संसदीय क्षेत्र सिरसा, क्या कांग्रेस का बन सकता है इंदौरा पर फोकस
latest news haryana : Parliamentary Constituency Sirsa, Can Congress Focus On Indora?
तहलका न्यूज सिरसा, (सी एम ग्रोवर ) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सिरसा रैली में मौजूदा भाजपा महिला सांसद सुनीता दुग्गल के लिए "ठोको ताली" से, जहां भाजपा टिकट से इस संसदीय क्षेत्र से चुनावी भाग्य आजमाने के इच्छुक भाजपाई दिग्गजों के अरमानों पर पानी फेर दिया है, वहीं सुनीता दुग्गल का पुनः चुनाव लडना लगभग यकीनी माना जा रहा है। कांग्रेस किस प्रत्याशी को चुनावी मैदान में उतारेगी, इसको लेकर क्यासो का दौर शुरू हो गया है।
हरियाणा में वर्तमान में भूपेंद्र सिंह हुड्डा (हुड्डा कांग्रेस) तथा हुड्डा कांग्रेस की राजनीतिक विरोधी त्रिवेणी कांग्रेस (रणदीप,कारण, सैलजा) के आपसी मतभेद कांग्रेस पक्षीय सोच रखने वालों को उलझन में डाले हुए हैं। राज्य में कांग्रेस का चल रहा "विपक्ष आपके समक्ष" अब ", विपक्ष अपनों के समक्ष' देखा जा रहा है। संसदीय क्षेत्र सिरसा में त्रिवेणी कांग्रेस की ओर से सैलजा और हुड्डा कांग्रेस की तरफ से सुशील इंदौरा के चुनाव लडने की चर्चा है।
दोनों ही पूर्व सांसद हैं और इस क्षेत्र से दो - दो बार सांसद रह चुके हैं। सैलजा कांग्रेस टिकट से सुशील इंदौरा इनैलो पार्टी से लोकसभा में पहुंचे थे। सुशील इंदौरा ने दलबदल की बांउड्री (चौंका) लगाकर एक रिकॉर्ड बनाया है,जिसे शायद ही कोई राजसी दिग्गज तोड़ सके। सुशील इंदौरा हुड्डा कांग्रेस से संबंधित है और भूपेंद्र सिंह हुड्डा के आशीर्वाद से कांग्रेस के एस सी प्रकोष्ठ के प्रदेशाध्यक्ष है।
हरियाणा कांग्रेस के बदलते संगठनात्मक ढांचे को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा चल रही है कि हुड्डा कांग्रेस अपनों की पूर्णतया अनदेखी कर दलबदल को तवज्जो दे रही है, जिसे हुड्डा कांग्रेस के लिए शुभ संकेत नहीं कहा जा सकता।
हुड्डा कांग्रेस के सर्वेसर्वा भूपेंद्र सिंह हुड्डा ऐसे राजसी दिग्गजों पर मेहरबान हो कर अपना राजनीतिक कुनबा बढा रहे हैं,जो कभी कांग्रेस के प्रति वफादार नहीं और न ही उन्हें कांग्रेस संस्कृति का ज्ञान है। राजनीति में यह पंक्तियां विशेष स्थान रखती है कि " चमचे कभी वफादार नहीं होते और वफादार कभी चमचे, चमचा जिस बर्तन में चला जाता है, उसे साफ कर देता है"।
कांग्रेस के मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष उदयभान के पिता पूर्व विधायक स्व गया लाल राष्ट्रीय राजनीति में"आया राम गया राम" को जन्म दिया है, जबकि उदयभान भी अपने पिता के पदचिन्हों पर चल चुके हैं। आयाराम गया राम की तर्ज पर चलकर कई राजसी दिग्गजों का हृदय परिवर्तन निरंतर हो रहा है। कांग्रेस के एस सी सैल के प्रदेशाध्यक्ष सुशील इंदौरा हरियाणा के राजसी दिग्गजों के लिए एक चुनौती कहें जा सकते हैं, जिन्होंने ने दल-बदल कर चौंका लगाया है।
वर्ष 2014 में इंदौरा का पहली बार हृदय परिवर्तन हुआ, तो उन्होंने ने इनैलो को अलविदा कह कर हजकां की टिकट पर लोकसभा चुनाव में अपना राजनीतिक भाग्य आजमाया, मगर मतदाताओं ने तव्वजो नहीं दी। हृदय परिवर्तन परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इंदौरा हजकां से बसपा में चले गये और बसपा टिकट पर फतेहाबाद से विधानसभा चुनाव लडा और पराजित हो गए। हिम्मत न हारें हुए इंदौरा ने अपनी राजनीतिक पार्टी बनाई, जिसका कांग्रेस में विलय कर इंदौरा ने कांग्रेस टिकट पर कालांवाली विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लडा और फिर लुढ़क गये।
हरियाणा राजनीति में इंदौरा ही एक मात्र ऐसा राजसी दिग्गज है, जिसने हर चुनाव में अपना राजनीतिक भाग्य आजमाया, भले ही उन्हें हर बार दल बदलना पड़ा। दल-बदल में चौका लगाने वाले इंदौरा पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा की मेंहरबानी कांग्रेस के लिए कितनी लाभदायक साबित होगी,यह तो आने वाला समय ही बताएगा,मगर हुड्डा कांग्रेस और त्रिवेणी कांग्रेस के मतभेद यूं ही बरकरार रहे,तो सुनीता दुग्गल की पुनः लाटरी खुल सकती है।


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