High Court : प्राइवेट स्कूल होंगे बंद, लाखों छात्रों के भविष्य पर लटकी तलवार!
सरकार की दलील बुनियादी सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं
चंडीगढ़ - तहलका न्यूज
प्राइवेट स्कूलों की मान्यता को लेकर हर साल सरकार व प्राइवेट स्कूल संघ के बीच खींचतान का खेल चलता है। ऐसे में इस बार प्रदेश सरकार पहले ही अपना स्टेंड क्लीयर कर चुकी है और अब हाईकोर्ट ने भी याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को नजदीक के सरकारी स्कूलों में स्थानांतरित कर एनरोलमेंट नंबर के लिए तारीख आगे बढ़ाने पर विचार करे सरकार।
प्रदेश में हर एक चौराहे पर प्राइवेट स्कूल खुले हुए हैं। उन स्कूलों में से काफी स्कूल स्थाई मान्यता के मापदंडों पर खरा नहीं उतरते। ऐसे में वो लाखों बच्चों के भविष्य का हवाला देकर अस्थाई मान्यता लेकर अपनी दुकानदारी चला रहे थे। वर्षों बीत जाने के बाद भी इन्होंने सरकार द्वारा तय मापदंडों को पूरा करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई तो सरकार ने भी कोविड काल का फायदा उठाते हुए इन्हें इस बार अस्थाई मान्यता देने से इन्कार कर दिया।
सरकार द्वारा इन्कार करने के बाद हिसार की एक संस्था द्वारा हाईकोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि कहा कि कोर्ट छात्रों की जिंदगी से खिलवाड़ होते हुए नहीं देख सकता। इसलिए इन स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करने वाले सभी छात्रों का माइग्रेशन नजदीक के सरकारी स्कूल में करवाएं ताकि इन छात्रों के एनरोलमेंट नंबर जारी करने की प्रक्रिया पूरी की जा सके। वहीं कोर्ट ने सरकार से कहा कि छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए एनरोलमेंट नंबर जारी करने की तारीख आगे बढ़ाने पर विचार करे।
इससे पहले सरकार की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि हरियाणा स्कूल शिक्षा निदेशालय द्वारा इन सभी स्कूलों को आवश्यक पत्र जारी कहा गया था कि उनकी प्रोविजनल मान्यता को मार्च 2021 से आगे नहीं बढ़ाया जाएगा क्योंकि यह स्कूल अपेक्षित वैधानिक सुविधाएं या बुनियादी ढांचा उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। हालांकि, जो बच्चे स्कूलों में पढ़ रहे हैं, वे आगामी परीक्षा के लिए अपना नामांकन पास के सरकारी स्कूल में करा सकते हैं। सरकार की तरफ से कोर्ट को यह भी बताया गया कि यह याचिका आधारहीन है क्यों की इसमें स्कूलों की स्थाई मान्यता प्राप्त समाप्त करने को चुनौती नहीं दी गई। हाई कोर्ट ने सभी प्रतिवादी पक्ष को लिखित में जवाब दायर करने का आदेश देते हुए मामले की सुनवाई 15 फरवरी तक स्थगित कर दी।
काफी अभिभावक अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाना अपनी शान समझते हैं। लेकिन वो अपने बच्चों को किस तरह के स्कूल में भेज रहे हैं। इसकी जांच परख नहीं करते हैं कि इन स्कूलों में क्या क्या सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं स्थाई मान्यता प्राप्त है भी या नहीं। जिसकी वजह से हर साल लाखों बच्चों के भविष्य का हवाला देकर अस्थाई मान्यता हासिल कर लेते थे और अगले साल फिर से नए बच्चों का दाखिला कर लेते थे।
अपने स्कूल में छात्रों की संख्या में बढ़ोतरी करने के लिए अधिकतर प्राइवेट स्कूल संचालक स्कूल में सुविधाएं उपलब्ध करवाने की तरफ कम रुचि दिखा रहे थे और पंपलेट, विज्ञापनों व अन्य तरीके से स्कूल को सब सुविधाओं से लैस दर्शा कर लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते।
काफी प्राइवेट स्कूलों में छात्रों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा देने के लिए साईंस लैब तक नहीं है और वो हर बार लिपापोती कर छात्रों के प्रैक्टिकल नॉलेज के नाम पर नंबर लगवाते हैं। वहीं काफी अस्थाई व स्थाई मान्यता प्राप्त स्कूलों में छात्रों के खेलने के लिए खेल का मैदान भी नहीं है। जिससे छात्रों का शारीरिक रूप से विकास हो सके।

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