के कार्यक्षेत्र में आता है लेकिन अभी तक विकास बोर्ड ने इस तीर्थ के विकास का कोई प्रयास नहीं किया है। यहां पर श्रीब्राह्मण संस्कृत महाविद्यालय रामराये परिसर में भगवान परशुराम का नवनिर्मित विशाल मन्दिर है। इसके गर्भगृह में भगवान परशुराम व उनके पिता ऋषि जमदग्नि एवं माता रेणुका की इकट्ठी मूर्ति प्रतिष्ठा स्थापित है और सामने बड़ के प्राचीन पेड़,सत्संग भवन, छात्रावास, भगवान परशुराम के पुराने मन्दिर की मूर्ति स्थापना वाला अब भगवान शिव मन्दिर, माता रेणुका घाट,भगवान परशुराम घाट एवं तीर्थ है।
श्री ब्रा0सं0महाविद्यालय प्रबन्ध कमेटी के प्रधान ऋषिकान्त शर्मा,संरक्षक फूलकुमार शास्त्री,व्यवस्थापक ललित शर्मा,महासचिव धर्मपाल शास्त्री,वरिष्ठ उपप्रधान राजेन्द्र प्रसाद शास्त्री ,कोषाध्यक्ष संजय कुमार गौतम,डा सुरेन्द्र शर्मा,प्रिंसीपल ज्ञानचन्द शर्मा,राजेश शास्त्री,संजीव,अशोक कुमार,मुकेश के अनुसार वर्ष 1948 में स्थापित श्रीब्राह्मण संस्कृत महाविद्यालय परिसर में ब्राह्मण धर्मशाला,अन्नपूर्णा भवन, वेद भवन,हाल,लाइब्रेरी,व अन्य शिक्षण कक्ष हैं जहां प्राज्ञ, विशारद, शास्त्री, कर्मकाण्ड पुरोहित व अन्य पाठ्यक्रम के अलावा संस्कृत नैतिक मूल्यों की शिक्षा भी निशुल्क दी जाती है। यहां से शिक्षा प्राप्त करने के बाद अनेकों विद्यार्थी सर्विस लगकर अपना जीवन सुधार चुके हैं। इनमें कोथकलां के रामबीर शास्त्री करने के बाद हरियाणा पुलिस में कार्यरत हैं।
गांव में प्रवेश द्वार के पास स्थापित गौरवपट से साफ झलकता है कि महान विभूतियों वाले इस गांव में पूर्व विधायक (स्वर्गीय) दलसिंह ढुल,परमेन्द्र सिंह ढुल पूर्व विधायक के अलावा (स्वर्गीय) चंद्रभान ढुल (आईपीएस) पूर्व चेयरमैन एचपीएससी,जसवीर ढुल व नरेन्द्र कौर अतिरिक्त सैशन जज, देवेन्द्र गौतम (आईएएस) रिटायर्ड,शिवचरण शर्मा आईजी पुलिस (आईपीएस), सुधांशु गौतम एचसीएस, (स्वर्गीय) रघुनन्दन व नत्थूराम डीएफओ रिटायर्ड, दलीपसिंह नम्बरदार व पूर्व ए जी रविन्द्र ढुल, सुनील ढुल आनररी कैप्टन रिटायर्ड आर्मी, महेश शर्मा, संजीव व संदीप ढुल सूबेदार ,मुख्य समाज सेवी मोहल लाल शास्त्री,धर्मेन्द्र ढुल आदि के नाम भी शामिल हैं जिन्होंने गांव क्षेत्र समेत हरियाणा का नाम रोशन किया। स्वतन्त्रता सैनानियों में स्वर्गीय बदलूराम, मोलड़राम,वैद्य देवीदयाल व रामसरूप ढुल के नाम उल्लेखनीय रहे। उत्कृष्ट खिलाड़ियों के इस गांव में रामभतेरी(अन्तर्राष्ट्रीय तैराकी),प्रेमसिंह ढुल व रमेश गौतम डीएसपी तैराकी, सुनील,संदीप,संजय,गोविंद,रामपाल व ईश्वर तैराकी के नाम भी शामिल हैं।
गांव की वर्तमान महिला सरपंच आरती शर्मा एवं प्रतिनिधि प्रदीप शर्मा व गंगाप्रसाद शर्मा (प्रसादा),पंचायत समिति सदस्य मुकेश सैनी व पवन सैनी,पूर्व सरपंच सन्तोष धर्मपत्नी (स्वर्गीय) कुलदीप ढुल,राजेन्द्र ढुल,प्रीतम सुपुत्र स्व सुरेश वर्मा,सतीश वर्मा,आकाश,डा विनोद वीएलडीए,कमलजीत सोनी,राजेश वर्मा एफओ,कृष्ण सोनी,फूलकुमार,योगेश,सज्जन सोनी सुभाष,रामफल,विकास (सोनू ), बीडीपीओ खजानचंद शर्मा, गंगासिंह,धर्मबीर लौहान,संदीप लौहान,बन्टू ढुल,राजबीर,सतबीर,रामरतन,76 वर्षीय ज्योतिप्रकाश व रिटायर्ड मा रामकुमार,राजेश जांगडा़,तीर्थकुमार शर्मा,जगदीश प्रजापत,नम्बरदार राजेराम जांगडा़, सूरजमल व दलीपसिंह के अनुसार इस गांव में जन सुविधाओं के लिए ग्रामीण सचिवालय,अटल सेवा केन्द्र (सीएससी),राजकीय सीनियर सेकेण्डरी स्कूल,राजकीय प्राथमिक कन्या पाठशाला, प्राचीन धरोहर मैढ क्षत्रीय सुनार धर्मशाला एवं जागिड़ धर्मशाला, वाल्मीकी धर्मशाला निर्माणाधीन व घाट, गुरू रविदास धर्मशाला समेत अन्य धर्मशालाएं,आयुष हैल्थ एण्ड वैलनेस सेंटर व पेड़पौधों से युक्त सुन्दर पार्क, बिजली घर,पशु चिकित्सालय,जलघर, चौपालें,सिंहमल वाला तालाब, सुन्दर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र,शिव मन्दिर,महन्त केदारनाथ समेत बाबा गूद्दड़ का डेरा,दसनामी अखाड़ा व अन्य प्राचीन यादगार भी हैं। लगभग साढे़ 8 हजार की आबादी वाले इस गांव में विभिन्न जातियों के लोग आपसी प्रेम व भाईचारे से रहते हैं। गांव का रकबा 18 हजार बीते है और सिंचाई के साधन चितंग नहर व टयूबवैल हैं। रामराये ब्लाक समिति मैम्बर मुकेश सैनी जींद ब्लाक एसोसिएशन के प्रधान भी हैं।
गांव में रामह्रद समाज कल्याण समिति, बाबा परशुराम युवा क्लब भी बना हुआ है। यहां की लड़कियां एवं व्यक्ति लगभग सभी तैरना जानते हैं और भगवान परशुराम के आशीर्वाद एवं खेल कोटे की वजह से यहां के अनेकों व्यक्ति युवा सरकारी नौकरियों विशेषकर फौज, पुलिस व सिविल सर्विसेज एवं अन्य विभागों में कार्यरत हैं। यहां के लगभग 150 लड़के राष्ट्रपति भवन, पीएम हाऊस व अन्य स्विमिंग पूल में बतौर लाईफगार्ड व स्विमिंग कोच की सुविधा दे रहे हैं। धनराज शर्मा, अनिल शर्मा, व विनोद श्योकन्द नेशनल व एशियाड लेवल के तैराक हैं जो रामराये स्कूल में स्विमिंग कोच लगे हुए हैं।




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