राखी गढ़ी के टीलों से खुदाई में निकली दिवार, सोने की भट्टी या कोई अन्य उघोग थे 8 हजार साल पहले।
तहलका न्यूज, नारनौंद / सुनील कोहाड़
पुरातात्विक स्थल राखी गढ़ी की खुदाई के दौरान साइट नंबर एक पर कच्ची ईंटों के मकान के प्रमाण मिले हैं। पुरातत्व विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मकान उस जमाने में लगे उद्योगों में काम करने वाले मजदूरों के हो सकते हैं। क्योंकि अभी तक की खुदाई में इस साइट पर कुछ भट्ठियों के प्रमाण भी मिल चुके हैं। वहीं आज के जमाने में भी फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों के लिए इसी तरह के पक्के मकानों का इस्तेमाल किया जाता है। जिससे ये अनुमान लगाया जाता है कि यहां पर उस जमाने में भी कोई न कोई उद्योग स्थापित रहा होगा।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में राखी गढ़ी का हजारों साल पहले इंट्री
हड़प्पाकालीन माने जाने वाले राखीगढ़ी के इतिहास को दुनिया के सामने लाने के लिए पुरातत्व विभाग खोदाई करा रहा है। साइट नंबर एक पर पिछले साल मई तक हुई खुदाई के दौरान कई भट्ठियों के मिलने से इसे व्यापारिक शहर भी माना जा रहा है। खुदाई के दौरान मिले अवशेषों से यह साफ हो गया है कि करीब 8000 वर्ष पहले भी राखी गढ़ी से दूसरे देशों में भी व्यापार होता था। अब खोदाई के दौरान कच्ची ईंटों की दीवार मिली है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इन ईंटों से बने मकान में उस वक्त यहां की फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूर रहते थे।
अभी तक हुई खुदाई से पता नहीं लग पाया है कि इन लोगों के व्यापार के मुख्य स्रोत क्या थे। आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया के अधिकारी यही जानना चाहते हैं कि यहां मिले सोना, चांदी, शंख, धातु, मनके, बीड्स व अन्य कीमती पत्थर कहां से आते थे। खुदाई के समय सोने के टुकड़ों के कई प्रमाण मिले हैं, जिससे कि यहां सोने के आभूषण तैयार किए जाते रहे होंगे। लेकिन सोने के जो टुकड़े यहां मिले हैं उनकी अभी जांच पूरी नहीं हुई है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि यहां कितने बड़े स्तर पर आभूषण बनाने का काम होता रहा होगा।
खुदाई में मिल चुके है फैक्टरी एरिया के प्रमाण
पिछले साल हुई खोदाई के दौरान साइट नंबर एक पर फैक्ट्रियों के अवशेष मिले थे। अनुमान लगाया जा रहा है कि यह शहर उस वक्त औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित था और यहां कच्चे माल से पक्का माल तैयार किया जाता था।

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