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DNA से खुलासा, इस तरह से ईंटों पकाते थे हड़प्पन लोग

 जैविक खेती करने की परंपरा है हजारों वर्ष पुरानी

नारनौंद : सुनील कोहाड़



हड़प्पा सभ्यता को लेकर राखी को लेकर राखी गढ़ी का नाम सुनहरे अखसरों में अंकित है। क्योंकि इस साईट को सरकार ने पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने के लिए आईकोनिक साईट घोषित किया हुआ है। अब तक यहां पर हुई खुदाई में अनेकों अवशेष मिल चुके हैं। समय समय पर अनेकों बार राखी गढ़ी साईट की खुदाई की जा चुकी है। रविवार को जींद के डीएवी स्कूल के छात्रों ने भ्रमण कर यहां के रहस्यों के बारे में हड़प्पा सभ्यता के डैक्कन यूनिवर्सिटी से पीएचडी बलराम सिंह से इस बारे में विस्तार पूर्व जानकारी हासिल की।




बलराम ने बताया कि राखी गढ़ी की ये साईट छ: से आठ हजार वर्ष पुरानी है और फिलहाल जो गांव बसा हुआ है उसको अब सरकारी रिकार्ड के अनुसार दो भागों में बांटा गया है। राखी खास और राखी शाहपुर है। लेकिन एसआई ने इसको राखी गढ़ी का नाम दिया है। राखी गढ़ी साईट को पुरातत्व विभाग ने 9 भागों में बांटा गया है और हर एक साईट को 1,2,3 क्रमश नंबर दिए गए हैं। जहां पर आप लोग खड़े हो वहां पर कभी किसी का घर हुआ करता था। उन्होंने बताया कि यूरोपियन देश कहते हैं कि वेश्ट्रन शौचालयों की देन उनकी है। लेकिन खुदाई के दौरान ये साबित हो चुका है कि हड़प्पा सभ्यता के लोगों ने सबसे पहले इसका प्रयोग किया था और इनको आप खुदाई के  दौरान निकले मकानों के नक्शे से आसानी से अंदाजा लगा सकते हैं। 


    किताबों में तो राखी गढ़ी के इतिहास के बारे में नाममात्र ही पढऩे को मिलता है। परंतु साईट पर आकर देखने से बहुत कुछ सिखने को मिलता है। यहां पर हुई खुदाई के दौरान मिट्टी की चुडिय़ां, मिट्टी के बर्तन, मिट्टी के मणकें सहित अनेकों


अवशेष निकल चुके हैं। पिछली बार की खुदाई में साईट नंबर सात से मानव कंकाल मिले थे। जिनके डीएनए रिपोर्ट आने से ये भी साबित हो गया है कि आर्य लोग यहां के बसिंदे थे। ना की वाहर से आए थे। यहां के लोग पहले दिवारों में प्रयोग होने वाली र्ईटों को दो तरह से पकाते थे। एक तो भटठा लगाकर और दूसरा सूर्य की किरणों से भी ईंटों को पकाया जाता था। इससे ये साबित हो चुका है कि हमारी विज्ञान से ज्यादा एडवांस विज्ञान उनकी थी। यहां के मकानों से पानी की निकासी के उचित प्रबंध थे और सब नालियां सड़क पर नाले तक जाती थी। उस समय में भी गलियां पक्की होती थी और बहुत चौडी होती थी। वहीं उन लोगों का व्यापार ईरान ईराक से होने के पुख्ता साक्ष्य मिल चुके हैं। उन्होंने कहा कि अगले महीने खुदाई शुरू होने जा रही है। जल्द ही ओर भी इन साईटों ने अवशेष निकलेगें। वहीं पहले के लोग कूड़े कर्कट का निदान भी उचित तरीके से करते थे। जिनके साक्ष्य साईट नंबर चार पर आज भी देखने को मिलते हैं। 



इस सभ्यता के बारे में ओर अधिक जानकारी लेने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर कलिक करें। 

जिसमें हड़प्पा विशेषज्ञ बलराम कुमार आपको ओर बेहतर तरीके से समझाएंगें।

https://youtu.be/2d5kcpQVpT0

https://youtu.be/HPN6ck43gv8

https://youtu.be/ALQumu7Un9E


https://www.facebook.com/thalkanews/?ref=pages_you_manage

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