माता-पिता व अभिभावक बच्चों को उनकी रूचि व इच्छानुसार करने दें पढ़ाई : डीसी
डीसी और जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने बाल भवन में आयोजित कार्यक्रम में की शिरकत
अध्यापक बच्चों में साथ व सहयोग की भावना करें विकसित, बोले डीसी अशोक कुमार गर्ग
रेवाड़ी 14 नवंबरडीसी अशोक कुमार गर्ग ने कहा कि बच्चों के माता-पिता व अभिभावक बच्चों को उनकी रूचि व इच्छानुसार पढ़ाई करने दें। वे बच्चों को आईएएस, आईपीएस, डाक्टर, जज या इंजीनियर बनने के लिए उन पर दबाव न बनाए। उन्होंने कहा कि दबाव के कारण बच्चों पर तनाव बढ़ता है और बच्चें अपनी रुचि व इच्छानुसार आगे नहीं बढ़ पाता और अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं।
डीसी अशोक कुमार गर्ग सोमवार को बाल भवन परिसर में जिला बाल कल्याण परिषद की ओर से आयोजित जिला स्तरीय बाल दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि माता-पिता को अपने बच्चों को उनकी रूचि व इच्छानुसार पढ़ाई करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। इससे उनका मन प्रफुल्लित होगा और वे बिना किसी दबाव व तनाव के अपनी पढ़ाई पर फोकस कर सकेंगे, जिससे उनका सर्वांगीण विकास होगा। उन्होंने कहा कि बाल अवस्था टहनी के समान होती है, जिसे जिस दिशा में मोड़ा जाए वह मुड़ जाती है। इसलिए अध्यापको व अभिभावकों का चाहिए कि वे बच्चों को बचपन से ही अच्छे संस्कार देकर उनका चरित्र निर्माण करें। उन्होंने बच्चों को बाल दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।
डीसी ने कहा कि बच्चे देश के कर्णधार हैं। उन्होंने कहा कि बच्चे स्वस्थ, शिक्षित और चरित्रवान होंगे तो देश-प्रदेश उन्नति व तरक्की करेगा। उन्होंने कहा कि हमें भी जो बच्चे स्कूल नहीं जा पाते उनके जीवन में शिक्षा की लौ जलाकर अज्ञानता का अंधकार दूर करने के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों का आह्वान किया कि वे बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ मौज मस्ती व मनोरंजन भी करने दें ताकि वे तनाव मुक्त रहें। अध्यापकों को चाहिए कि वे बच्चों में आपसी सहयोग व साथ की भावना विकसित करें न कि एक दूसरे से आगे निकलने की प्रतिस्पर्धा की भावना।
युवा हो स्किल्ड, कान्फिडेंट, प्रैक्टिकल और कैलकुलेटिव : डीसी
डीसी ने कहा कि सरकार बच्चों के चंहुमुखी विकास के लिए कृतसंकल्प है, जिसके लिए सरकार द्वारा अनेक योजनाएं क्रियांवित की जा रही हैं। सरकार का फोकस बच्चों की प्रतिभा और रूचि के हिसाब से उन्हें स्किल्ड बनाने पर है। उन्होंने कहा कि शिक्षिकों को चाहिए कि वे केवल डिग्री धारक युवा तैयार न करें। हमारे युवा स्किल्ड, कॉन्फिडेंट, प्रैक्टिकल और कैलकुलेटिव होने चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार इसके लिए प्लेटफार्म जमीन तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि कोई बच्चा शिक्षा के ज्ञान से वंचित न रहे, इसके लिए डिजिटल सशक्तिकरण पर बल दिया जा रहा है। उन्होंने ‘डिजिटल सशक्तिकरण और ऑनलाइन शिक्षा’ पर प्रकाश डालते हुए इसे प्रत्येक विद्यार्थी तक कम खर्च में शिक्षा का ज्ञान पहुंचाने का सशक्त माध्यम बताया।
सामाजिक विकास का आधार स्तंभ बन सकती है शिक्षा : डीसी
डीसी अशोक कुमार गर्ग का कहना है कि वे गरीब व निर्धन बच्चों में शिक्षा की अलख जगाने के लिए प्रयासरत हैं। उनकी एक ही सोच है कि आर्थिक अभाव में कोई भी बच्चा अच्छी शिक्षा पाने से वंचित न रहे। मानव जीवन में शिक्षा व साक्षरता का विशेष महत्व है। शिक्षा के माध्यम से गरीब बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है। यह बच्चों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करते हुए सामाजिक विकास का आधार स्तंभ बन सकती है। नौजवानों व सेवानिवृत्त व्यक्तियों को चाहिए कि वे जनहित में अपने व्यस्त समय में से थोड़ा समय गरीब व निर्धन बच्चों को शिक्षित करने के लिए निकालें।
मौज-मस्ती व खेल-कूद के साथ-साथ शिक्षा की ओर भी ध्यान दें बच्चें : विमल कुमार
जिला एवं सत्र न्यायाधीश व चेयरमैन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रेवाड़ी विमल कुमार ने समारोह को संबोधित करते हुए उपस्थित विद्यार्थियों को बाल दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बच्चे मन के सच्चे होते हैं। बाल जीवन तनाव रहित व बेफिक्र होता है तथा इस अवस्था में बच्चे खूब मौज-मस्ती करते हैं और यह स्वभाविक भी है। उन्होंने कहा कि बच्चों को मौज-मस्ती व खेल-कूद के साथ-साथ शिक्षा की ओर भी ध्यान देना चाहिए। यदि बच्चे अच्छी किताबों से दोस्ती कर लेता है तो किताबें सचमुच एक सच्चे दोस्त की तरह जीवन भर साथ देती हैं। आवश्यकता इस बात की है कि बच्चों के आस-पास इस तरह का वातावरण निर्मित किया जाए कि वे स्वत: पुस्तकों की और आकृष्ट हों, उन्हें पढऩे के लिए प्रेरित हों। यदि हम चाहते हैं कि देश का भविष्य उज्ज्वल हो तो हमें बच्चों के चंहुमुखी व्यक्तित्व विकास की ओर ध्यान देना होगा क्योंकि आज के बच्चे ही कल देश के कर्णधार होंगे।
इस अवसर पर जीएसएसएस बिठवाना की छात्रा अंशिका ने हरियाणा के राज्यपाल एवं हरियाणा बाल कल्याण परिषद के अध्यक्ष श्री बंडारू दत्तात्रेय का शुभ संदेश पढक़र सुनाया। समारोह में विभिन्न स्कूलों के बच्चों ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर समा बांध दिया। इससे पहले डीसी अशोक कुमार गर्ग व जिला एवं सत्र न्यायाधीश व चेयरमैन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रेवाड़ी विमल कुमार ने विद्या की देवी माँ सरस्वती व पूर्व प्रधानमंत्री स्व. श्री जवाहर लाल नेहरू के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित व पुष्पांजलि अर्पित कर जिला स्तरीय बाल दिवस समारोह का विधिवत आगाज किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रतिभावान व मेधावी विद्यार्थियों को मोमेंटो व प्रमाण पत्र देकर पुरस्कृत किया।
ये रहे मौजूद :
इस अवसर पर डालसा सचिव एवं सीजेएम वर्षा जैन, जिला बाल कल्याण परिषद की उपाध्यक्ष एवं डीसी अशोक कुमार गर्ग की धर्मपत्नी रजनी गर्ग, एसडीएम रेवाड़ी होशियार सिंह, डीडीपीओ एचपी बंसल, जिला बाल कल्याण अधिकारी वीरेंद्र सिंह यादव, रिपुदमन गुप्ता, रतनेश बंसल, मान्या सिंह, डा. ज्योत्सना यादव सहित विभिन्न स्कूलों के बच्चें, अध्यापकगण, माता-पिता, अभिभावक व गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
Parents and guardians should allow children to study according to their interests and wishes: DC, Rewari News Today, Haryana News, Bal Divas News, Children should pay attention to education along with fun and games, Be young, skilled, confident, practical and calculative, Teachers should develop a sense of companionship and cooperation in children,

कोई टिप्पणी नहीं
Thanks