JJP को झटका: नारनौंद क्षेत्र से तालुक रखने वाले विधानसभा चुनाव लड़ चुके नेता ने छोड़ी जेजेपी
Haryana Fatehabad news : leader who contested assembly elections belonging to Narnaund region left JJP
डॉ सिवाच ने जेजेपी को कहा अलविदा, मात्र 3300 वोटों से हारे थे चुनाव
तहलका न्यूज, फतेहाबाद, सुनील कोहाड़।
जननायक जनता पार्टी को आज उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रदेशाध्यक्ष एवं पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशी रहे डा. विरेंद्र सिवाच ने पार्टी को अलविदा कह दिया। उन्होंने आज यहां पत्रकारवार्ता में कहा कि वे पार्टी आलाकमान द्वारा नजरअंदाज करने और पार्टी पदाधिकारियों की कार्यशैली दोनों से खफा थे, उनके वर्करों के काम नहीं हो रहे, इसलिए आज वे पार्टी से इस्तीफा दे रहे हैं। आगे क्या करना है, इस बारे में वे अपने वर्करों से विचार विमर्श करेंगे, तब तक वे आजाद रहेंगे। उनके लिए पार्टी छोड़ना बहुत तकलीफदेय है।
आपको बता दें कि डा. विरेंद्र सिवाच 2019 के चुनाव से पहले भाजपा को छोड़कर चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके थे, तब ऐन मौके पर जेजेपी ने उन्हें अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया था। तब भाजपा प्रत्याशी एवं विधायक दुड़ाराम को उन्होंने कड़ी टक्कर दी थी और वे मात्र 3300 वोटों से चुनाव हार गए थे। विधायक दुड़ाराम को 77 हजार 369 तो डॉ. सिवाच को 74069 वोट मिले थे।
पत्रकार वार्ता में डा. सिवाच ने कहा कि अगर कार्यकर्ताओं के काम न हों तो मेरे लिए बहुत तकलीफदे बात है। उन्होंने कहा कि वे राजनीति में समाजसेवा के लिए आए थे और हमेशा समाजसेवा करना चाहते हैं, पार्टी हमेशा कहती है कि उन्हें पूरा मान सम्मान दिया जा रहा है, लेकिन मान सम्मान देने से काम नहीं चलता। उन्होंने जब इलेक्शन लड़ा तो उन्होंने पार्टी हाईकमान को आगाह किया था कि पार्टी के ही कुछ पदाधिकारी रात को एक-एक बजे तक पूरी रिपोटिंग विरोध धड़े को करते हैं, इन लोगों को चुनाव के बाद न केवल पद पर रखा बल्कि पदोननत भी दी। क्या इस तरह सम्मान दिया जाता है।
जिला परिषद चेयरपर्सन चुनाव के दौरान उन्होंने पार्टी मीटिंग में खुल कर बताया था कि पार्टी केही किन लोगों ने पार्टी को नुक्सान पहुंचाया है, जिप चेयरपर्सन का पद जो जजपा का होना चाहिए था, वह कैसे दूसरे दल के हाथ में चला गया, प्रदेशाध्यक्ष खुद जाकर उन्हें तोहफे के रूप में पद दे आए, जिन्हें उस समय जरूरत थी। इन चीजों से वे बेहद आहत हैं।
उन्होंने कहा कि आज वही लोग कान भरकर हमसे स्पष्टीकरण कैसे मांगते हैं। काम हो नहीं रहे और मान सम्मान की बातें हो रही हैं। वे पार्टी द्वारा नजरअंदाज करने और लोकल पदाधिकारियों की कार्यशैली से नाराज हैं, पार्टी का रवैया भी नकारात्मक रहा है। पार्टी छोड़ने से उनके समर्थकों पर असर पड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि लोगों का प्यार हमेशा खूब मिला है और यह और मजबूत हो रहा है। वे हमेशा लोगों की आवाज बने हैं, भले ही किसान आंदोलन में किसानों का साथ देना हो, कोरोना मेडिकल स्टाफ को हटाने पर उनके आंदोलन हो या फिर लैब टैक्नीशियन या कर्मचारियों के धरने की बात हो, वे हमेशा जनता के साथ खड़े रहे हैं।

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