Kissan Andolan - तीनों कृषि कानूनों से उठी चिंगारी अब शौला बन चुकी है - किसान
किसान नेता घर वापसी की तैयारी में, हमें भी आंदोलन को लीड करना अच्छे से आता है- किसान
सिंधु बार्डर - सुनील कोहाड़ पत्रकार तहलका न्यूज
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किसान आंदोलन को एक साल से भी ज्यादा समय हो गया है। शनिवार को सिंधु बार्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में लंबे समय तक मंथन किया गया। जिसमें कुछ किसान संगठन तीनों कृषि कानून रद्द करने को बड़ी जीत मान रहे हैं और आंदोलन खत्म कर घर वापसी की बात कर रहे हैं। तो बाकी बचे किसान संगठन आंदोलन जारी रखने के पक्षधर दिखाई दिए।
शनिवार को संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक हुई। जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा होनी थी। लेकिन पंजाब के कुछ किसान संगठनों द्वारा घर वापसी का मुद्दा पूरी बैठक में ही गूंजता रहा। लेकिन अधिकतर किसान संगठनो ने साफ कर दिया कि एम एस पी नहीं तो घर वापसी नहीं। वहीं किसानों पर दर्ज मामले, आंदोलन में शहादत देने वाले किसानों को न्याय दिलाने सहित लंबित मांगों को पूरा नहीं किया जाता तब तक किसान आंदोलन को स्थगित नहीं करेंगे। आखिरकार शाम को इस बात पर सहमति बनी और एक कमेटी गठित की गई। जोकि आंदोलन चलाने व घर वापसी पर आंदोलन में शामिल सभी किसानों से बातचीत करेगी कि घर वापसी अभी होगी या आंदोलन जारी रहेगा।
पंजाब के किसान, सिन्द्र, गुरमेल, बलविंदर, बुटा सिंह ने बताया कि तीनों कृषि कानून भाजपा सरकार लेकर आई थी और भाजपा ने ही इनको निरस्त कर दिया। निरस्त होने के बाद किसान नेता इसे बढ़ी जीत मान रहे हैं। लेकिन तीनों कृषि कानूनों के आने से जगी चिंगारी अब शौला बन चुकी है। जब तक सभी मुद्दों पर सरकार नहीं मान जाती तब तक आंदोलन जारी रहेगा। अगर किसान नेताओं को घर वापसी की जल्दी है तो वो घर जा सकते हैं। हम भी आंदोलन को लीड करना अच्छे से जानते हैं।
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संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में आंदोलन जारी रखने के ऐलान के बाद सरकार के रुख में बदलाव नजर आने लगा है। हरियाणा के सीएम मनोहर लाल ने पिछली बार बातचीत अधूरी रह गई थी। अब उसको पूरा करने का समय आ गया है। किसानों की सभी जायज मांगों को सरकार मानने को तैयार है।

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