3० सितम्बर से पहले- पहले जींद जिला हो जायेगा आवारा पशु मुक्त जिला
जींद 14 सितम्बर
डीसी अमित खत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश को तीस सितम्बर तक आवारा पशु मुक्त प्रदेश बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जीन्द जिला में यह लक्ष्य तीस सितम्बर से पहले ही पूरा कर लिया जायेगा। जीन्द जिला में अब तक 7972 आवारा पशुओं को गऊशालाओं/नंदिशालाओं या पशुबाड़ों में आश्रय दिलवाया जा चुका है। डीसी बुधवार की शाम को कुचराना कलां गांव में गऊशाला की आधारशीला रखने के बाद लोगों से बात कर रहे थे।
डीसी ने गौवंश के संरक्षण के लिए लोगों के सहयोग की अपील करते हुए कहा कि गाय का सम्मान करना हमारी पुरानी संस्कृति है। जब भी घर में खाना बनता है तो पहली रोटी गाय के नाम से निकाल ली जाती है। उन्होंने बताया कि गांव में पशुबाड़े/ गऊशाला के निर्माण के लिए डी- प्लान से 6 लाख रूपये की राशि उपलब्ध करवाई गई है। यहां एक अनुमान के अनुसार लगभग 2०० पशुओं को आश्रय दिया जा सकेगा। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि वे गौवंश के संरक्षण के लिए चारे इत्यादि के काम में सहयोग करे। इस मौके पर गांव के सरपंच शीशपाल ने स्मृति चिन्ह देकर उपायुक्त का सम्मान किया।
डीसी ने कहा कि इस समय जिला में 38 गऊशालाएं है। इनमें से तीस गऊशालाएं पंजीकृत है, जबकि 8 गऊशालाएं गैर पंजीकृत है। उन्होंने बताया कि एक अनुमान के अनुसार पूरे जिला में लगभग 11०० आवारा पशु शेष है, जिन्हे गऊशाला/नंदिशालाओं में आश्रय दिलवाया जाना है। विशेष अभियान चलाकर सड़कों पर आवारा घूमने वाले पशुओं को गऊशालाओं में भिजवाया गया है। जीन्द शहर में लगभग 2०० पशु है, जिन्हे गऊशालाओं में पहुंचाया जाना है। इसी प्रकार जुलाना में लगभग 15०, सफीदों में लगभग 5०, नरवाना में लगभग 125 पशु है, जिन्हे गऊशालाओं/ नंदिशालाओं में पहुंचाया जाना है। उन्होंने बताया कि सभी एसडीएम द्वारा अपने- अपने उपमण्डल में आवारा पशुओं को आश्रय दिलवाने के लिए ग्राम पंचायतों के सहयोग से गऊशाला बनाने का काम किया गया है।
जींद 14 सितम्बर
डीसी अमित खत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश को तीस सितम्बर तक आवारा पशु मुक्त प्रदेश बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जीन्द जिला में यह लक्ष्य तीस सितम्बर से पहले ही पूरा कर लिया जायेगा। जीन्द जिला में अब तक 7972 आवारा पशुओं को गऊशालाओं/नंदिशालाओं या पशुबाड़ों में आश्रय दिलवाया जा चुका है। डीसी बुधवार की शाम को कुचराना कलां गांव में गऊशाला की आधारशीला रखने के बाद लोगों से बात कर रहे थे।
डीसी ने गौवंश के संरक्षण के लिए लोगों के सहयोग की अपील करते हुए कहा कि गाय का सम्मान करना हमारी पुरानी संस्कृति है। जब भी घर में खाना बनता है तो पहली रोटी गाय के नाम से निकाल ली जाती है। उन्होंने बताया कि गांव में पशुबाड़े/ गऊशाला के निर्माण के लिए डी- प्लान से 6 लाख रूपये की राशि उपलब्ध करवाई गई है। यहां एक अनुमान के अनुसार लगभग 2०० पशुओं को आश्रय दिया जा सकेगा। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि वे गौवंश के संरक्षण के लिए चारे इत्यादि के काम में सहयोग करे। इस मौके पर गांव के सरपंच शीशपाल ने स्मृति चिन्ह देकर उपायुक्त का सम्मान किया।
डीसी ने कहा कि इस समय जिला में 38 गऊशालाएं है। इनमें से तीस गऊशालाएं पंजीकृत है, जबकि 8 गऊशालाएं गैर पंजीकृत है। उन्होंने बताया कि एक अनुमान के अनुसार पूरे जिला में लगभग 11०० आवारा पशु शेष है, जिन्हे गऊशाला/नंदिशालाओं में आश्रय दिलवाया जाना है। विशेष अभियान चलाकर सड़कों पर आवारा घूमने वाले पशुओं को गऊशालाओं में भिजवाया गया है। जीन्द शहर में लगभग 2०० पशु है, जिन्हे गऊशालाओं में पहुंचाया जाना है। इसी प्रकार जुलाना में लगभग 15०, सफीदों में लगभग 5०, नरवाना में लगभग 125 पशु है, जिन्हे गऊशालाओं/ नंदिशालाओं में पहुंचाया जाना है। उन्होंने बताया कि सभी एसडीएम द्वारा अपने- अपने उपमण्डल में आवारा पशुओं को आश्रय दिलवाने के लिए ग्राम पंचायतों के सहयोग से गऊशाला बनाने का काम किया गया है।

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