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संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक शुरू, आंदोलन को लेकर धड़कने तेज

 पंजाब के किसान घर वापसी तो हरियाणा यूपी के किसान आंदोलन जारी रखने के पक्षधर

संयुक्त किसान मोर्चा लेगा फैसला

फाईल फोटो

सिंधु बार्डर - सुनील कोहाड़

 मोदी सरकार ने भले ही तीनों कृषि कानूनों को संसद के दोनों सदनों में भी निरस्त कर दिया हो। लेकिन किसान आंदोलन का रास्ता अब भी छोड़ने को तैयार नहीं हैं। एम एस पी सहित अन्य मुद्दों पर अब भी सरकार व किसानों के बीच पैंच फसा हुआ है। इन मुद्दों को लेकर किसान संगठन भी अलग-अलग हवाला दे रहे हैं। पंजाब के कुछ किसान संगठन घर वापसी के हक में हैं तो हरियाणा, यूपी, राजस्थान और पंजाब के ही किसान संगठन सभी मुद्दों पर सहमति के बिना घर वापसी के लिए तैयार नहीं हैं। वहीं सरकार भी किसानों से दूरी बनाए हुए है और कोई बीच का रास्ता निकालने के लिए किसानों से बातचीत भी नहीं हो रही।‌ ऐसे में किसान एकजुटता से आंदोलन में डटे रहते हैं या फिर अलग थलग होते हैं। इसको लेकर सरकार का खुफिया तंत्र भी सक्रिय हो चुका है कि कितने किसान संगठन घर वापसी पर राजी हैं और संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में क्या फैसला किया जाता है।

सूत्रों की मानें तो सरकार किसानों को भांपने में लगी हुई है कि किसान अब भी एकजुट रहते हैं या नहीं। अगर किसान एक जुट होकर आगे आंदोलन जारी रखते हैं तो निश्चित रूप से शीतकालीन सत्र के आखिरी दिनों में सरकार किसानों से बातचीत कर उनकी समस्या का हल कर देगी। क्योंकि जनवरी में यूपी सहित पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव होने हैं और आंदोलन खत्म नहीं हुआ तो इसका दुष्प्रभाव भाजपा पर अवश्य ही पड़ेगा।

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