किसान बने मोदी सरकार के गले का फांस, आनन फानन में कैबिनेट बैठक
दिल्ली- पांच राज्यों के चुनाव को देखते हुए या फिर किन्हीं अन्य कारणों से मोदी सरकार ने कृषि कानून निरस्त करने के ऐलान के बाद भी किसानों द्वारा अपने कार्यक्रमों में कोई बदलाव नहीं किया और कृषि कानून निरस्त करने सहित एम एस पी पर कानून बनाने सहित खेती से जुड़े अन्य मसले जब तक नहीं सुलझते तब तक आंदोलन जारी रखने की घोषणा ने मोदी सरकार की टेंशन बढ़ा दी है। इसलिए सरकार ने बुधवार को कैबिनेट की बैठक बुलाई है।
एक काल की दूरी तय करने में भले ही 9 महीने का समय बीत गया हो। लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी के द्वारा कृषि कानून निरस्त करने के मामले में मोदी सरकार किसी भी तरह की जोखिम नहीं लेती दिखाई दे रही। संसद सत्र शुरू होने में एक सप्ताह से भी कम समय शेष रहने के बाद भी मोदी सरकार ने 24 नवंबर को कैबिनेट की बैठक बुलाई है। ताकि संवैधानिक तरीके से इन कानूनों को निरस्त किया जा सके और किसान खुशी खुशी आंदोलन को स्थगित कर अपने घरों को लौट जाएं।
कृषि कानून: 24 नवंबर को कैबिनेट में पेश होगा कानून वापसी का प्रस्ताव, मिल सकती है मंजूरी
तीन कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा के बाद 24 नवंबर, बुधवार को होनी वाली केंद्रीय कैबिनेट बैठक में इन कानूनों की वापसी के प्रस्ताव की मंजूरी के लिए चर्चा हो सकती है। माना जा रहा है कि कैबिनेट में कानूनों की वापसी के प्रस्ताव को मंजूरी मिल सकती है। इसके बाद इस महीने के अंत में शुरू होने जा रहे संसद के सत्र में तीनों कानूनों को आधिकारिक रूप से वापस लिए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने बताया कि अभी कानून निरस्त नहीं हुए हैं। केवल ऐलान हुआ है। सरकार घोषणाएं तो बहुत करती है। लेकिन धरातल पर लागू नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि किसानों की केवल एक मांग को पूरा करने का फैसला सरकार ने लिया है। इसके अलावा बिजली विधेयक 2020 में संशोधन, एम एस पी पर कानून बनाने सहित अन्य मामलों में प्रधानमंत्री व सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। जब तक किसानों की सभी मांगे पूरी नहीं हो जाती तब तक किसान अपने निर्धारित कार्यक्रम करते रहेंगे।

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