आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत 12 को नारनौंद में | RSS chief Dr. Mohan Bhagwat in Narnaund on 12th
RSS chief Dr. Mohan Bhagwat in Narnaund on 12th
आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत भारत मित्र स्तम्भ का करेंगे लोकार्पण
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| गांव खांडा खेड़ी में भारत मित्र स्तंभ। |
नारनौंद : प्रमुख आर्य समाजी स्व. चौधरी मित्रसेन आर्य की स्मृति में गांव खांडाखेड़ी में भारत मित्र स्तम्भ बनाया गया है। आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत 12 अक्टूबर को इस भारत मित्र स्तम्भ का लोकार्पण करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता आचार्य बालकृष्ण करेंगे।
यह जानकारी देते हुए इंडस शिक्षण संस्थाओं के निदेशक सुभाष श्योराण ने बताया कि कार्यक्रम की तैयारियां जोर—शोर से चल रही है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में देशभर से आर्य सन्यासी, साधु संत, समाजसेवी, शिक्षाविद, गौसेवक, खाप प्रतिनिधि, गुरूकुलों के ब्रह्मचारी एवं ब्रह्मचारिणी भाग लेंगे। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम को भव्य रूप देने के लिए तैयारियां चल रही है और आसपास के क्षेत्र में कार्यक्रम में प्रति उत्साह है।
भारतीय संस्कृति, इतिहास, धर्म व सामाजिक परिवेश का समावेश भारत मित्र स्त्म्भ
नारनौंद : ब्रह्मांड की उत्पति से लेकर वर्तमान तक के कालखंडों को भी स्तम्भ में संजोया
भारतीय सेना के शौर्य को दर्शा रही भारत के 21 परमवीर चक्र विजेताओं की सुंदर प्रतिमाएं वैदिक पथ के पथिक एवं प्रमुख आर्य समाजी स्व. चौधरी मित्रसेन आर्य की पावन स्मृति में उनके पैतृक गांव खांडाखेड़ी में भारत मित्र स्तम्भ बनाया गया है। आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत 12 अक्टूबर को इस भारत मित्र स्तम्भ का लोकार्पण करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता आचार्य बालकृष्ण करेंगे।
9 मंजिला इस स्तम्भ में न केवल भारतीय संस्कृति, इतिहास, धर्म व सामाजिक परिवेश का समावेश है, बल्कि ब्रह्मांड की उत्पति से लेकर वर्तमान तक के कालखंडों को भी संजोया गया है। स्तम्भ के शिखर पर ओम का ध्वज लगाया गया है। इसके नीचे चारों दिशाओं में बड़ा घंटाघर वाली घड़ी लगाई गई है, जो समय दिखाने के साथ—साथ प्रति घंटे ओम की ध्वनि गुंजायमान करती है। स्तम्भ में बहुत ही सुंदर पुस्कालय का भी निर्माण किया गया है। भूतल पर यज्ञशाला बनाई गई है। स्तम्भ के प्रांगण में वैदिक शोध व अनुसंधान केन्द्र चलाने की भी योजना है।
वैदिक पथ के पथिक स्व. चौधरी मित्रसेन आर्य वो विरले शख्स थे जिन्होंने सांसारिक परंपराओं का निर्वहन करते हुए एक संत का जीवन जीया और जीवन और मृत्यु से परे के उस सत्य यानी जीवन को सार्थक कर जाना के परम लक्ष्य को भी प्राप्त कर लिया। इन्हीं महापुरुष की जन्मस्थली और परलोक गमन के ऐतिहासिक स्थल हिसार जिले के गांव खांडाखेडी में भारत मित्र स्तंभ बनाया गया है।
भारत मित्र स्तंभ में कुल 9 तल बनाए गए हैं। हर तल पर चौधरी मित्रसेन आर्य की संकल्पना को मूर्त रूप प्रदान करते हुए उनके कृतज्ञ उत्तराधिकारियों ने इस कलात्मक स्तंभ में वैदिक संस्कृति, इतिहास, अध्यात्म, विज्ञान और कला का ये अद्भुत समन्वय बन गया है और आप यहां पहुंचते ही मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। वीर योद्धाओं की प्रतिमाओं और चित्रों को देखकर भारतीय इतिहास की गौरवपूर्ण घटनाएं हमारे नेत्रों के आगे सजीव होती जान पड़ेंगी। मित्र स्तंभ की यात्रा का प्रारंभ भारत माता की प्रतिमा के दर्शन करने के साथ प्रारंभ होता है।
सबसे उपर के तल पर ब्रह्मांड की उत्पत्ति और रचना को सुंदर कलाकृतियों के माध्यम से समझ सकते हैं। प्रकृति के अतिरिक्त मनुष्यों की उत्पत्ति किस प्रकार हुई, इसका वर्णन क्रमिक विकास के माध्यम से यहां दर्शाया गया है। यहीं पर आधुनिक विज्ञान ब्रह्मांड की उत्पत्ति का वर्णन प्रसिद्ध बिग बैंग सिद्धांत के रूप में मिलेगा वहीं भारतीय दर्शन में काल गणना के रूप में चार युगों का सिद्धांत भी देखने को मिलेगा। कला दीर्घा में सतयुग, त्रेता युग, द्वापर युग और कलियुग की काल गणना पाएंगे जो चारों युगों के योग को जोड़ देगी। यह तल भावी पीढ़ियों को यह समझने में मदद करेगा कि ब्रह्मांड और प्रकृति की उत्पत्ति के रहस्यों को लेकर भारतीय मनीषियों ने आधुनिक विज्ञान से पहले ही शोध करना प्रारंभ कर दिया था।
यहीं पर वैदिक संस्कृति और आश्रम व्यवस्था को चित्रित किया है। राजा मनु ने किस प्रकार मानव को व्यवहारिक ज्ञान प्रदान किया और सामाजिक व्यवस्था को निर्देशित किया इसका उल्लेख चित्रों के माघ्यम से समझने को मिलता है। इसके अतिरिक्त राजा भरत, श्रवण और राजा हरिशचन्द्र की प्रेरणादायी कथाएं ओर प्रतिमाएं हमें साहस, शौर्य, मातृ पितृ भक्ति और सत्य के महत्व से अवगत करवाती हैं।
अगले तल पर रामायण, महाभारत और भगवत गीता के संदेशों का अध्यायवार सार दिया गया है। राम परिवार की सुंदर प्रतिमा मन मोह लेती है। अगले तल पर मध्यकालीन भारत के समूचे इतिहास से रूबरू होने का मौका मिलेगा। सबसे पहले वेदांत दर्शन व इसके बाद गौतम बुद्ध और महावीर स्वामी की मनमोहक प्रतिमाएं जीवन के परम लक्ष्य को याद दिलाएंगी। प्रतिमाओं के साथ बौद्ध और जैन धर्म की संक्षिप्त जानकारी हमें बौद्ध और जैन धर्म के मूल सिद्धांतों से अवगत कराती है। गैलरी की दीवार पर आदि गुरु शंकराचार्य की सुंदर कलाकृति उकेरी गई है जिसमें वे आचार्य मंडन मिश्र से शास्त्रार्थ करते हुए दृष्टिगोचर होते हैं।
यहीं पर सिख धर्म की झलक भी देखने को मिलती है। स्वर्ण मंदिर के स्वरूप दर्शन के साथ सिख धर्म के दसों गुरुओं का संक्षिप्त परिचय यहां मिलेगा। सभी धर्मों के अतिरिक्त भारत के भक्ति काल की झलक देखने को भी मिलती है। महाकवि कालिदास, संत तुलसीदास, मीरा, संत कबीर, संत ज्ञानेश्वर, संत हरिदास, नामदेव और चैतन्य महाप्रभु की कलाकृतियां भक्ति काल की यात्रा चंद पलों में ही करवा देती हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज के वीर पुत्र संभाजी महाराज की प्रतिमा सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती है। चंद्रगुप्त मौर्य की प्रतिमा मौर्य वंश के गौरव का बखान करते हुए नजर आती है। यहीं पर सम्राट अशोक की प्रतिमा के साथ उनसे जुड़े ऐतिहासिक महत्व के चिन्हों को भी प्रदर्शित किया गया है। राजा विक्रमादित्य की अद्भुत प्रतिमा उनके वैभव और न्यायप्रिय शासन की गाथा का बखान करते हुए नजर आती है। महाराणा प्रताप और पृथ्वीराज चौहान की चर्चा भी स्तम्भ में है। यहां पर बनाई गई गैलरी में महर्षि आर्यभट्ट, महर्षि कणाद, महर्षि नागार्जुन, महर्षि चरक, महर्षि सुश्रुत, आचार्य चाणक्य, महर्षि पतंजलि, महर्षि भास्कराचार्य, महर्षि अगस्त्य, महर्षि ब्रह्मगुप्त और महर्षि कपिल का उल्लेख देखने को मिलता है।
भारत मित्र स्तंभ का तीसरा तल आधुनिक भारत के गौरवशाली इतिहास को समर्पित है। शहीदों की कुर्बानियों को जीवंत करने वाली प्रतिमाओं और कलाकृतियों को देखकर हमारे हृदय में राष्ट्रवाद की भावना हिलोरे लेने लगती है। वंदे मातरम, इंकलाब जिंदाबाद, भारत माता की जय जैसे राष्ट्रवादी नारे हमारे कानों में गूंजने लगते हैं। शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की प्रतिमाएं उग्र राष्ट्रवाद की याद दिलाती हैं वहीं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा स्वतंत्रता संग्राम के महानायक का जीवन दर्शन प्रस्तुत करती है।
मूर्तिकारों ने अपनी कल्पना शक्ति से स्वतंत्रता संग्राम के ऐतिहासिक पलों की मन मस्तिष्क पर अमित छाप छोड़ी है। आधुनिक भारत की राष्ट्रवादी छवि अंकित करने वाले इस तल पर भारत के 21 परमवीर चक्र विजेताओं की सुंदर प्रतिमाएं भारतीय सेना के शौर्य को दिखाती है।
मित्र स्तंभ का अगला तल हरियाणा को समर्पित है जिसमें हरियाणा की प्राचीन कला और संस्कृति के अतिरिक्त भारत की प्रगति में हरियाणा के योगदान को भी दर्शाया गया है। इन प्रतिमाओं में सूत कातती महिलाएं, चटनी और बाजरा कूटती ग्रामीण महिलाएं, गांव की प्राचीन रसोई, खाप पंचायत, चौपाल, दादा खेड़ा मंदिर में पूजा करती महिला, प्राचीन धर्मशाला, पहलवानों का अखाड़ा, सांझी माता, संक्रांत पर्व, होई माता की पूजा के अतिरिक्त होली और दीपावली जैसे पर्व की झांकी नजर आती है। इसके अतिरिक्त हरियाणा के प्राचीन और लुप्त होते खेल भी दिखाए गए हैं।
भारत मित्र स्तंभ के प्रथम तल को मित्र गाथा नाम दिया गया है क्योंकि इसी तल वैदिक पथ के पथिक चौधरी मित्र सेन जी की प्रेरणादायक जीवन यात्रा की झांकी प्रस्तुत करता है। सुंदर प्रतिमाओं के माध्यम से चौधरी साहब के आर्य समाज और शैक्षणिक क्षेत्र में दिए गए योगदान को दर्शाया गया है।
यहां सिंधु वंशावली के अतिरिक्त खांडा खेड़ी गांव में उनके बचपन के यादगार पलों को संजोकर रखा गया है। कलाकारों ने चौधरी साहब के जीवन से जुड़े प्रेरणादायक संस्मरणों को प्रतिमाओं के माध्यम से भावी पीढ़ियों के समक्ष रखा है।
भारत मित्र स्ंतभ को देखने के बाद इंसान जब वापस लौटता है तो एक जीवन दर्शन और चौधरी मित्रसेन आर्य जी जीवन ये यह प्रेरणा लेकर लौटता है कि जीवन जीना ही काफी नहीं होता है बल्कि जीवन को सार्थक भी करना है। यही भारतीय संस्कृति का आधार विचार भी है जिसने पूरी दुनिया को आलोकित किया है।


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