रिश्वत दो नौकरी लो की तर्ज पर बांटी जा रही हैं नौकरियां - सुरजेवाला
चंडीगढ़- तहलका न्यूज (सुनील कोहाड़)
नौकरियां में सरेआम फर्जीवाड़े ने प्रदेश की भाजपा जजपा सरकार की पोल खोल दी है। मुख्यमंत्री बिना पर्ची और बिना खर्ची का ढ़िंढ़ौरा पिट रहे थे। लेकिन प्रदेश सरकार ने खर्ची से नहीं अटेची से नौकरियों का सौदा करने का काम किया है। उक्त शब्द कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने वीरवार को चंडीगढ़ में पत्रकार वार्ता के दौरान कहें।
पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में सुरजेवाला ने कहा कि मुख्यमंत्री झूठ बोलकर जनता को बरगलाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने भाजपा जजपा सरकार पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सरकार इस मामले की जांच बंद करके का मन बना चुकी है। इसलिए सरकार व विजिलेंस ने अदालत में कमजोर तथ्य रखें। जिससे उनका रिमांड खत्म करके जेल भेज दिया।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने झूठ बोलकर क्यों बरगलाया। भाजपा-जजपा सरकार को फैसला करना पड़ेगा कि वह नौकरी बेचने वालों के साथ हैं या हरियाणा के युवाओं के । उन्होंने कहा कि पुलिस और विजिलेंस विभाग जाच शुरू होने से पहले ही सारे मामले को रफा-दफा करना चाहते है।
साल 2018 की एचपीएससी की रिश्वत दो नौकरी लो मामले की तरह ही यह मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा। मुख्यमंत्री झूठ बोलकर किसको बचा रहे हैं। 23 नवंबर को हाई पावर कमेटी के बाद मुख्यमंत्री कहते है कि अनिल नागर हरियाणा लोक सेवा आयोग के दफ्तर से गिरफ्तार ही नहीं हुआ। इस मामले पर भी सरकार को जवाब देना होगा।
विजिलेंस ने मामले को केवल एचसीएस की 22 और डेंटल सर्जन की 22 ओएमआर शीट्स तक सीमित कर दिया है, जबकि आरोपियों ने अन्य भर्तियों में भी गड़बड़ी की बात स्वीकार की है। धांधली तो बड़े स्तर पर हुई लेकिन अपने लोगों को फिट करने के लिए यह साजिश रची गई। रफा-दफा करना चाहते है। उन्होंने कहा कि भाजपा -जजपा सरकार को फैसला करना पड़ेगा कि वह नौकरी बेचने वालों के साथ हैं या हरियाणा के युवाओं के । उन्होंने कहा कि पुलिस और विजिलेंस विभाग जाच शुरू होने से पहले ही सारे मामले को नौकरी में फर्जीवाड़े को लेकर कांग्रेस हरियाणा सरकार पर हमलावर है। गुरुवार को रणदीप सिंह सुरजेवाला ने एक बार फिर हरियाणा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सरकार पर अदालत में कमजोर तथ्य रखने का आरोप लगाया।
अनिल नागर के वकील और मुख्यमंत्री एक ही बात कर रहे है तो फिर विजिलेंस कैसे आरोपितों को सजा दिलाएगी। जबकि विजिलेंस अनिल नागर को एचपीएससी के दफ्तर से एक करोड़ सात लाख रुपयों के साथ गिरफ्तार करने की बात कह रही है। जांच पर सवाल उठाते हुए सुरजेवाला ने कहा कि अनिल नागर के घर और रिश्तेदारों के घरों से कागजों की बरामदगी न होना भी सरकार की जांच पर सवालिया निशान लगाता है।
विजिलेंस ने मामले को केवल एचसीएस की 22 और डेंटल सर्जन की 22 ओएमआर शीट्स तक सीमित कर दिया है, जबकि आरोपियों ने अन्य भर्तियों में भी गड़बड़ी की बात स्वीकार की है। धांधली बड़े स्तर पर हुई। लेकिन अपने लोगों को फिट करने के लिए यह साजिश रची गई थी।

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