सफाई कर्मचारियों ने फुंका सरकार का पुतला | Sanitation workers burnt the effigy of the government
Sanitation workers burnt the effigy of the government
हरियाणा न्यूज / जींद : अक्टूबर महीने का वेतन जारी नहीं होने पर ग्रामीण सफाई कर्मचारियों ने पुतले फूंक कर रोष जताया। कर्मचारियों ने कहा कि सरकार वेतन रोक कर आंदोलन को कमजोर नहीं कर सकता। ग्रामीण सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के 33वें दिन छोटी दिवाली के त्योहार के अवसर पर ग्रामीण सफाई कर्मचारियों ने बराह कलां, बराह खुर्द, सुंदरपुर, पिंडारा, किनाना, भंभेवा व गांगोली गांवों में सफाई कर्मचारियों ने पुतले दहन किए।
यूनियन नेताओं ने बताया कि सरकार ग्रामीण सफाई कर्मचारियों के साथ दुश्मनों जैसा व्यवहार कर रहा है। दिवाली जैसे त्योहार पर ग्रामीण सफाई कर्मचारियों की वेतन रुकवाने की बहुत ही ओछी हरकत की है। सरकार कर्मचारियों का वेतन रोक कर आंदोलन से पीछे हटाने की सोच रही है, यह गलतफहमी है। पिछले 17 साल से ग्रामीण सफाई कर्मचारियों का सरकार द्वारा आर्थिक व सामाजिक शोषण होता रहा है। अब कर्मचारियों ने अपने हक व अधिकारों के लिए लड़ना सीख लिया है।
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वक्ताओं ने कहा कि सफाई कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये किया जाए। 400 की आबादी पर सफाई कर्मचारी की नियुक्ति की जाए। विधान सभा में नीति बनाकर सफाई कर्मियों को पक्का किया जाए। सभी ग्रामीण सफाई कर्मियों को बीडीपीओ के पेरोल पर लिया जाए। हरियाणा रोजगार कौशल निगम को भंग किया जाए। घर-घर से कूड़ा उठाने वाले कर्मचारियों को बराबर वेतन व वर्दी भत्ता दिया जाए और पीएफ ईएसआइ में शामिल किया जाए। 500 रुपये मासिक काम के औजारों का भत्ता तय किया जाए। 500 रुपये मासिक वर्दी धुलाई भत्ता लागू किया जाए।
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एक्सग्रेसिया नीति के तहत परिवार के सदस्य को काम पर रखा जाए और जिन कर्मियों की मृत्यु हो चुकी उन सभी कर्मियों को विभाग की तरफ से मुआवजा राशि का भुगतान किया जाए। दीपावली पर बोनस और कर्मचारियों के बच्चों की पढ़ाई के लिए शिक्षा भत्ता लागू किया जाए।

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