अवतार सिंह भड़ाना के यूं टर्न से विपक्षियों की बोलती बंद
भड़ाना के यूं टर्न से किसे फायदा किसे नुकसान
दिल्ली : सुनील कोहाड़
करीब दस दिन पहले भाजपा छोड़ राष्ट्रीय लोकदल में शामिल हुए अवतार सिंह भड़ाना को आरएलडी ने जेवर विधानसभा से उम्मीदवार बनाया था और नामांकन पत्र दाखिल कर दिया था। लेकिन बृहस्पतिवार को उनके अधिवक्ता ने उनके नामांकन पत्र वापिस लेने का ब्यान आने के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में भूचाल आ गया था। हालांकि अवतार सिंह भड़ाना की तरफ से अधिकारिक तौर पर कोई ब्यान नहीं आया था।
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नामांकन पत्र वापस लेने की बात विपक्षी दलों में आग की तरह फैल गई। जिसके बाद विपक्षी खेमे में ज़श्न का माहौल बना हुआ था तो सपा गठबंधन के कार्यकर्ताओं के चेहरों पर कोई ग़म भी दिखाई नहीं दे रहा था। शायद उन्हें पहले से ही इल्म था कि अवतार सिंह भड़ाना की कोरोना रिपोर्ट पोजिटिव आने के कारण ही नामांकन पत्र वापस लिया था।
लेकिन एक दिन के बाद ही अवतार सिंह भड़ाना ने विपक्ष की सारी हवा निकालते हुए जेवर से ही चुनाव मैदान में कूदने का ऐलान किया तो सपा आरएलडी कार्यकर्ताओं में एक बार फिर से जोश भर कर विपक्षियों की बोलती बंद कर दी।
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अवतार सिंह भड़ाना का गुज्जर समाज में अच्छी पैठ बताई जा रही है। जिससे कयास लगाए जा रहे थे कि उनके नामांकन पत्र वापस लेने से विपक्षियों की गुज्जर समाज के वोट बैंक पर नजर पड़ गई थी और उसको साधने की कवायद भी तेज हो गई थी। लेकिन अवतार सिंह भड़ाना ने एक दिन बाद ही यूं टर्न लेकर विपक्ष के सपनों को हवा निकाल दी। लेकिन ये सब तो चुनाव परिणाम आने के बाद ही साफ हो पाएगा कि किसमें कितना दम बचा हुआ है और उत्तर प्रदेश की जनता किसको सत्ता की चौखट तक पहुंचाती है और किसे विपक्ष में बैठने का मौका देती है।

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