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कृषि कानून निरस्त करने के ऐलान के बाद भी मार्चों पर डटे रहने के पक्ष में किसान, मैन मांगें मनवाना है बाकी

कृषि कानून निरस्त करने के ऐलान के बाद भी मार्चों पर डटे रहने के पक्ष में किसान, मैन मांगें मनवाना है बाकी

नारनौंद- सुनील कोहाड़
तीनों कृषि कानून निरस्त करने के ऐलान से किसानों ने धरना स्थलों पर जाना बंद नहीं किया। बल्कि एक जीत से उत्साहित किसानों की संख्या में बढ़ोतरी होती हुई दिखाई दे रही है।‌ जो लोग कानूनों को अच्छा बता रहे थे। वहीं कुछ लोग निरस्त करने के ऐलान के बाद कहते हुए नजर आए की ठीक हुआ। अन्यथा भूखे मरने की नौबत आ जाती। 
किसानों ने कहा प्रधानमंत्री द्वारा अभी सिर्फ ऐलान किया गया है नए कृषि कानून वापस नहीं लिए गए। 
जब तक मोर्चा धरने व आंदोलन समाप्त करने के आदेश नहीं देता तब तक किसान अपने मोर्चों पर डटे रहेंगे। नेता बलवान लोहान ने कहा कि किसान आंदोलन का नाम हमारे देश के इतिहास में सुनहरे पन्नों में लिखा जाएगा। क्योंकि पहली बार इतना बड़ा आंदोलन अनुशासन में रहा और इसमें जीत भी हासिल की। हमारे सात सौ से अधिक किसानों ने इस आंदोलन में शहादत देकर आंदोलन को सफल बनाया। सतीश, दीपक, कृष्ण पहलवान, भूप लोहान इत्यादि ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा इस आंदोलन में शहीद हुए किसानों के परिवारों के लिए भी कोई न कोई कदम उठाएगा। 
किसान नेता सुरेश कोथ ने बताया कि नए कृषि कानून संसद में पारित हुए थे और संसद में ही निरस्त हो सकते हैं। 
किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि प्रधानमंत्री के बयान से नहीं संसद में वापस होंगे और शुरू से ही एमएसपी के गारंटी कानून की मांग कर रहे किसानों को एमएसपी गारंटी कानून सरकार को लेकर आना होगा। क्योंकि कमेटियों की रिपोर्ट आज तक न तो यूपीए सरकार ने लागू की और ना ही एनडीए सरकार ने। जबकि 2011 में जिस कमेटी ने एम एस पी को लागू करने की सिफारिश की थी उस कमेटी के चेयरमैन गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री एवं आज देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी थे। जब प्रधानमंत्री बनने के सात साल बाद खुद प्रधानमंत्री अपनी रिपोर्ट को लागू नहीं कर रहे तो किसी और कमेटी की रिपोर्ट क्या लागू करेंगे। कृषि कानून वापिस लेने का बयान सुनकर क्षेत्र के किसान मजदूरों में उत्साह है। लेकिन धरना समाप्त करने को लेकर अभी तक न तो संयुक्त किसान मोर्चा का कोई आह्वान हुआ और ना ही स्थानीय कमेटी के सदस्यों द्वारा कोई निर्णय लिया गया है। लखनऊ महापंचायत, एक साल पूरा होने पर 26 नवंबर का कार्यक्रम सहित संसद मार्च में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ये कार्यक्रम होंगे।

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