हांसी में विजिलेंस टीम की बड़ी कार्रवाई, इंस्पेक्टर और बिजली निगम का कर्मचारी रिश्वत लेते रंगे हाथों काबू !
Haryana news Vigilance team's big action in Hansi, inspector and employee of Electricity Corporation caught red-handed taking bribe
एफआईआर से नाम हटाने के नाम पर सात लाख रुपए रिश्वत देने की कर रहे थे डिमांड
तहलका न्यूज, हिसार सुनील कोहाड़
हांसी शहर के सरकारी कर्मचारियों में उस समय हड़कंप मच गया। जब करनाल विजिलेंस की टीम ने हांसी में एक इंस्पेक्टर सहित बिजली निगम के कर्मचारी को एक लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों काबू कर लिया। आरोप है कि यह दोनों एक व्यक्ति से f.i.r. में दर्ज नाम को हटाने को लेकर सात लाख रुपए की डिमांड कर रहे थे।
हांसी निवासी पीड़ित ने करनाल विजिलेंस को दी शिकायत में बताया कि सन् 2018 में हांसी के सिटी पुलिस थाने में उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई दी थी। केस से संबंध नहीं होने पर उसने हांसी सिटी पुलिस से मिलकर एफआईआर से नाम हटाने के लिए काफी बार गुहार लगाई। लेकिन उसकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। इकनॉमिक ऑफेंस विंग हांसी के इंचार्ज इंस्पेक्टर उमेद सिंह और बिजली निगम हरियाणा में प्लांट अटेंडेंट फर्स्ट थर्मल पावर प्लांट खेदड़ निवासी शिव कुमार उसका नाम एफआईआर से हटाने के लिए सात लाख रुपये देने की डिमांड कर रहे थे। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए विजिलेंस की टीम ने एंटी करप्शन ब्यूरो करनाल के इंस्पेक्टर चरण सिंह के नेतृत्व में विजिलेंस की टीम का गठन किया। टीम ने कार्रवाई करते हुए सोमवार को हांसी पहुंची। विजिलेंस टीम ने पीड़ित को एक लाख रुपए पाउडर लगाकर उन्हें देने के लिए दिए। पीड़ित ने
इंस्पेक्टर उमेद सिंह और शिव कुमार से संपर्क किया और कहा कि उससे अब तक केवल एक लाख रुपए ही बन पाए हैं।
इस्पेक्टर उमेद सिंह और शिव कुमार ने सलाह मशवरा करके लेने के लिए शिवकुमार को भेज दिया। शिवकुमार को रिश्वत के पैसे दिए और इशारा किया तो विजिलेंस की टीम ने शिवकुमार को दबौच लिया। ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में उसकी तलाशी लेने पर उससे रिश्वत के एक लाख रुपए बरामद हुए। हाथ धुलाने पर उसके हाथ लाल हो गए। के बाद विजिलेंस की टीम ने इंस्पेक्टर उम्मीद को भी हिरासत में ले लिया। हांसी में दोनों रिश्वतखोर अफसरों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया है और मंगलवार को अदालत में पेश किया जाएगा।
इस मामले में पीड़ित गांव उमरा निवासी सुनील ने बताया कि 7 जनवरी 2021 को उसके खिलाफ नारनौंद थाने में केस दर्ज हुआ था इस समय वह इस केस में वह जमानत पर आया हुआ है। इस इसकी जांच कर रहे आर्थिक अपराध शाखा के इंचार्ज इंस्पेक्टर उमेद सिंह ने उसे मिलने के लिए बुलाया था। जैगुआर इंस्पेक्टर से मिलने के लिए कहा तो उसने कहा कि वह उसे बाहर निकाल सकता है बदले में इसके कुछ खर्चा पानी लगेगा और इसके लिए उसके थर्मल प्लांट के जेई शिवकुमार से मिलना होगा। सुनील ने बताया कि स्पेक्ट्रोमीटर से पता था कि शिवकुमार उसका रिश्तेदार है।
सुनील ने बताया कि इंस्पेक्टर के कहने पर जब उसने शिव कुमार से संपर्क साधा तो उसने कहा कि उमेद से बात कर लेगा। उन दोनों ने मिलीभगत करके नाम को हटाने के मामले में सात लाख रुपए रिश्वत मांगी और ना देने पर दोबारा से गिरफ्तार करने की धमकी दी थी। सुनील ने बताया कि उसने मार्च में पांच लाख 50 हजार रुपए दे दिए थे। इंस्पेक्टर उमेद सिंह और शिवकुमार लगातार उस पर बकाया एक लाख 50 हजार रुपए देने के लिए दबाव बना रहे थे।
सुनील ने बताया कि जब उसने इसकी शिकायत विजिलेंस ने की और बिजनेस की टीम द्वारा उसे 500-500 के 200 नोटों की दो गड्डियां बनाकर ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में उसे दे दिए। इसके लिए जब उसने शिवकुमार से संपर्क साधा तो शिवकुमार ने उसे जींद रोड़ पर स्थित फौजी ढाबे पर बुलाया। एडवोकेट सुनील ने बताया कि उसने इन सब बातों की रिकॉर्डिंग अपने फोन में कर ली। जैसे ही उसने फौजी के ढाबे पर जय शिव कुमार को ₹100000 दिए तो बिजनेस की टीम ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया। का

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