किसानों को लेकर झूठे साबित हुए मोदी सरकार के वादे : अमित सिवाच
Tehalka news Hisar Modi government promises about farmers proved to be false: Amit Siwach
तहलका न्यूज हिसार / सुनील कोहाड़ ।
हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कांग्रेस सेवा दल प्रदेश महासचिव एवं नारनौंद युवा हल्का नेता अमित सिवाच ने कहा कि केन्द्र सरकार के 9 वर्षों को किसान विरोधी और क्रूरता से भरे कार्यकाल के रूप में हमेशा याद किया जाएगा। केन्द्र सरकार ने बुधवार देर शाम शेखी बगारते हुए खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा तो कर दी। लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि किसानों की फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी ही नहीं की जाती। अमित सिवाच ने मोदी सरकार की हर नीति को किसान विरोध बताते हुए कहा कि भाजपा सरकार में एम. एस.पी. के अब कोई मायने नहीं बचे हैं। उन्होंने कहा कि आंकड़े भी इस बात की गवाही देते हैं कि फसल उपज व फसल खरीद के तथ्य केन्द्र सरकार की किसान विरोधी नीति को उजागर करते हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022-23 में देश में 1302 लाख टन धान का उत्पादन हुआ, जिसमें से केवल 651 लाख टन धान की खरीद ही एमएसपी पर की गई। इसी प्रकार 1068 लाख टन गेहूं का उत्पादन हुआ जिसमें से 187 लाख टन गेहूं को ही एम. एस. पी. पर खरीदा गया। बुडाना ने कहा कि भाजपा किसानों से दो बड़े वादे कर सत्ता में आई थी।
भाजपा का पहला वादा था कि किसान को एम.एस.पी. पर लागत के साथ 50 प्रतिशत मुनाफा निर्धारित करना । दूसरा वादा था कि इस एम.एस.पी. निर्धारण के फार्मूले से साल 2022 तक देश के 62 करोड़ किसानों की आय को दोगुनी करना । दोनों वादे सफेद झूठ साबित हुए । खरीफ की फसलों पर एम.एस.पी. निर्धारित करते हुए केन्द्र सरकार ने न तो भाजपा शासित प्रदेशों की सिफारिश मानी और न ही लागत से 50 प्रतिशत मुनाफा के आधार पर किसानों को एम. एस. पी. दी । सच्चाई यह है कि भाजपा जनतंत्र देश के किसान का जानलेवा तंत्र बन गया है।
अमित सिवाच ने कहा कि अपनी जायज मांगों को लेकर जब भी किसान आवाज उठाते हैं उनको लाठियां बांधी जाती हैं। इसका ताजा उदाहरण कुरुक्षेत्र में किसानों पर हुए लाठीचार्ज का भी सबके सामने है। जिसके कारण हरियाणा के किसानों के साथ-साथ अन्य प्रदेशों के किसानों को भी सड़क पर बैठकर आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसके अलावा मोदी सरकार द्वारा लाए गए काले कानूनों के खिलाफ 13 महीनों तक दिल्ली के चारों तरफ आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ा था और मोदी सरकार घुटनों के बल लाकर खड़ा कर दिया था।
उन्होंने कहा कि आज देश की आन बान शान देश के लिए मेडल जीतने वाले प्रमाण भी मोदी सरकार की भ्रष्ट नीतियों का शिकार होकर आंदोलन करने के लिए मजबूर हैं। खिलाड़ियों ने खुले मन से कहा है कि उन्हें केस वापस लेने के लिए डरा धमकाया जा रहा है और उनके ऊपर लगातार दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है ताकि मोदी सरकार की किरकिरी होने से बचाया जा सके।


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