क्या पांच हजार साल पहले भी होते थे इंजीनियर, राखी गढ़ी के टीलों में दफन राज एक एक कर आ रहे हैं बाहर !
हड़प्पा काल में भी नक्शे से बनाए जाते थे मकान, नर कंकालों का डीएनए टेस्ट से होगा खुलासा
हिसार : सुनील कोहाड़ / तहलका न्यूज
राखी गढ़ी का नाम विश्व के मानचित्र पर अंकित हो चुका है और राखी गढ़ी के टीलों की एक साथ तीन साइटों पर खुदाई का कार्य किया जा रहा है। आए दिन नए नए चौंकाने वाले अवशेष मिल रहे हैं। जिन्हें देखने के लिए आसपास ही नहीं बल्कि दूर दराज के लोगों का जमावड़ा लग रहा है। वहीं राखी गढ़ी को पर्यटक स्थल विकसित करने के लिए हरियाणा सरकार के साथ साथ केंद्र सरकार भी प्रयासरत है।
हड़प्पा सभ्यता को लेकर राखी गढ़ी की आइकोनिक साइट वर्ड हैरिटेज में शुमार हो चुकी है। यहां के टीलों की खुदाई चौथी बार की जा रही है। खुदाई के दौरान निकलने वाले अवशेषों का पुरातत्व विभाग से जुड़े प्रोफेसर व छात्र गहनता से अध्ययन करने में जुटे हुए हैं। इन टीलों पर एक साथ तीन साइटों पर खुदाई कार्य किया जा रहा है। जिनमें एक और तीन नंबर साईट पर उस समय के लोगों के रिहायशी मकान मिले हैं। वहीं सात नंबर साईट पर नर कंकाल मिट्टी में मिले हैं।
पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के जानकारों का मानना है कि खुदाई के दौरान निकली दीवारों की बनावट से साबित होता है कि उस समय के लोग भी पूरी प्लानिंग के साथ मकानों का निर्माण किया करते थे। मकानों की आकृति देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि उस समय में भी नक्शा-नवीश होते थे। क्योंकि इन मकानों की बनावट वैसी ही है जोकि आजकल चंडीगढ़ जैसे बड़े बड़े शहरों में एक आकृति के मकान तैयार किए जाते हैं। इसी आधार पर इस शहर को बसाया गया होगा।
वहीं इन मकानों से गंदे पानी की निकासी का भी उचित प्रबंधन किए जाने का रहस्य मिला है। इन मकानों से पानी की निकासी के लिए पक्की नालियां मिली है जोकि पक्की सड़क से होती हुई बड़ी नाली में जाकर मिलती थी। साथ ही आज के युग की तरह गलियां भी पक्की होती थी। साथ ही साफ सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता था। इसके लिए गड्डा खोदकर उसमें कचरा डाला जाता था। इससे साबित होता है कि उस समय के लोग भी सफाई पसंद लोग थे।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण दिल्ली के संयुक्त महानिदेशक डॉ. संजय मंजुल ने बताया कि हड़प्पा संस्कृति के अवशेष बयां करते हैं कि उन लोगों ने भी अपने जीवन में खुब तरक्की की होगी। शुरूआत में कच्ची ईंटों के मकान मिले हैं। वही अर्ली हड़प्पन में पक्की ईंटों की दीवार भी पाई गई है। उनकी मकान बनाने की प्लानिंग बड़ी ही लाजवाब की थी। उस समय भी इंजीनियर होंगे इसके अभी कोई सबूत तो नहीं मिले हैं। लेकिन जिस तरीके से यह शहर बसाया गया था। उससे साबित होता है कि इसको पूरी प्लानिंग करके ही बसाया गया होगा। उन्होंने बताया कि खुदाई में काफी महत्वपूर्ण चीजें पाई गई हैं। जिन पर अध्ययन जारी है। टीले नंबर सात से दो कंकाल का डीएनए सैंपल लिया गया है। डीएनए सैम्पल की रिपोर्ट आने के बाद देश का इतिहास बदलने वाला है।

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