किसानों की मांगों को लेकर प्रशासन ने किया अनदेखा, ये रहा मुख्य कारण!
किसानों की मांगों को लेकर प्रशासन ने किया अनदेखा, ये रहा मुख्य कारण
हांसी, सुनील कोहाड़
काले को सफेद करना ही भाजपा सरकार का एजेंडा है। जब मोदी गुजरात का मुख्यमंत्री था तो इन कानूनों का विरोध किया करता था। लेकिन प्रधानमंत्री बनते ही इनको कृषि कानूनों में कोई काला नजर नहीं आया और इन काले कानूनों को लागू कर दिया। उक्त शब्द किसान नेता राकेश टिकैत ने सांसद रामचन्द्र प्रकरण में हांसी एसपी घेराव के दौरान किसानों को संबोधित करते हुए कहे।
प्रशासन के अधिकारियों को किसी से डरने की जरूरत नहीं है बस वो निष्पक्ष तरीके से काम करें। अगर सत्ता पक्ष के दबाव में काम करोगे तो आंदोलन तो झेलना ही पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ये आंदोलन अकेले किसानों का नहीं है। बल्कि ये भूमि हीन गरीब तबके के लोगों के हकों का आंदोलन है। क्योंकि किसान तो अपने खुद के लिए अनाज अपने खेतों में पैदा कर रहा है। लेकिन इन कानूनों के लागू होने के बाद गरीब व्यक्ति इतना महंगा अनाज खरीदकर अपने परिवार का पालन-पोषण नहीं कर सकता। वहीं नारनौंद प्रकरण किसान व जांगड़ा समाज की नहीं है। बल्कि किसान व भाजपा, जजपा और संघ के बीच है। असल में तो जांगड़ा समाज किसान कोम का अहम हिस्सा है। आंदोलन को कुचलने के लिए भाजपा नेता हमारे बीच आपसी मतभेद पैदा कर हमें बांटना चाहते हैं।
वहीं सोमवार सुबह से ही किसानों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था और प्रशासन ने भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हुए हैं। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल को तैनात किया गया है। वहीं इस प्रदर्शन में अभिमन्यु कोहाड़, सतबीर खटकड़ टोल से, प्रो. रामगत, वजीर पूनिया, रवि आजाद, विकास सीसर, सुदेश गोयत, कृष्ण किरमारा, नरेंद्र इत्यादि पहुंचे।
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प्रशासन द्वारा नारनौंद के डीएसपी जुगल किशोर करीब सवा चार बजे किसानों को बातचीत के लिए निमंत्रण देने किसानों के बीच में पहुंचे। उसके बाद किसानों की कमेटी बातचीत के लिए अधिकारियों के पास पहुंची। लेकिन समाचार लिखे जाने तक कोई भी फैसला नहीं हो पाया।
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डीएसपी जुगल किशोर ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए पुलिस व अर्धसैनिक बलों की 14 टुकड़ियों को तैनात किया गया है। जिसमें ड्यूटी मजिस्ट्रेट भी नियुक्त किए गए हैं।
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किसानों के मंच के पास ही सुरक्षा घेरे के अंदर ही शराब का ठेका पूरे दिन खुला रहा और किसान नेता बार बार मंच से प्रशासन से ठेका बंद करवाने के लिए गुहार लगाते रहे। परंतु जब किसानों ने कड़े शब्दों में कहा तो ठेका शाम को करीब पांच बजे बंद करवाया गया।
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किसानों की मुख्य रुप से दो मांगें थी कि किसानों पर दर्ज मुकदमे खारिज किए जाएं और भाजपा सांसद रामचन्द्र , उसके पीए और उसके पीएसओ के खिलाफ कातिलाना हमला करने के मामले में धारा 307 के तहत मामला दर्ज किया जाए। लेकिन प्रशासन ने किसानों की मांगों को अनसुना कर दिया। क्योंकि एसपी घेराव को लेकर प्रशासन के हिसाब से आंदोलन कमजोर हो चुका है। आज किसानों की संख्या जितनी आंकी जा रही थी। उस हिसाब से काफी कम थी। जिसके कारण किसान संगठन प्रशासन पर जो दबाव बनाना चाहते थे वो नहीं बन पाया और प्रशासन ने किसानों की मांगों को मानने से इंकार कर दिया।
अब क्या होगा
वहीं किसानों ने भी हार नहीं मानी। क्योंकि इस समय किसानों के खेतों में धान कटाई व गेहूं और सरसों सहित अन्य कार्यो में व्यस्तता के चलते संख्या कम रही है । प्रशासन इस अंदेशे में ना रहे कि आंदोलन कमजोर हो गया है। अभिमन्यु कोहाड़



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