बीमा कंपनी के साथ मिलकर किसानों के साथ धोखाधड़ी कर रही सरकार : लोहान
सरकार बीमा कंपनी रिलायंस को करे ब्लैक लिस्ट : उमेद लोहान
- कंपनी ने जिले के 29 हजार किसानों का बीमा मुआवजा आवेदन किया रिवर्ट -
हिसार : सुनील कोहाड़ / तहलका न्यूजइंडियन नेशनल लोकदल के राष्ट्रीय प्रवक्ता उमेद लोहान ने कहा कि भाजपा सरकार बीमा कंपनी के साथ मिलकर फसल बीमा के नाम पर किसानों के साथ धोखाधड़ी व छलावा कर रही है। किसान अपनी फसलों का बीमा लेने के लिए मुहताज हो गए हैं और बीमा कंपनी रिलायंस किसानों के आवेदन में तरह-तरह की कमियां निकालकर उन्हें उनकी खराब हुई फसल की बीमा राशि देने से बच रही है। उमेद लोहान नारनौंद में एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। उमेद लोहान ने कहा कि भाजपा सरकार ने किसानों के हाथ में फसल बीमा के नाम पर एक झुनझुना मात्र थमाने का काम किया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भाजपा सरकार इसकी झूठी वाहवाही लूटने में लगे हैं। फसल बीमा योजना किसानों के लिए एक योजना न होकर एक बड़ी समस्या बन चुकी है।
उमेद लोहान ने आरोप लगाया कि जिस प्रकार केंद्र में प्रधानमंत्री ने बड़ी कंपनियों को लूटने का ठेका दे रखा है उसी प्रकार प्रदेश में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने प्रदेश के किसानों को लूटने के लिए रिलायंस को ठेका दिया हुआ है क्योंकि फसल बीमा को लेकर जिस प्रकार का रवैया कंपनी का है उससे तो यही साबित होता है कि यह केवल किसानों को लूटने के लिए हैं। इस कंपनी यहां कोई ऑफिस भी नहीं है यदि किसान अपनी समस्या लेकर जाएं तो किसके पास जाएं। कंपनी का जिला व तहसील स्तर पर कार्यालय होना चाहिए जिसकी सूचना किसानों तक सार्वजनिक रूप से पहुंचाई जानी चाहिए। बीमा कंपनी ने इस मानसून में खराब हुई किसानों की फसलों में गिरवादरी, ऑन लाइन, मेरी फसल-मेरा ब्यौरा आदि को लेकर अनेक टैक्निकल कमियां निकालते हुए किसानों के फसल बीमा आवेदन को रद्द कर दिया है। हिसार जिले में 29 हजार किसानों के बीमा आवेदन को कंपनी ने रिवर्ट कर दिया है। जलभराव पर धान व बाजरे की फसल का मुआवजा तो कंपनी वैसे ही नहीं देती लेकिन अब कपास की फसल का मुआवजा देने में भी कंपनी पैसा देने से बच रही है।
डिप्टी सीएम ने किसानों की फसल खराब होने पर नारनौंद हलके के गांवों में वादा किया था कि किसानों की खराब फसल, मकानों व ट्यूबवैल आदि के नुकसान की भरपाई करवाई जाएगी लेकिन आज तक किसान उसकी बाट जोह रहे हैं। इसे लेकर हलके के किसान जिला उपायुक्त से भी मिले लेकिन कोई समाधान नहीं हो पाया। लोहान ने कहा कि जो सिंडिकेट बना हुआ है जिसमें पटवारी, कृषि अधिकारी बैंक व बीमा कर्मचारी भी शामिल हैं उनके द्वारा अपने चहेतों को तो मुआवजा दिया जाता है लेकिन किसानों के लिए तरह-तरह की टैक्किनिकल दिक्कत बताई जाती हैं और बहाने बनाए जाते हैं। उप मुख्यमंत्री जो उचाना के साथ नारनौंद को भी अपना हलका मानते हैं लेकिन नारनौंद जैसा पिछड़ा हलका शायद ही कोई और जहां की बेहद टूटी-फूटी सडक़ें इसकी साफ गवाही दे रही हैं। कमीशन के चक्कर में पूरा साल में जो पैसा पीडब्ल्यूडी का लगना था उसे अपने आदमियों में लूटा दिया जाता है लेकिन नारनौंद के सडक़ों के गड्ढे वैसे के वैसे हैं। हलका अपना तब होता है जब कोई वहां के लोगों के दुख-दर्द को समझे। धान की फसल, बाजरे की फसल, मकान, ट्यूबवैल के पैसे भी दिलवाने का हलके की जनता से किया वादा भी अभी अधूरा है।
वहीं प्रेस कांफ्रेंस में उमेद लोहान ने मसुदपूर में हलके के किसान के खेत के कूएं में सरकारी दवाई मिलने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि वहां ये दवाइयां कहां से आई इन्हें कौन लाया और इसके पीछे क्या राज है ये सवाल मुंह बाए खड़े हैं। पुलिस प्रशासन, जिला प्रशासन, स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के संज्ञान में मामला लाने के बाद भी आज तक इसका खुलासा नहीं हो पाया है। मात्र 7000 रुपये की दवाओं की चोरी का मामला अज्ञात के खिलाफ दिखाकर इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
उमेद लोहान ने कहा कि इंडियन नेशनल लोकदल मांग करती है किसानों को बीमा नहीं देने वाली रिलायंस बीमा कंपनी को ब्लैक लिस्ट किया जाए तथा बीमा कंपनी द्वारा पैसा देने से बचने के लिए 29 हजार किसानों पर जो झूठी आपत्तियां लगाई हैं उसे प्रशासन बीमा अधिकारियों से मिलकर दूर करवाने का काम करें ताकि आर्थिक रूप से मृत किसानों को संजीवनी मिल सके और वे अपनी फसलों के लिए बीज, खाद, डीजल आदि खरीद सकें। साथ ही उन्होंने कहा मांग उठाई कि बीमा कंपनी के कार्यालय जिला ही नहीं तहसील स्तर पर होने चाहिएं ताकि वहां पर किसान आसानी से अपनी समस्या रख सकें और वहीं पर संबंधित कर्मचारियेां की व अन्य व्यवस्था वहीं होनी चाहिए क्योंकि ऑनलाइन में साइट्स बंद हो जाती हैं और किसान मुआवजे के लिए मारे-मारे फिरते रहते हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही किसान संगठनों से मिलकर इसके बारे में रणनीति बनाई जाएगी।
प्रेस वार्ता में उमेद लोहान के अलावा राजेश बिल्लू, किसान नेता ओम, राजकुमार नम्बरदार, सुरेश, प्रताप मलिक, संत मोर, सुनील दलाल, अमित, सचिन दलाल, परसा राम सहित कई किसान भी मौजूद रहे।
उमेद लोहान ने आरोप लगाया कि जिस प्रकार केंद्र में प्रधानमंत्री ने बड़ी कंपनियों को लूटने का ठेका दे रखा है उसी प्रकार प्रदेश में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने प्रदेश के किसानों को लूटने के लिए रिलायंस को ठेका दिया हुआ है क्योंकि फसल बीमा को लेकर जिस प्रकार का रवैया कंपनी का है उससे तो यही साबित होता है कि यह केवल किसानों को लूटने के लिए हैं। इस कंपनी यहां कोई ऑफिस भी नहीं है यदि किसान अपनी समस्या लेकर जाएं तो किसके पास जाएं। कंपनी का जिला व तहसील स्तर पर कार्यालय होना चाहिए जिसकी सूचना किसानों तक सार्वजनिक रूप से पहुंचाई जानी चाहिए। बीमा कंपनी ने इस मानसून में खराब हुई किसानों की फसलों में गिरवादरी, ऑन लाइन, मेरी फसल-मेरा ब्यौरा आदि को लेकर अनेक टैक्निकल कमियां निकालते हुए किसानों के फसल बीमा आवेदन को रद्द कर दिया है। हिसार जिले में 29 हजार किसानों के बीमा आवेदन को कंपनी ने रिवर्ट कर दिया है। जलभराव पर धान व बाजरे की फसल का मुआवजा तो कंपनी वैसे ही नहीं देती लेकिन अब कपास की फसल का मुआवजा देने में भी कंपनी पैसा देने से बच रही है।
डिप्टी सीएम ने किसानों की फसल खराब होने पर नारनौंद हलके के गांवों में वादा किया था कि किसानों की खराब फसल, मकानों व ट्यूबवैल आदि के नुकसान की भरपाई करवाई जाएगी लेकिन आज तक किसान उसकी बाट जोह रहे हैं। इसे लेकर हलके के किसान जिला उपायुक्त से भी मिले लेकिन कोई समाधान नहीं हो पाया। लोहान ने कहा कि जो सिंडिकेट बना हुआ है जिसमें पटवारी, कृषि अधिकारी बैंक व बीमा कर्मचारी भी शामिल हैं उनके द्वारा अपने चहेतों को तो मुआवजा दिया जाता है लेकिन किसानों के लिए तरह-तरह की टैक्किनिकल दिक्कत बताई जाती हैं और बहाने बनाए जाते हैं। उप मुख्यमंत्री जो उचाना के साथ नारनौंद को भी अपना हलका मानते हैं लेकिन नारनौंद जैसा पिछड़ा हलका शायद ही कोई और जहां की बेहद टूटी-फूटी सडक़ें इसकी साफ गवाही दे रही हैं। कमीशन के चक्कर में पूरा साल में जो पैसा पीडब्ल्यूडी का लगना था उसे अपने आदमियों में लूटा दिया जाता है लेकिन नारनौंद के सडक़ों के गड्ढे वैसे के वैसे हैं। हलका अपना तब होता है जब कोई वहां के लोगों के दुख-दर्द को समझे। धान की फसल, बाजरे की फसल, मकान, ट्यूबवैल के पैसे भी दिलवाने का हलके की जनता से किया वादा भी अभी अधूरा है।
वहीं प्रेस कांफ्रेंस में उमेद लोहान ने मसुदपूर में हलके के किसान के खेत के कूएं में सरकारी दवाई मिलने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि वहां ये दवाइयां कहां से आई इन्हें कौन लाया और इसके पीछे क्या राज है ये सवाल मुंह बाए खड़े हैं। पुलिस प्रशासन, जिला प्रशासन, स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के संज्ञान में मामला लाने के बाद भी आज तक इसका खुलासा नहीं हो पाया है। मात्र 7000 रुपये की दवाओं की चोरी का मामला अज्ञात के खिलाफ दिखाकर इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
उमेद लोहान ने कहा कि इंडियन नेशनल लोकदल मांग करती है किसानों को बीमा नहीं देने वाली रिलायंस बीमा कंपनी को ब्लैक लिस्ट किया जाए तथा बीमा कंपनी द्वारा पैसा देने से बचने के लिए 29 हजार किसानों पर जो झूठी आपत्तियां लगाई हैं उसे प्रशासन बीमा अधिकारियों से मिलकर दूर करवाने का काम करें ताकि आर्थिक रूप से मृत किसानों को संजीवनी मिल सके और वे अपनी फसलों के लिए बीज, खाद, डीजल आदि खरीद सकें। साथ ही उन्होंने कहा मांग उठाई कि बीमा कंपनी के कार्यालय जिला ही नहीं तहसील स्तर पर होने चाहिएं ताकि वहां पर किसान आसानी से अपनी समस्या रख सकें और वहीं पर संबंधित कर्मचारियेां की व अन्य व्यवस्था वहीं होनी चाहिए क्योंकि ऑनलाइन में साइट्स बंद हो जाती हैं और किसान मुआवजे के लिए मारे-मारे फिरते रहते हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही किसान संगठनों से मिलकर इसके बारे में रणनीति बनाई जाएगी।
प्रेस वार्ता में उमेद लोहान के अलावा राजेश बिल्लू, किसान नेता ओम, राजकुमार नम्बरदार, सुरेश, प्रताप मलिक, संत मोर, सुनील दलाल, अमित, सचिन दलाल, परसा राम सहित कई किसान भी मौजूद रहे।
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