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बारिश और ओलावृष्टि से खेतों का मंजर देख किसानों के छलके आंसू , अगले दिन तक खेतों में पड़े मिले ओले , खुडों में रुला किसानों का पीला सोना !

 Haryana news Seeing the view of the fields due to rain and hailstorm, the farmers shed tears, till the next day hailstones were found in the fields


ओलावृष्टि से गेहूं की फसल में शत् प्रतिशत नुकसान 

तहलका न्यूज, हरियाणा


शुक्रवार को प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश हुई और बारिश के साथ ओलावृष्टि ने किसानों के दिलों की धड़कनों को बढ़ा दिया है। क्योंकि सरसों की कटाई चल रही है और गेहूं की फसल पकने को तैयार हैं ऐसे में छः महीने की दिन रात मेहनत कर तैयार की गई फसल बर्बाद हो रही है और वो कुछ नहीं कर सकते। महेंद्रगढ़ जिले में चौबीस घंटे बाद भी खेतों में ओले पड़े देख किसानों चिंता को बढ़ा दिया है। किसानों का अनुमान है कि अब तक गेहूं और सरसों की फसल में 80 से 90% हो चुका है और मात्र फिसदी ही बची है। ऐसे में वो घर में खाने में प्रयोग करें या घर के अन्य काम निकालने में? जींद जिले में हर साल बढ़ रहा है नुकसान का आंकड़ा तो हिसार जिले में किसान संगठनों ने किया प्रभावित गांवों का दौरा। सोमवार को मुआवजे की मांग और स्पेशल गिरदावरी की मांग को लेकर सौंपेंगे ज्ञापन।








महेंद्रगढ़ के आधा दर्जन से अधिक गांवों में अगले दिन भी ओले खेतों में पड़े हुए मिले हैं। शुक्रवार शाम को भारी ओलावृष्टि का दर्द 24 घंटे बाद भी किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने काम कर रहा। शनिवार को जब किसान अपने खेतों में गए और ओलावृष्टि से हुए नुकसान को देखकर किसानों की परेशानी ओर बढ़ गई। क्योंकि खलिहानों में ओले ज्यों के त्यों पड़े हुए थे। 








खुडों में रुला किसानों का पीला सोना 


कर्मबीर, संदीप, रोशन, भलेराम, भरथू, नुनिया, पाला इत्यादि किसानों ने बताया कि गांव बलायचा, निंबेड़ा, भांखरी की ढाणी, बुडीन, खातोदड़ा सहित आसपास के गांव में शुक्रवार को तेज बारिश के साथ 20 मिनट तक भारी ओलावृष्टि हुई थी। खेतों से लेकर मकानों की छतों ओलों के ढेर ढेर लग गए। किसानों ने बताया कि अभी तक उन्होंने अपनी जिंदगी में ऐसी ओलावृष्टि कभी नहीं देखी। क्योंकि इस बार 24 घंटे बाद भी ओले‌ खेत खलिहानों में पड़े हुए मिले हैं । किसानों का कहना है कि गेहूं की खड़ी फसल तो शत प्रतिशत तबाह हो गई हैं। कटाई पर आया गेहूं जमीन में बिखर चुका है। वहीं सरसों के खलिहानों में ओलों के आपस में चिपकने से 10 से 20 किलोग्राम के ढेर जम गए। 








80 साल की जिंदगी में ऐसी ओलावृष्टि कभी नहीं देखी 


कलावती ने बताया कि वो 80 दिपावली देख चुकी है, लेकिन अब तक ऐसी ओलावृष्टि उसने नहीं देखी। कलावती ने बताया कि खेत में काम करती है और खेती सही अपने बच्चों का पालन पोषण करती है। शुक्रवार को बारिश हुई तो शनिवार को दोपहर बाद जब वो खेत में गई तो खेत का मंजर देखकर वह हैरान रह गई। क्योंकि 18 घंटे बीत जाने के बाद भी सरसों के खलिहानों में ओले पड़े हुए थे। वहीं गेहूं की पक्की पकाई फसल‌ खुड्डों में रुल चुकी थी।








जींद में हर साल बढ़ रहा है रबी फसल में नुकसान का आंकड़ा 

मार्च माह में कई वर्षों बाद बारिश आफत बन गई है। इसके कारण फसलों को काफी नुकसान हुआ है। इस वर्ष मार्च महीने में जिले में 45 एमएम बारिश हुई है, जो पिछले कई वर्षों के बाद हुई है। 2022 में कोई बारिश नहीं हुई, जबकि 2021 में केवल 7.5 एमएम बारिश हुई थी। वहीं शुक्रवार को भी दिनभर बूंदाबांदी होती रही। कई दिन से मौसम खराब होने के कारण फसलों को काफी नुकसान हो रहा है। गेहूं की फसल में हर बारिश के बाद नुकसान का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है।












हिसार जिले में किसान संगठनों ने किया प्रभावित गांवों का दौरा, सोमवार को सौंपेंगे ज्ञापन 

हिसार जिले में भी ओलावृष्टि के कारण काफी नुकसान हुआ है।   किसान संगठनों व रामायण मय्यड़ टोल प्लाजा कमेटी ने ओलावृष्टि व बारिश से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए गांव भकलाना, मोहला, बड़छप्पर, बास गांव में जाकर खराब फसलों का आंकड़ा ईक्कठा किया। किसान संगठनों ने जिला प्रशासन और सरकार से आह्वान किया है कि तुरंत स्पेशल गिरदावरी करवाकर प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया जाए। वहीं हिसार में बीते दिन ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान हुआ। शनिवार को लाडवी गांव के किसान कट्‌टों में ओले भरकर डीसी ऑफिस पहुंचे, लेकिन डीसी के न होने पर वे उसकी कोठी पर पहुंच गए। यहां भी डीसी नहीं मिले।











तीन अप्रैल तक करवा सकते हैं किसान क्षतिपूर्ति पोर्टल पर पंजीकरण 

बारिश एवं ओलावृष्टि के कारण रबी फसलों के नुकसान से किसानों को राहत दिलाने के लिए ई-फसल क्षतिपूर्ति पोर्टल 3 अप्रैल 2023 तक खोला गया है। ई-फसल क्षतिपूर्ति पर सूचना देने के लिए मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर फसल का पंजीकरण करवाना जरूरी है। प्रदेश सरकार ने फसल में हुए नुकसान को देखते हुए ई-फसल क्षतिपूर्ति को दोबारा खोल दिया  है। किसान अब अपनी फसलों में हुए नुकसान का पंजीकरण तीन अप्रैल तक क्षतिपूर्ति पोर्टल पर नुकसान दर्ज करवा सकते हैं।

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