नित कल्पनाओं में रंग भर कर अपने शब्द कौशल से चित्र बनाता है - कवि सतीश कुमार
कवि समाज को दिखाता है आईना - सतीश कुमार
नारनौंद
: कवि को त्रिकालदर्शी माना गया है। वह अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज का
चित्रण कर,सदैव उचित संदेश देकर हमें आईना दिखाता है। नित कल्पनाओं में रंग
भर कर अपने शब्द कौशल से चित्र बनाता है। वास्तव में कवि राष्ट्र की धरोहर
होते हैं।
एक सच्चे कवि का धर्म
अपनी रचनाओं के माध्यम से सारे समाज में जनचेतना का प्रचार व प्रसार करना
है।एक सच्चा कवि हमेशा जाति-पाति, धर्म, क्षेत्रवादी से ऊपर उठकर अपना रचना
कर्म करता है। जो समसामयिक विषयों पर आधारित होता है। एक कवि अपने लक्ष्य
पर अग्रसर होते हुए समाज की कुरीतियों को,अपनी रचनाओं के माध्यम से निशाना
बना प्रहार करता है। इनके विरूद्ध समाज में आह्वान करता है।
कवि
को दिनकर के समान माना गया है। जो आलोक का प्रतीक है।सच्चा कवि यथार्थ को
निरखकर सारी मानवता के लिए चिंतन करता है।समाज का सही व सटीक चित्रण करना
ही इसका ध्येय होता है। यही कारण था कि कबीर,तुलसीदास,सूर, रविदास,मीरा
समाज में लोकप्रिय हुए। इनका लक्ष्य केवल दोहा,भजन व चौपाइयों को लिखना
नहीं था बल्कि समाज में फैली सामाजिक कुरीतियों,अंधविश्वासों,छुआछूत तथा
जाति-पाति व धार्मिक आडंबरों पर चोट कर,जनता को सच्चाई से अवगत कराना था।

कोई टिप्पणी नहीं
Thanks