प्राइवेट स्कूलों ने लगाई निजी प्रकाशन की पुस्तकें | हिसार जिले में शिक्षा विभाग की छापेमारी | कई स्कूलों को थमाया नोटिस |
Haryana Private schools put books of private publication, education department raids in Hisar district
अभिभावकों की जेब पर डाका, निजी स्कूल संचालक मालामाल
तहलका न्यूज, हिसार / सुनील कोहाड़
नए सत्र की शुरुआत होते ही निजी स्कूल संचालक की खूब चांदी हो जाती है। क्योंकि वह दाखिला फंडों के नाम पर अभिभावकों से मोटे पैसे वसूल करते हैं। निजी स्कूल संचालकों की भूख इस कदर बढ़ चुकी है कि दाखिला और फीस वसूलने के बाद भी उनकी भूख नहीं मिटती। अधिक पैसा कमाने की लालसा में वह एनसीईआरटी की पुस्तकें ना लगाकर निजी प्रशासकों (private publication books ) की पुस्तकें लगवा देते हैं और इन पुस्तकों का रेट अपनी मनमर्जी से वसूल करते हैं। अभिभावकों द्वारा की गई शिकायत के आधार पर शिक्षा विभाग इस मामले में सोमवार को स्कूलों में छापेमारी की।
निजी स्कूलों में वर्दी और पुस्तकों के नाम पर खुली लूट
शिक्षा विभाग द्वारा सोमवार को हिसार जिले में अलग-अलग टीमें बना कर कई सुकुला में छापेमारी की गई। छापेमारी के दौरान पाया गया कि स्कूलों में दो पुस्तकें छात्रों को पढ़ाने के लिए दी जा रही है उन्होंने एनसीईआरटी के ना लगवा कर किसी निजी प्रशासक की लगवाई हुई है। काफी स्कूल संचालक छात्रों को एक ही दुकान पुस्तकें लेने के लिए बाध्य कर रहे हैं। इसके लिए कई स्कूल संचालक छात्रों के अभिभावकों को दुकान का एड्रेस देते हैं साथ ही पर्ची भी बनाकर देते हैं। के बाद में दुकानदार से कमीशन को शुरू किया जा सके। वही काफी स्कूलों में उनके अंदर ही दुकानें खुली हुई हैं। जहां से छात्रों को पुस्तकें, वर्दी, नोटबुक स्टेशनरी का सामान लेने के लिए बाध्य किया जाता है और इन दुकानों पर रेट बाजार से कई गुना वसूल किया जाता है।
हांसी नारनौंद क्षेत्र के निजी स्कूलों में भी निजी प्रकाशन की पुस्तकों का कारोबार
हांसी और नारनौंद क्षेत्र में भी काफी निजी स्कूल संचालक अपने स्कूल के अंदर ही कैंटिल खोले हुए हैं। छात्रों को स्कूल केंटिन के अंदर से ही किताबें व अन्य सामान लेने के लिए जोर जबरदस्ती की जाती है। अगर शिक्षा विभाग सही तरीके से जांच करें तो अधिकतर स्कूलों में इस तरह का गौरखधंधा चलता हुआ पाया जाएगा। हांसी नारनौंद क्षेत्र के अधिकतर स्कूल संचालक छात्रों को हांसी स्थित एक ही कौन से वर्दी लेने के लिए बाध्य करते हैं। बकायदा उस दुकान पर रेट इतना ज्यादा है कि हर कोई उस दुकान से वर्दी नहीं खरीद पाता और वो अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं दिलवा पाते।
निजी पब्लिकेशन की पुस्तक पढ़ने के लिए स्कूलों का बहाना
जिला शिक्षा अधिकारी कुलदीप सिहाग ने बताया कि शिक्षा विभाग की टीम ने अनेक स्कूलों में छापेमारी की थी। न्यू यशौदा पब्लिक स्कूल में किताबों की दुकान के अंदर ही खुली पाई गई। इस दुकान पर एनसीईआरटी की किताबें नहीं बल्कि निजी प्रशासक की पुस्तकें पाई गई हैं। पहली से दसवीं तक सभी पुस्तकें निजी प्रशासक की लगवाई हुई थी। स्कूल मैनेजमेंट की तरफ से छात्रों को कहा गया था कि एनसीईआरटी की किताबें बाजार में उपलब्ध नहीं है इसलिए ये पुस्तकें ही पढ़नी होगी।
निजी पब्लिकेशन की पुस्तकें व तय दुकान से वर्दी खरीदने के नाम पर बाध्य कर धांधली करने वाले स्कूलों को नोटिस
जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि ब्लूमिंग डेल्स स्कूल में कक्षा पहली से पांचवीं तक सभी पुस्तकें प्राइवेट प्रकाशन की लगवाई हुई मिली। सेंट सोफिया स्कूल में पहली कक्षा से पांचवीं तक एनसीईआरटी की पुस्तकों की जगह प्राइवेट प्रकाशन की पुस्तकें लगवाई हुई हैं। कक्षा 4 की गणित की पुस्तक का मूल्य एनसीईआरटी की पुस्तक से कई गुना ज्यादा मिला। विश्वास सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पहली कक्षा से लेकर आठवीं कक्षा की एनसीईआरटी की पुस्तकों के साथ-साथ प्राइवेट प्रकाशन की पुस्तकें भी लगी हुई मिली। प्रिंसिपल ने बताया की हमने पिछले चार साल से स्लेबस नहीं बदला है, इसलिए छात्र पुरानी किताबें भी ले सकते हैं। स्कूल में भी पहली से पांचवी तक निजी प्रकासन की पुस्तकें पाई गई हैं।
क्या कहते हैं जिला शिक्षा अधिकारी
इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी कुलदीप सिहाग ने बताया कि शिक्षा विभाग द्वारा की गई जांच में काफी स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकों की जगह निजी प्रकाशन की पुस्तकें लगाई हुई पाई गई हैं। इसकी रिपोर्ट बनाकर शिक्षा निदेशालय को भेज दी गई है। वहीं स्कूल संचालकों से भी इस बारे में जवाब मांगा गया है। आगामी कार्रवाई के लिए जैसे भी उच्च अधिकारियों के आदेश होंगे उसके मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।

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