jind weather : Farmers upset due to delay in monsoon | मानसून में देरी से किसान परेशान |
jind weather : Farmers upset due to delay in monsoon अब तक मानसून जींद जिले से रूठी , साथ लगते जिलों में काफी बारिश | |
तहलका न्यूज जींद, सुनील कोहाड़। जींद जिले के किसानों पर इंद्र देवता की अभी तक कृपा दृष्टि नहीं होने से किसान बेहद परेशान हैं। सबसे ज्यादा परेशानी धान उत्पादक किसानों के लिए है, जो अभी तक खेतों में धान की रोपाई नहीं कर पाए हैं। मानसून प्रदेश के कई जिलों में जोरदार दस्तक दे चुकी है। इनमें जींद जिले के साथ लगते चरखी दादरी, भिवानी, रोहतक, सोनीपत, पानीपत और कैथल जिले शामिल हैं। इन जिलों में काफी बारिश हो चुकी है और किसान धान की रोपाई में लगे हुए हैं। अब तक मानसून जींद जिले से रूठी हुई सी लग रही है। जिले में मानसून की एक भी जोरदार बारिश अभी तक नहीं हुई है।
20 प्रतिशत खेतों में धान की रोपाई नहीं
धान उत्पादक किसानों को सबसे ज्यादा परेशानी : इंद्र देवता की जिले पर चल रही नाराजगी से सबसे ज्यादा परेशानी धान उत्पादक किसानों को हो रही है। जिले में लगभग डेढ़ लाख हैक्टेयर में धान की खेती होती है। अभी तक जिले में 20 प्रतिशत खेतों में भी किसान धान की रोपाई नहीं कर पाए हैं। कारण यह है कि जींद जिले में धान की रोपाई मुख्य रूप से बारिश पर निर्भर करती है। नहरों में इन दिनों पानी जरूरत से बहुत कम रहता है और जिले का भूमिगत जल भी ज्यादा अच्छा नहीं है। बारिश के इस लंबे इंतजार ने किसानों को बेहद परेशान कर दिया है । उन्हें बहुत महंगा डीजल फूंककर धान की रोपाई के लिए खेतों में पानी लगाना पड़ रहा है।
गन्ने की फसल को भी बरसात की दरकार :
जिले में इन दिनों लगभग 20,000 एकड़ में गन्ने की खेती हुई है। इस समय गन्ने की फसल को बारिश की सबसे ज्यादा जरूरत है। बिना बारिश के गन्ने की फसल का फुटाव नहीं हो पा रहा । जिन किसानों ने अपने खेतों में गन्ने की फसल लगाई हुई है, उनके सामने भी गन्ने की फसल को पानी देने का भारी संकट खड़ा हो गया है। किसान गन्ने की फसल को पानी लगाएं या फिर धान की रोपाई के लिए खेतों में पानी लगाएं, यह फैसला करना किसानों के लिए मुश्किल हो रहा है।
क्या कहते हैं कृषि विशेषज्ञ:
कृषि विज्ञान केंद्र के रिटायर्ड प्रभारी डा. यशपाल मलिक के अनुसार मानसून जिले में दगा दे जाने से किसानों के लिए संकट खड़ा हो गया है। धान की रोपाई का सही और अनुकूल समय 10 जुलाई तक है। ऐसे में अब बारिश बेहद जरूरी हो गई है। कुछ देर और मानसून इसी तरह रूठा रही तो किसानों को भारी नुक्सान होगा।

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