खाप के अंर्तगत आने वाले गांव में शादियों पर लगाया जाए बंधन
खाप के अंर्तगत आने वाले गांव में शादियों पर लगाया जाए बंधन
नारनौंद :
सतरोल खाप अलग अलग धड़ों में बंट चुकी है और इसके पीछे असल में तो राजनीतिक हस्क्षेप है। लेकिन खाप के मौजिज लोग अलग अलग तर्क दे रहे हैं। पेटवाड़ तपे व नारनौंद तपे के लोग 600 वर्ष पुराने भाईचारे को तौड़कर खाप में ही अपने लाडलों की शादी करने के फैसले के विरोध में हैं तो उगालन व बास तपा खामौश है। लेकिन खाप प्रधान आज भी अपने फैसले पर अड़े हुए हैं। जिससे खाप के चारों तपों के अंदर की खाई लगातार गहराती जा रही है।
बुधवार को नारनौंद में आयोजित हुई खाप की पंचायत में गुटबाजी में साफ राजनीति की झलक दिखाई दे रही थी कि खाप पंचायत में राजनीतिक हस्क्षेप व खाप प्रधान द्वारा आरक्षण के मुद्दों पर की गई गलत ब्यानबाजी व गलत निर्णय थोपने को लेकर बहस हुई थी और लोगों ने खाप प्रधान के पांच साल पूर्ण होने पर सबकी सहमति से अपने पद से त्यागपत्र देने के लिए कहा था। लेकिन खाप प्रधान त्यागपत्र देने के मुड में नहीं हैं और उन्होनें अपने पद से त्यागपत्र देने से साफ मना कर दिया। जिसके बाद खाप दो धड़ों में बंट गई। क्योंकि खाप प्रधान के इस फैसले का नारनौंद तपे ने विरोध किया और पेटवाड़ तपा उनका पहले ही विरोध कर चुका था। लेकिन नारनौंद तपे के प्रधान कृष्ण लोहान सहित अन्य का कहना है कि खाप प्रधान खाप की सय पर पंचायत में राजनीति घुसपेट हो रही है और राजनीतिक फैसले खाप पर थोपे जा रहे हैं जोकि समाज के लिए बहुत बड़ा खतरा हैं। लेकिन कुछ लोग इसका इसलिए विरोध कर रहे हैं कि सैकड़ों वर्ष पुरानी खाप की परंपरा को तौड़कर खाप प्रधान ने अच्छा नहीं किया। क्योंकि हमारे पूर्वजों के अनुसार हमारे आसपास के गांव में एक दूसरे का आज भी भाईचारा पहले ही तरह कायम है और खाप प्रधान के फैसले से हमारे सामाजिक ताने बाने को ठेस पहुंच रही है।
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नारनौंद तपे के प्रधान कृष्ण लोहान ने बताया कि लोगों को गुमराह करके ये फैसला थोपा गया था। लोगों को बताया गया था कि तपा व दूसरे तपे के सीमावर्ती गांव को छोड़कर शादी कर सकते हैं। लेकिन फैसला इसके बिल्कुल विपरीत था। लेकिन नारनौंद तपा सतरोल खाप में भाईचारा चाहता है और इस फैसले को लेकर चारों तपे दौबारा से समीक्षा करें। पूर्व में लिया गया फैसला सरासर गलत है।
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सतरोल खाप के प्रधान इन्द्रसिंह ने बताया कि आज के वक्त को देखते हुए वो फैसला लिया गया था। हम संविधान में आस्था रखते हैं और चार साल पहले फैसला लिया गया था हम उसी फैसले पर आज भी कायम हैं। उस फैसले में तीन तपे एक मत थे और सिर्फ पेटवाड़ तपे ने ही विरोध किया था।
ये लिया था चार साल पहले फैसला
करीब 600 वर्ष पुरानी सतरोल खाप द्वारा पूर्व में लिए गए फैसलों को लेकर एक बार फिर सुर्खियों में है। करीब चार साल पहले खाप के प्रधान सुबेदार इन्द्रसिंह ने खाप की पंचायत में फरमान सुनाया था कि सतरोल खाप में कोई भी युवक अंर्तजातिय शादी व खाप के अंर्तगत आने वाले गांव में भी शादी कर सकता है। उसको सिर्फ अपने गांव के सीमावर्ती गांव को छोडऩा होगा। इस फरमान का पेटवाड़ तपे ने उसी समय विरोध कर दिया था। लेकिन तीन तपे इस फैसले में खाप प्रधान के साथ थे। लेकिन अब नारनौंद तपे ने इस फैसले का विरोध करना शुरू कर दिया है और फैसला लिया कि सतरोल खाप के सभी गांव आपस में भाईचारा कायम रखेगें। उस फैसले के बाद अब तक खाप में एक भी अंर्तजातिय शादी नहीं हो पाई है। हलांकि एक दूसरे तपे में करीब दस शादियां हो चुकी हैं। खाप के अंर्तगत चार तपों के अंर्तगत आने वाले गांव के लोगों ने अपने अपने तपों को छोड़कर ही अपने लाडलों की शादी की हैं। अगर पुराने फैसले को बदला गया तो खाप के अंर्तगत आने वाले 42 गांव के लोग आपसे में एक दूसरे गांव में शादी नहीं कर सकेगें और प्रदेश में पहले ही लिंगानुपात काफी कम है। इससे सतरोल खाप के गांव में कुंवारों की फौज में ओर बढ़ौतरी होगी।

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