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Kisan Protect: अजगर की मुंडी पकड़कर खेतों की सिंचाई करते हैं किसान

 विजयी होकर लौटे तो हर चौराहे पर किसानों को पलकों पर बैठाया


किसानों के ही पास है तानाशाही पूंजीपतियों की बिमारी का ईलाज

ऐसी बेरिकेटिंग कहीं पर भी नहीं देखी होगी

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दिल्ली - तहलका न्यूज

        पिछले एक साल से किसान दिल्ली के बार्डरों पर आंदोलन कर रहे थे और सरकार एक साल बाद झुकी और किसानों की मांगों को पूरा किया। अगर अन्य कोई आंदोलन कर रहा होता तो जीत की गुंजाइश ना के बराबर थी। क्योंकि पूंजीपतियों के तानाशाही रवैये के आगे टिक नहीं पाते। जबकि हर वर्ग के किसानी करने वाले को अजगर की मुंडी पकड़नी अच्छे से आती हैं। उक्त शब्द किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ व रवि आजाद ने घर वापसी से पहले किसानों से बातचीत करते हुए कहे। 


उन्होंने कहा कि किसान का कोई धर्म जात नहीं होती। किसान हर धर्म जात में पाया जाता है और रात को खेत में जहरीले सांप भी मिलते हैं तो किसान सांप के डर से अपने पानी की एक मिनट नहीं छोड़ता तो भला वो अपनी मां सम्मान धरती मां को पूंजीपति रुपी अजगर को कैसे जाने देता। 


किसान नेता गुरनाम सिंह चढुनी ने रास्ते में स्वागत कर रहे किसानों को कहा कि आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। बल्कि स्थगित कर किसान एक साल की ट्रेनिंग लेकर घर पर छुट्टी बिताने आएं हैं। अगर सरकार ने किसानों की एक भी मांग को पूरा करने में आनाकानी की तो ये ट्रेंड किसान दिल्ली पहुंचने में देर नहीं लगाएंगे।


                घर वापसी के दौरान किसानों का हर चौराहे, नुक्कड़ व गांव में जोरदार स्वागत किया गया।



बबलू मिर्चपुर के घर वापसी पर उसकी मां भतेरी देवी गले लगाकर अपने बेटे को जीत का आशीर्वाद देते हुए।


ढासा बॉर्डर कमेटी द्वारा आंदोलन की जीत होने पर दिए गए मान सम्मान के लिए सदा आभारी रहूंगा।

सब का आशीर्वाद लेकर भविष्य में और मजबूती के साथ काम करने का संकल्प लिया।

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