क्या HSSC का यह फैसला ग्रुप सी पदों की भर्ती को ओर उलझाएगा ?
Will this decision of HSSC further complicate the recruitment of Group C posts?
हाईकोर्ट के वकीलों ने हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ( HSSC ) के नौकरी न होने के बदले दोनों ग्रुप सी और डी में 5-5 अंक देने के बयान को गलत करार दिया
● कहा: हरियाणा सरकार की अधिसूचना में साफ है कि पूरे जीवन में एक बार ही फायदा मिल सकता है
•वकील जैसे ही आयोग लिखित में नोटिस जारी करेगा, तुरंत अदालत में चुनौती दी जाएगी
तहलका न्यूज।
चंडीगढ़ :
हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ( HSSC ) के चेयरमैन भोपाल सिंह खदरी ने एक अखबार में बयान दिया है कि जिन उम्मीदवारों का चयन ग्रुप डी में हो जाएगा, उन्हें ग्रुप सी की भर्ती में भी परिवार में सरकारी नौकरी न होने या सामाजिक आर्थिक जाएंगे। इस बयान पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में नौकरी के मामलों की पैरवी करने वाले वकीलों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि चेयरमैन का यह बयान प्रदेश सरकार को अधिसूचना के खिलाफ है। इसमें लिखा है कि पूरे जीवन में सरकारी नौकरी न होने के बदले अंक जीवन में सिर्फ एक बार मिल सकते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया है कि अगर आयोग ने लिखित में इसका आदेश जारी किया तो तुरंत अदालत में उसे चुनौती दी जाएगी। जिससे ग्रुप सी पदों की भर्ती और उलझ जाएगी। एक वकोल ने तो यहां तक दावा कर दिया कि HSSC नए-नए नियम बनाकर ग्रुप सी की भर्ती को उलझाना चाहता है लाखों बुवा इस भर्ती के पूरी होने का इंतजार कर रहे है मगर आयोग के फैसलों के कारण यह भर्ती उलझती जा रही है।
आयोग का फैसला नियमों के खिलाफ, भर्ती प्रक्रिया फंसाने का नया तरीका : एडवोकेट रविंद्र दुल
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे और सर्विस मैटर्स की पैरवी कर रहे एडवोकेट रविंद्र सिंह ढुल ने एचएसएससी के चेयरमैन भोपाल सिंह खदरी के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, "सीईटी के 5 मई, 2022 की अधिसूचना में साफ लिखा है कि हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग या अन्य कोई रिक्रूटमेंट एजेंसी / हरियाणा सरकार के अधीन बॉडी सामाजिक- आर्थिक मानदंड के पांच फीसदी अंकों का लाभ ग्रुप सी या डी पद के लिए रेगुलर आधार पर नियुक्ति के लिए पूरे जीवन में एक बार देगी। अगर एक व्यक्ति स्वयं या उसके परिवार का सदस्य एक बार चयनित / नियुक्त सामाजिक-आर्थिक मानदंड के अंक लिए बगैर या अंकों समेत लाभ प्राप्त कर लेता है तो परिवार का कोई अन्य सदस्य के बारे में उसी पद या किसी अन्य पद के लिए इन अंकों के बारे विचार नहीं किया जाएगा।' ढुल ने कहा, 'इसका अर्थ साफ है कि अगर किसी का चयन ग्रुप डी में हो जाता है तो उसे ग्रुप सी में सामाजिक-आर्थिक मानदंड के अंकों का भी नहीं मिलेगा। अगर आयोग ने ऐसा किया तो उसे चुनौती दी जाएगी। ऐसा करने से ग्रुप सी पदों की भर्तियां उलझ जाएंगी और पूरी नहीं हो पाएंगी। लाखों युवा ग्रुप सी की भर्ती पूरे होने का इंतजार कर रहे हैं।'
दो बार लाभ नहीं लिया जा सकता : एडवोकेट अंकुर सिधार
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सर्विस मैटर्स की प्रैक्टिस कर रहे एडवोकेट अंकुर सिधार ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, 'हालांकि अभी तक आयोग के चेयरमैन ने सिर्फ बयान दिया है और इस बारे लिखित में आयोग ने कुछ जारी नहीं किया है। मगर आयोग के चेयरमैन का बयान भी नियमों के खिलाफ है। आयोग ऐसा नहीं कर सकता। ग्रुप सी नोटिफिकेशन में साफ है कि पूरे जीवन में इसका लाभ एक बार मिल सकता है। अगर किसी का चयन ग्रुप डी के लिए हो गया तो उसे ग्रुप सी में सामाजिक-आर्थिक मानदंड के अंकों का लाभ नहीं मिलेगा। अगर आयोग ने लिखित में इसे जारी कर दिया तो तुरंत उसे चुनौती दी जा सकती है, जिससे पहले से फंसी पड़ी ग्रुप सी की भर्तियां पूरी होने में अड़चन आ सकती है।'
यह गलत है, अंकों का दो बार लाभ नहीं दे सकता आयोग : एडवोकेट रजत मोर
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे और नौकरियों के कई मामलों में पैरवी कर रहे एडवोकेट रजत मोर ने कहा, 'आयोग के चेयरमैन का बयान गलत है। आयोग अंकों का दो बार लाभ नहीं दे सकता। सरकार के 5 मई, 2022 के सीईटी नोटिफिकेशन में साफ लिखा है कि पूरे जीवन में एक बार इन अंकों का लाभ मिल सकता है तो आयोग दो बार अंक कैसे दे सकता है? सरकार अगर संशोधन कर दे तो बात अलग है मगर वह पीछे से लागू नहीं हो सकता। भर्ती प्रक्रिया के बीच में मानदंड नहीं बदले जा सकते। अगर आयोग ने दो बार अंक दिए तो उसे हाईकोर्ट में चुनौती दी जा सकती है और उससे भूर्ती प्रक्रिया उलझ सकती है। इसका एक तरीका है कि आयोग ग्रुप डी की भर्ती को होल्ड कर ले और ग्रुप सी की 'भर्ती पूरी कर ले। उसके बाद ग्रुप डी की भर्ती पूरी कर ले। मगर यह साफ है कि सामाजिक-आर्थिक मानदंड की कैटेगरी के मिलने वाले अंक सिर्फ एक बार मिल सकते हैं, दो बार नहीं।'
चेयरमैन भोपाल सिंह खदरी ने कोई जवाब नहीं दिया
एक समाचार पत्र में छपी खबर के मुताबिक सोमवार को हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन भोपाल सिंह खदरी को प्रकाशित खबर भेजकर पूछा था, 'चेयरमैन साहब, क्या यह सच है? अगर सच है तो यह कैसे संभव है कि किसी को सरकारी नौकरी न होने का दो बार लाभ दिया जा सकता है?' चेयरमैन ने इस सवाल का कोई जवाब नहीं दिया।


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