आदमपुर का गढ़ बचाने में कुलदीप बिश्रोई के छूटे पसीने, भाजपा जजपा की पूरी ताकत लगने के बाद भी भव्य बिश्रोई के लिए चुनौती !
किसान आंदोलन व आदमपुर तहसील और बालसमंद उपतहसील के किसानों का फसल खराबे के मुद्दे सहित अनेक बाधाएं भव्य बिश्नोई की राह में बन रही हैं रोड़ा !
हिसार : सुनील कोहाड़ / तहलका न्यूज
जब से आदमपुर हल्का बना है तब से इस विधानसभा सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल परिवार का ही दबदबा रहा है। लेकिन इस बार के उपचुनाव में भजनलाल के पौत भव्य बिश्रोई भाजपा की टिकट पर चुनावी मैदान में है। लेकिन इस बार भव्य बिश्रोई व कुलदीप बिश्रोई को अपना ही गढ़ बचाने में पसीने छूटे हुए हैं। क्योंकि आदमपुर व बालसमंद उपतहसील के किसान पिछले काफी समय से मुआवजे की मांग को लेकर भाजपा प्रत्याशी भव्य बिश्रोई का विरोध कर रहे हैं। वहीं अन्य पार्टियों क प्रत्याशी भव्य को कड़ी चुनौती दे रहे हैं।
कांग्रेस छोड़ कुलदीप बिश्रोई ने विधायक पद से त्याग पत्र देकर भाजपा का दामन थाम लिया था और अब तीन नवंबर को इस सीट पर उपचुनाव होना है। भाजपा ने आदमपुर उपचुनाव में कुलदीप बिश्रोई के बेटे और पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के पौत्र भव्य बिश्रोई पर दाव खेला है। भजनलाल परिवार का गढ़ माना जाने वाला आदमपुर हल्के में इस बार बदलाव देखने को मिल सकता है। क्योंकि भव्य का जहां किसान विरोध कर रहे हैं और किसान नेता गांव गांव जाकर भाजपा प्रत्याशी का विरोध जता रहे हैं। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी जयप्रकाश और आम आदमी पार्टी प्रत्याशी सतेन्द्र सिंह हर गांव में उन्हें कड़ी चुनौती दे रहे हैं।
आदमपुर हल्के के कुछ लोगों से जब हमने बातचीत की तो उन्होंने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि जब भजनलाल प्रदेश के मुख्यमंत्री थे तो यहां पर रिकार्ड तोड़ विकास कार्य हुए। लेकिन उनके हाथ से सत्ता जाते ही आदमपुर हल्का विकास के मामले में लगातार पिछड़ता गया और कुलदीप बिश्रोई द्वारा कभी अलग पार्टी बनाना तो कभी दलबल के कारण आदमपुर से कुलदीप बिश्रोई की पकड़ फीकी पड़ती गई है। वहीं पिछले काफी समय से बालसमंद उपतहसील व आदमपुर तहसील के किसान मुआवजे की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे थे। तो चुनाव को देखते हुए भाजपा ने दस दिन के अंदर मुआवजा देने की बात कही थी। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी आज तक किसानों को मुआवजा नहीं मिला है। जिससे इस बार किसान संगठनों के नेता रवि आजाद व अभिमन्यु कोहाड़ इस चुनावी दंगल में भाजपा प्रत्याशी के विरोध में मतदान करने की अपील कर रहे हैं।
निकाय कर्मचारियों की 11 दिन चली हड़ताल भी भाजपा प्रत्याशी के लिए कड़ी चुनौती बनी हुई है। वहीं अन्य कर्मचारी संगठन व सरकारी स्कूलों को बंद करने का फैसले ने भी गरीब तबके के लोगों को भाजपा के खिलाफ खड़ा कर दिया है।
महंगाई रूला रही है खून के आंसू
आदमपुर उपचुनाव में महंगाई का मुद्दा भी चरम सीमा पर है। क्योंकि गरीब तबके के लोगों को दो वक्त की रोटी के लिए दिन रात पसीना बहाना पड़ रहा है और भाजपा सरकार महंगाई पर काबू पाने में पूरी तरह से विफल साबित रही है। रसोई गैस सिलेंण्डर, तेल, सब्जी के दाम लगातार आसमान छू रहे हैं और ये मुद्दा विपक्षी पार्टियों के नेता चुनाव में खूब भुना रहे हैं। वहीं मध्यम वर्ग व गरीब तबके से तालूक रखने वाले लोग महंगाई के मुद्दे पर भी भाजपा जजपा गठबंधन सरकार के पक्षधर होते दिखाई नहीं दे रहे हैं। ऐसे में इस मुद्दे को लेकर भी भाजपा प्रत्याशी भव्य बिश्रोई की पकड़ कहीं न कहीं कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है।
Kuldeep Bishroi lost his sweat in saving Adampur's stronghold, even after BJP JJP's full force, challenge for Bhavya Bishroi

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