सात साल बाद फतेहाबाद के टोहाना को मिली मंत्री पद की सौगात, टोहाना के विधायक देवेन्द्र बबली बने
कैबिनेट मंत्री विकास को लगेंगे चार चांद, किसान से मंत्री तक देवेंद्र बबली का सफर
चंडीगढ़ . तहसलका न्यूज
पिछले सात सालों से फतेहाबाद जिले से एक भी विधायक मंत्रीमंडल में षामिल नहीं था। जिसके कारण फतेहाबाद विकास के मामले में पिछड़ता जा रहा था। लेकिन टोहाना के विधायक देवेन्द्र बबली ने मंगलवार को राजभवन में कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली तो टोहाना में ही नहीं फतेहाबाद में खुशी की लहर दौड़ गई और कार्यकर्ताओं ने लडृडू बांटकर खुशी जाहिर की । इससे पहले भी भूपेन्द्र सिंह हुडृडा की सरकार में विधायक परमवीर सिंह मंत्रीमंडल में कृषि मंत्री थे। वहीं हिसार के विधायक कमल गुप्ता के भी मंत्रीमंडल में भागेदारी होने से हिसार जिले के विकास को गति मिलेगी । इससे पहले भी हिसार जिले के उकलाकना हलके से जजपा विधायक अनूप धानक राज्यसरकार में राज्यमंत्री हैं ।
भूपेन्द्र सिंह हुडृडा की सरकार में मंत्री रहे परमवीर सिंह 2014 तक कैबिनेट मंत्री रहे और 2014 के आम चुनाव के बाद टोहाना से तत्कालीन भाजपा प्रदेष अध्यक्ष विधायक चुने गए थे। लेकिन वो मंत्री नहीं बन पाए थे। मंत्रीमंडल में न लिए जाने का मलाल हलके की जनता को पूरे पांच साल खलता रहा और 2019 के आम चुनाव में उन्होंने भाजपा के विरोध में चुनावी दंगल में उतरे जजपा के प्रत्याषी देवेन्द्र सिंह बबली को विधायक चुना। लेकिन उस समय भी हलके के लोगों को मायूसी ही हाथ लगी। परंतु देवेन्द्र सिंह बबली के विधायक बनने के दो साल बाद हलके को मंत्री पद की सौगात आखिरकार मिल ही गई। ऐसे में टोहाना हलके को सात साल बाद परमवीर सिंह के बाद मंत्री बनने वाले देवेन्द्र सिंह बबली का नाम इतिहास के पन्नों में जुड़ गया है।
ट्रांस्पोर्टर के बिजनेस से की कैरियर की शुरूआत
फतेहाबाद के टोहाना से मौजूदा विधायक देवेन्द्र बबली वैसे तो किसान परिवार से आते हैं। लेकिन उन्होंने अपने कैेरियर की शुरूआत ट्रांस्पोैर्ट के बिजनेस से गुरूग्राम से की थी। जिसके बाद उनके छोटे भाई विनोद व मनोज भी उतर आए और खुब तरकी कर जायदाद को बढ़ाया। जिसके बाद देवेन्द्र बबली ने समाज सेवा के माध्यम से राजनीति में कदम रखा और टोहाना ही नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्र के सबसे बड़े बिजनेस मैंन बन गए। समाज सेवा के दौरान उन्होंने गांव गांव में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए शिवरों का आयोजन करवाकर जरूरतमंद लोगों का मुफ्त में उपचार करवाकर अपनी पैठ जमाई। जब गांव गांव में ही नहीं बच्चे बच्चे की जबान पर देवेन्द्र बबली का नाम आ गया तो उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और इस उपलब्धि के हकदार बने।

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