राजनीति हस्क्षेप के कारण खाप हुई दो फाड़
राजनीति हस्क्षेप के कारण खाप हुई दो फाड़
नारनौंद :
सतरोल खाप ने अनेक सामाजिक फैसले लेकर पूरे देश में जहां वाह वाही बटौरी थी। वहीं अब खाप में कुछ राजनेताओं द्वारा सेंध लगाने के बाद खाप टूटने के कागार पर पहुंच गई है और चार तपों में से नारनौंद व पेटवाड़ तपा खाप प्रधान का विरोध कर उसका त्यागपत्र देने की बात नारनौंद तपे के लोगों ने खाप की कार्यकारिणी के सभी पदों से त्यागपत्र दे दिया और कहा कि जब तक चारों तपों के लोग नई कार्यकारिणी का गठन नहीं करेगें तब तक नारनौंद व पेटवाड़ तपा इसका विरोध करता रहेगा।
जाट आरक्षण की आड़ में कुछ राजनेताओं ने इस खाप में सेंध मारी कर खाप को दो फाड़ करने का काम किया है। जिसके कारण आज खाप दो धड़ों में बंटी हुई नजर आई।
खाप के कुछ पदाधिकारी राजनेताओं के आगे नतमस्तक होते हैं तो कुछ इसका विरोध करते हैं। इसी को लेकर खाप कार्यकारिणी की पंचायत नारनौंद में आयोजित की गई। जिसमें लोगों ने अपनी अपनी राय दी तो किसी ने इन्द्र सिंह के फैसलों की सहराना की तो किसी ने उसको गलत ब्यानबाजी व जाट आरक्षण को लेकर गलत ब्यानबाजी कर खाप को धूमिल करने की बात कर उससे त्यागपत्र देने के लिए दबाव बनाया। लेकिन खाप प्रधान ने किसी की नहीं सुनी और न ही प्रधानपद से त्याग पत्र दिया। जिसके बाद पंचायत दो धड़ों में बंट गई। जिसमें उगालन व बास तपा खाप प्रधान के पक्ष में खड़ा हुआ पाया तो नारनौंद व पेटवाड़ तपा खाप प्रधान के विरोध में खड़ा हो गया। जिसके कारण खाप की पंचायत बेनतीजा ही स्थगित हो गई और खाप आज दो धड़ों में पहली बार बंटी हुई नजर आई।
खाप के द्वारा लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय
करीब 600 वर्ष पुरानी सतरोल खाप टूटने के कागार पर है। सतरोल खाप ने कुछ अहम फैसले लेकर देश भर में अपनी पहचान बनाई थी।सतरोल खाप का इतिहास काफी पुराना रहा है और इसमें अब 42 गांव आते हैं जोकि चार तपों में बटी हुई है। जिनमें नारनौंद तपा, पेटवाड़ तपा, उगालन तपा व बास तपा शामिल हैं। इस खाप ने अपने सामाजिक गतिविधियों में हिस्सा लेकर पूरे देश में अग्रणी रही है। खाप ने अंर्तजातिय विवाह के फैसले को सही बताकर ये फैसला लिया था कि कोई भी युवक अंर्तजातिय शादी कर सकता है। इस फैसले से पूरे देश में संदेश गया था कि खाप लोगों की भावनाओं के अनुरूप आज भी भाईचारे का संदेश पूरे देश में दे रही है और सतरोल खाप में आने वाले 42 गांव के लोग अपने गांव की लगती गांव के सीमावर्ती गांव को छोड़कर कहीं भी रिस्ते तय कर सकते हैं। खाप ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत गांव गांव में जाकर लोगों को जागरूक किया था। उसका नतीजा है कि आज काफी गांव का लिंगानुपात सुधर चुका है। खाप ने महिलाओं का सम्मान करने के लिए उनकों चौपालों में आने का न्यौता दिया और महिलाएं आज चौपालों में आकर पंचायतों को संबोधित कर रही हैं। सतरोल खाप ने सुदेश चौधरी को पहली महिला खाप का प्रधान बनाकर इतिहास रचने का काम भी किया था। जोकि पूरे देश में सुर्खियां बनी थी कि खाप महिलाओं के प्रति कितनी जागरूक है। इन्हीं फैसलों की वजह से खाप का नाम देश ही नहीं विदेशों में भी चमका था। लेकिन आज कुछ लोगों की वजह से खाप टूटने के कागार पर पहुंच चुकी है। अगर खाप के प्रधान ने कोई सुझ बुझ से निर्णय नहीं लिया तो खाप दो फाड़ नजर आएगी।
फोटो कैप्शन - 2 नारनौंद : सतरोल खाप की पंचायत में बहस करते खाप के लोग।



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