जींद में सरपंचों पर लाठीचार्ज | रोहतक में किया रोड़ जाम | सुरजेवाला बोले हकों की आवाज को लाठी से दबान रही है खट्टर सरकार |
तहलका न्यूज, जींद/ सुनील कोहाड़
जींद जिले के सरपंच ई-टेंडरिंग के विरोध में नेहरू पार्क में इकट्ठा हुए और प्रदर्शन करते हुए जिला मुख्यालय पहुंचे। सरपंच जिला उपायुक्त को ज्ञापन देने की मांग पर अड़ गए। उसके गाने पुलिस प्रशासन की नोकझोंक ओके तो पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज कर दिया और भगा भगा कर पीटा। दर्जनों सरपंचों को पुलिस ने हिरासत में लिया और पुलिस लाइन ले गई। वहीं रोहतक में गुस्साए सरपंचों ने सड़क पर जाम लगा दिया और सरकार को एक सप्ताह का अल्टिमेटम देते हुए कहा कि अगर फिर भी सरकार नहीं मानी तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।
लघु सचिवालय के गेट पर बैठ किया गेट बंद
सोमवार को जिलेभर के सरपंच ई-टेंडरिंग के विरोध में जींद के नेहरू पार्क में ईक्कठा हुए और शहर में प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। उन्होंने डीसी डॉ. मनोज कुमार को ज्ञापन देने की मांग की। इसको लेकर सीटीएम ज्ञापन लेने पहुंचे तो सरपंचों ने ज्ञापन देने से मना कर दिया। उसके बाद ना ही तो जिला उपायुक्त ज्ञापन लेने के लिए नीचे आए और ना ही कोई अधिकारी आया। इससे सरपंचों का गुस्सा फुट पड़ा। गुस्साए सरपंच लघु सचिवालय के गेट पर ही बैठ गए और कार्यालय के अंदर बाहर जाने वाले रास्ते को बंद कर दिया।
नहीं माने तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर भगा भगा कर पीटा
जब सरपंचों ने गेट पर बैठ कर उसे बंद कर दिया तो गेट को खुलवाने पहुंची पुलिस ने सरपंचों को काफी समझाने का प्रयास किया कि रास्ते को खोल दें। लेकिन सरपंच नहीं माने तो उनमें बहस हो गई और नौबत हाथापाई तक पहुंच गई। जिसके बाद पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया और भगा भगा कर पीटा। 54 सरपंचों को पुलिस ने हिरासत में लिया और दो बसों में भरकर उन्हें पुलिस लाइन भेज दिया। जिनको कुछ देर बाद छोड़ दिया गया।
डीसी को ज्ञापन देने की जिद्द पर अड़े सरपंच
सरपंच केवल डीसी को ही ज्ञापन देने की मांग पर अड़े गए थे। इससे जब काफी देर तक कोई अधिकारी ज्ञापन नहीं लेने आया तो सरपंच लघु सचिवालय के गेट के बीच में बैठ गए और रास्ते को बंद कर दिया। इससे लघु सचिवालय के अंदर-बाहर जाने का रास्ता बंद हो गया। जिला उपायुक्त से मिलने जा रहे डीएसपी रोहताश ढुल और शहर थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह डीसी को भी सरपंचों ने अंदर नहीं जाने दिया। जिससे उनमें धक्का मुक्की हो गई। जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सरपंचों पर लाठीचार्ज कर दिया।
एसपी बोले लाठीचार्ज नहीं किया, कुछ सरपंचों को हिरासत में लिया
जींद के पुलिस अधीक्षक नरेंद्र बिजारनिया से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि शपथ जिला उपायुक्त को ज्ञापन देने के नाम पर अड़े हुए थे, पुलिस द्वारा काफी देर तक समझाने के बाद भी वो नहीं माने तो रास्ता खुलवाने के लिए उनको हटाया गया था। 54 सरपंचों को पुलिस ने हिरासत में लिया था । जिनको बाद में छोड़ दिया गया। पुलिस ने कोई लाठीचार्ज नहीं किया है।
Sarpanches did road jam in protest against e-tendering and right to
रोहतक में ई-टेंडरिंग और राइट टू रिकॉल के विरोध में सोमवार को सरपंच सड़क पर उतर आए। वह सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। गेट बंद होने से आक्रोश बढ़ गया। सरपंचों ने गेट खोलने की मांग की, लेकिन पुलिस ने उनकी एक नहीं सुनी। इससे माहौल तनावपूर्ण बन गया। पुलिस और सरपंचों के बीच काफी देर तक कहासुनी हुई। लेकिन, लघु सचिवालय का गेट न खुलने से सरपंचों ने सड़क के बीच धरना लगा दिया। इससे वाहनों के चक्के जाम हो गए। इस बीच मरीज को अस्पताल लेकर जा रही एक एंबुलेंस फंस गई। सरपंचों ने मानवता का परिचय देते हुए एंबुलेंस को तो निकलने के लिए रास्ता दे दिया, लेकिन अन्य वाहनों को आगे नहीं जाने दिया। ट्रैफिक पुलिस को यातायात सुचारू करने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
राइट टू रिकॉल सरपंचों पर लागू करने से पहले MLA और MP पर हो लागू
सरपंचों ने कहा कि यदि सरकार ने उनकी मांगों को नहीं माना तो एक मार्च को सीएम आवास का घेराव करेंगे। काला सरपंच ने कहा कि सरकार ई-टेंडरिंग को लागू करने पर अड़ी हुई है, जबकि सरपंच और विधायक इसका विरोध कर रहे हैं। राइट टू रिकॉल को लागू करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर इसे लागू ही करना है तो पहले विधायक, मंत्री व सांसदों पर ये नियम लागू होना चाहिए। उसके बाद पंच सरपंचों की बारी आएगी।
हरियाणा के पंचकूला में पुलिस ने प्रदर्शनकारी सरपंचों पर भांजी लाठियां !
एसडीएम पहुंचे जाम लगाए बैठे सरपंचों को मनाने
सड़क पर जाम लगाकर प्रदर्शन कर रहे सरपंचों के पास एसडीएम राकेश सैनी मौके पर पहुंचे और उन्हें समझाने का काफी प्रयास किया, लेकिन गुस्साए सरपंचों ने एसडीएम की एक नहीं सुनी। करीब पौना घंटा जाम लगाने के बाद सरपंचों ने एसडीएम को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए सरकार को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया और कहा कि अगर सरकार ने उनकी मांगों को नहीं माना तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे।
surjewala said khattar government trying to suppress voice of rights with hooliganism andl athicharge
हकों की आवाज को गुंडागर्दी, लाठीचार्ज से दबाना चाह रही खट्टर सरकार : सुरजेवाला
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्यसभा सदस्य रणदीप सिंह सुरजेवाला ने जारी बयान में कहा कि अपने हकों की आवाज को खट्टर सरकार गुंडागर्दी व लाठीचार्ज से दबाना चाहती है। चंडीगढ़ में ओपीएस स्कीम लागू करने की मांग कर रहे कर्मचारियों पर तो सोमवार को जींद में सरपंचों पर लाठियां बरसाना इस बात का ताजा उदाहरण हैं कि भाजपा जजपा गठबंधन सरकार जब हर मोर्चे पर विफल हो गई तो वो लोगों की आवाज को तानाशाही तरीके से दबाने में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि हर विरोध प्रदर्शन को लाठियों से दमन करने की सोच लोकतंत्र के लिए घातक है।
महिलाओं को पुरुष कांस्टेबलों ने पीटा
सुरजेवाला ने सोमवार को जींद से जारी बयान में कहा कि पुरानी पेंशन बहाली मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे हजारों कर्मचारियों पर वाटर कैनन, अश्रु गैस और लाठीचार्ज करने के बाद आज लगातार दूसरे दिन सरपंचों पर पुलिसिया बर्बरता ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी है। सुरजेवाला ने महिला सरपंचों पर पुलिस कांस्टेबलों द्वारा लाठीचार्ज को शर्मनाक करार देते हुए कहा कि जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि के साथ ऐसा दमनात्मक व्यवहार देश के पंचायती राज स्वरूप पर प्रहार है। देश में पंचायती राज्य सशक्तिकरण की शुरुआत कांग्रेस ने की थी और ग्रामीण विकास के लिए इसे सुदृढ़ीकरण करने का प्रयास किया है। सुरजेवाला ने ई-टेंडरिंग प्रणाली को भ्रष्टाचार और कमीशन खोरी को बढ़ावा देने वाली योजना करार दिया।

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