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भाटला सामाजिक बहिष्कार मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला ! सुप्रीम कोर्ट से इस समुदाय के लोगों इ लगा तगड़ा झटका !

 


तहलका न्यूज, हिसार / सुनील कोहाड़ 


हिसार जिले के भाटला गांव में सामाजिक बहिष्कार मामले सेशन कोर्ट ( district court ) और पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ( Punjab and Haryana High court ) के फैसले को रद्द करने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ( supreme court ) ने गुरुवार को खारिज कर दिया। इससे आरोपितों को कड़ा झटका लगा है। आरोपियों को सामाजिक बहिष्कार का आरोपी मानते हुए उन्हें अदालत में तलब किया था। 












सुप्रीम कोर्ट में सेशन कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करने के लिए लगाई थी याचिका 

विशेष अदालत ने पीड़ित पक्ष की धारा 319 जाब्ता फौजदारी की याचिका पर नामजद आरोपितों को पुलिस ने क्लीन चिट दी थी । अदालत ने उनको भी मुकदमे का आरोपी मानते हुए अदालत में 3 अगस्त 2018 को बतौर आरोपी तलब किया था। विशेष अदालत के आदेश के बाद तलब किए गए सामाजिक बहिष्कार के आरोपियों ने Punjab and Haryana High court  में निचली अदालत के आदेश के खिलाफ याचिका दायर की थी। पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए एक दिसंबर 2021 को खारिज कर दी थी। पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ( Punjab and Haryana High court ) द्वारा दिए गए आदेश के खिलाफ कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए गए आरोपियों ने पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ( supreme court in India ) में याचिका दायर की थी। जिसे सुप्रीम कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया।













इनके खिलाफ हुआ था सामाजिक बहिष्कार का मामला दर्ज 

पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता रजत कलसन ने बताया कि भाटला सामाजिक बहिष्कार प्रकरण में दर्ज मुख्य मामले में पीड़ित पक्ष ने सात आरोपियों चंद्र फौजी, लीला, सुमेरु पंडित, जयकिशन, साधु, रामचंद्र व तत्कालीन सरपंच प्रतिनिधि पुनीत को नामजद कर मामला दर्ज कराया था। जिसमें से जांच के दौरान विशेष जांच टीम ने चंद्र फौजी को आरोपी माना गया है।












सुप्रीम कोर्ट की लगी मोहर, जांच कमेटी की रिपोर्ट झूठी 

पीड़ित पक्ष के वकील रजत कलसन ने बताया कि हरियाणा पुलिस के जांच अधिकारियों द्वारा तैयार की गई पूरी रिपोर्ट झूठी साबित हुई है। अब इस पर सुप्रीम कोर्ट की मोहर लग चुकी है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से साबित हो गया है कि पीड़ित पक्ष द्वारा लगाए गए सभी आरोप सच साबित हुए हैं। सामाजिक बहिष्कार मामले में पुलिस की अनुसूचित जाति विरोधी तथा जातिगत आधार पर तैयार की गई जांच रिपोर्ट भी झूठी व फर्जी साबित हो गई है।










जांच कमेटी के खिलाफ दायर करवाएंगे मामला दर्ज 

एडवोकेट रजत कलसन ने बताया कि इस मामले की जांच करने वाले जांच कमेटी के खिलाफ भी स्वर्ण जाति के लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए तैयार की गई रिपोर्ट के लिए जांच अधिकारियों के आगामी कार्रवाई की जाएगी। जांच अधिकारियों के खिलाफ अनुसूचित जाति के लोगों को इंसाफ न देकर उनको प्रताड़ित करने, विशेष जाति के लोगों को लाभ पहुंचाने जैसे आरोप में मामला दर्ज कराया जाएगा। ताकि भविष्य में कोई भी जांच एजेंसी किसी के दबाव में आकर गलत फैसला ना थोप सके। 















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गौरतलब है कि हरियाणा के हिसार जिले के गांव भाटला में सन् 2017 में पानी भरने को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया था। इसके खिलाफ एससी समुदाय के लोगों ने एससी एक्ट के तहत लड़ाई झगड़ा करने का मामला दर्ज कराया गया था। इसके विरोध में गांव में मुनादी करवा कर सामाजिक बहिष्कार कर दिया था। इसकी रिकार्डिंग एससी समुदाय के जागरूक युवाओं द्वारा कर लिया गया था। जिसको जांच कमेटी के द्वारा तैयार की गई झूठी रिपोर्ट के खिलाफ अदालत में पेश किया गया। जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो गया।

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