हाईकोर्ट के सख्त रुख से हरियाणा सरकार के छुटे पसीने......
Haryana Chandigarh news Due to the strict stand of the High Court, the Haryana government lost its sweat
तहलका न्यूज, चंडीगढ़
ई टेंडरिंग को लेकर सरपंचों का पंचकूला में हाउसिंग बोर्ड के पास चंडीगढ़ पंचकूला हाईवे पर धरना प्रदर्शन चल रहा था। जिसके कारण इस हाईवे पर यातायात पूरी तरह से प्रभावित हो गया था। हाईवे ब्लॉक होने के कारण हीरो को चंडीगढ़ पंचकूला आने जाने के लिए वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ रहा था जिससे उनका अधिकतर समय जाम में फंसकर ही बीत जाता था। शनिवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि इतने लोग यहां पर इकट्ठा हो गए सरकार और प्रशासन क्या कर रहा था। तरफ से कहा कि 9 मार्च का मुख्यमंत्री बातचीत के लिए बुलाया है। अदालत ने कहा कि अगर वार्ता विफल हुई तो हालात क्या होंगे इसकी कौन जिम्मेवारी लेगा।
हाईकोर्ट ने लगाई सरकार को फटकार
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में शनिवार को दोपहर 3:00 बजे बाद जनहित याचिका पर सुनवाई शुरू हुई। सुनवाई शुरू होते हैं कोर्ट ने हरियाणा सरकार की सरकार की बोलती बंद हो गई। सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनकारी सरपंचों को मिलने के लिए 9 मार्च का समय दिया है और पुलिस ने आंदोलनकारियों से बातचीत करके नोटिस भी दिया है और एक तरफ का रास्ता खोलने पर राजी हो गए हैं। कोर्ट ने सरकार के इस जवाब पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह बहुत गंभीर विषय है सरकार को चाहिए कि इस समस्या का हल तुरंत किया जाए। कोर्ट ने कहा कि हाउसिंग बोर्ड के पास बड़ी संख्या में लोग कैसे इकट्ठा हो गए। इसके लिए उनको किसने अनुमति दी और किसकी अनुमति से वह यहां आए हैं। हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि यदि पहले मुस्तैदी के साथ काम किया जाता तो ऐसी स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती। हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिए कि शनिवार रात 10:00 बजे तक हर हाल में बंद रोड़ को खाली करवा जाए। अगर सरकार व प्रशासन ऐसा नहीं कर पाते हैं तो सोमवार को सुबह पंचकूला पुलिस कमिश्नर और जिला उपायुक्त खुद कोर्ट में पेश होकर इसका जवाब दें।
वार्ता विफल हुई तो हालातों को कैसे संभालेगी सरकार - हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने कहा कि लोगों को अपनी मांगों को लाने के लिए विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है लेकिन सरकार पर दबाव बनाने के लिए लोगों को परेशानी में नहीं डाल सकते और ना ही कोर्ट की अनुमति देता है। हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार पर दबाव बनाने के लिए लोगों को परेशानी में डाल कर हम अपने अधिकार नहीं मंगवा सकते। हाईकोर्ट ने सरकार से कहा कि अगर 9 मार्च को वार्ता मैं कोई निष्कर्ष नहीं निकलता है तो आने वाले हालातों का जिम्मा कौन लेगा। ऐसी स्थिति में हालात बेकाबू हो सकते हैं इसलिए सरकार को बड़े ही धैर्य के साथ काम लेना चाहिए और आमजन को होने वाली परेशानियों से बचाना चाहिए।
डॉ नीतू बजाज ने की थी हाईकोर्ट में याचिका दायर
पंचकूला निवासी डॉ नीतू बजाज व अन्य हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर अदालत को बताया था कि चंडीगढ़ पंचकूला के बीच जो लाइफलाइन रास्ता है। उसको आंदोलनकारियों ने बंद कर दिया है, जिसके कारण लोगों को अपने सामान्य जीवन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा छात्रों की परीक्षा का समय चल रहा है। ऐसे में वह भी अपने शिक्षण संस्थानों में समय पर नहीं पहुंच पाते। इसके अलावा हर रोज सैकड़ों मरीज उपचार करवाने के पीजीआई चंडीगढ़ में इसी रास्ते से होकर आते हैं। जिससे उनको भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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