छात्रों को पढाई करने के लिए लड़नी पड़ती है हर रोज जंग | Students have to fight every day to study
Students have to fight every day to study/ Hisar news Today, latest news Hisar, Hisar story, student life fight in Haryana, student Bus program in Haryana,
तहलका न्यूज। हर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को स्कूल-कॉलेज जाने के लिए भी हर रोज जंग लड़नी पड़ती है। बसों की कमी के कारण उन्हें बस की खिड़कियों और पीछे भी लटक कर सफर तय तरफ न तो रोडवेज और न ही जिला प्रशासन का ध्यान है।
छात्रों को हर दिन अपने शिक्षण संस्थानों में आने जाने के लिए एक जंग का सामना करना पड़ता है। क्योंकि हर जिले के प्रत्येक गांव से प्रतिदिन हजारों विद्यार्थी अपने स्कूल- कॉलेज में पढ़ने जाते हैं। अधिकांश गांव से बसें चलती हैं, लेकिन विद्यार्थियों की समस्या कम होने का नाम नहीं ले रही। विद्यार्थियों की मानें तो रोडवेज की बसों की सेवा सीमित हैं। चूंकि उन्हें संस्थान में समय पर पहुंचने होता है, जिस कारण उन्हें बसों में खिड़कियों व वस के पीछे लटक कर सफर करने को मजबूर होना पड़ता है। विद्यार्थियों के बसों पर लटककर सफर करने से काफी हादसे भी हो रहे हैं। उसके बावजूद इसके किसी का ध्यान भी इस तरफ नहीं जा रहा है कि आखिर इस समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके।
Girl raped in Hisar : हिसार में केले के शेक में नशीला पदार्थ पिलाकर 12 साल की बच्ची से दुष्कर्म
अगर सरकार छात्रों को न बैठने वाले चालक परिचालकों के खिलाफ कार्रवाई करें तो हादसों पर रोक लगाई जा सकते हैं। छात्रों ने बताया कि सुविधा के नाम पर उन्हें बस पास तो दिए जाते हैं लेकिन बस पास होने के बावजूद रोडवेज बसों के चालक परिचालक तो उनसे नफरत करते हैं साथ ही निजी बस संचालकों की खरी खोटी भी सुनाई पड़ती है और निजी बसों में किराया देकर सफर तय करने पर मजबूर हैं।
नेशनल व स्टेट हाईवे पर स्थित गांव में रोडवेज की बसें तो ना मात्र ही रुकती हैं और इन रूटों पर आने वाले गांव के लोगों की सुविधा के लिए सरकार ने प्राइवेट बसों को चलाया हुआ है। छात्रों में यात्रियों को सुविधा देने के लिए बेसन का टाइम टेबल भी निश्चित है लेकिन उसके बावजूद निजी बस ऑपरेटर ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में दो दो तीन तीन बसों का टाइम उठा कर चलते हैं जिससे बसों में भीड़ बढ़ जाती है और छात्रों को खिड़कियों में लटकाने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
छात्रों ने बताया कि आरटीओ व पुलिस अन्य वाहनों की तो चेकिंग करती है और उनके चालान भी करती है लेकिन प्राइवेट बसों और रोडवेज बसों को चैकिंग के लिए कोई नहीं रूकवाता और वो खुलेआम सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाते रहते हैं। अगर आरटीओ और पुलिस निजी बस और रोडवेज बसों पर भी अन्य वाहनों की तरह शिकंजा कसना शुरू कर दे तो आए दिन किस तरह के होने वाले हादसों पर रोक लगाई जा सकते हैं।

कोई टिप्पणी नहीं
Thanks