धान की खरीद में मिल मालिकों व खरीद एजेंसियों की मनमानी पर किसानों ने जड़ा अनाज मंडी बरवाला के गेट पर ताला
Due to the arbitrariness of mill owners and procurement agencies in the purchase of paddy, farmers locked the gate of grain market Barwala.राजेश संदलाना के नेतृत्व में अनाज मंडी के गेट पर धरने पर बैठे किसान
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| राजेश संदलाना किसान व आढ़तियों के साथ बरवाला अनाज मंडी गेट पर ताला जडक़र धरने पर बैठे हुए। |
- हैफेड व वेयर हाउस के अधिकारियों के आश्वासन के बाद खोला ताला -
राजेश संदलाना ने बताया कि धान की सरकारी खरीद की जो दर निर्धारित की गई है मिल मालिक व खरीद एजेंसियां उससे काफी कम दामों में धान की खरीद रहे हैं। किसान की मेहनत की कमाई को कौडिय़ों के दाम खरीदने की मंशा रखने वाले इन मिल मालिकों के खिलाफ आज किसानों को साथ लेकर मंडी के गेट पर ताला जड़ दिया गया। इसके बाद हैफेड व वेयर हाउस के अधिकारी मौके पर पहुंचे और उन्होंने धान की खरीद निर्धारित दर के अनुसार ही करवाने का आश्वासन दिया जिसके बाद राजेश संदलाना व किसान धरने से उठे और अनाज मंडी का ताला खोला।
राजेश संदलाना ने बताया कि पहले तो अनाज मंडी में पीआर धान की खरीद ही शुरू नहीं की जा रही थी जिसे किसानों के साथ मार्केट कमेटी के सैके्रटरी से मिलकर शुरू करवाया और अब धान की खरीद में किसानों के साथ धांधलेबाजी की जा रही है। उन्होंने कहा कि किसान चारों तरफ से पिस रहा है पहले तो वह खून-पसीना एक करके फसल तैयार करता है। जब मंडी में उसे लेकर आता है तो उसकी खरीद नहीं हो पाती और खरीद होती है तो भी उसके साथ ठगी व धोखेबाजी की जाती है। किसानों के साथ यह खेल तुरंत बंद होना चाहिए और निर्धारित कीमतों पर ही उनकी फसल खरीदी जानी चाहिए। बीच में मिल मालिक व एजेंसियों की मनमानी पर सरकार पूरी तरह से अंकुश लगाए।
राजेश संदलाना ने बताया कि पहले तो अनाज मंडी में पीआर धान की खरीद ही शुरू नहीं की जा रही थी जिसे किसानों के साथ मार्केट कमेटी के सैके्रटरी से मिलकर शुरू करवाया और अब धान की खरीद में किसानों के साथ धांधलेबाजी की जा रही है। उन्होंने कहा कि किसान चारों तरफ से पिस रहा है पहले तो वह खून-पसीना एक करके फसल तैयार करता है। जब मंडी में उसे लेकर आता है तो उसकी खरीद नहीं हो पाती और खरीद होती है तो भी उसके साथ ठगी व धोखेबाजी की जाती है। किसानों के साथ यह खेल तुरंत बंद होना चाहिए और निर्धारित कीमतों पर ही उनकी फसल खरीदी जानी चाहिए। बीच में मिल मालिक व एजेंसियों की मनमानी पर सरकार पूरी तरह से अंकुश लगाए।


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