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पंचायती जमीन पर मिनी बैंक द्वारा अवैध कब्जे को लेकर गांव राजपुरा के ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन , सरपंच को धमकी

 Protest by villagers of Rajpura against illegal occupation of Panchayati land by Mini Bank.

चार दिनों से ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन जारी, अधिकारी नहीं ले रहे सुध

राजपुरा गांव के ग्रामीण अवैध कब्जे को लेकर विरोध प्रदर्शन करते हुए। फोटो तहलका न्यूज। 


तहलका न्यूज / सुनील कोहाड़

हिसार : एक तरफ तो सरकार अवैध कब्ज को छूटने के लिए कब्जाधारियों को नोटिस जारी कर रही है दूसरी तरफ गांव राजपुरा में मिनी बैंक के कर्मचारियों द्वारा ग्रामीणों को गुमराह कर गांव की पंचायती भूमि पर कब्जा करने का आरोप ग्रामीणों द्वारा लगाया जा रहा है। पिछले चार दिनों से ग्रामीण धरने पर बैठे हुए हैं लेकिन अभी तक उनकी शुद्ध लेने वाला कोई नहीं पहुंचा। 




सरकारी नियमों को ताक पर रखकर करवाया इंतकाल 

ग्रामीण महेंद्र, सोनू, अजीत, दर्शन, नरेंद्र, संदीप, शील, दलबीर, बिरमा, रणधीर, सुभाष इत्यादि ने बताया कि करीब 43 साल पहले ग्राम पंचायत की तरफ से मिनी बैंक को खाद का गोदाम बनाने के लिए करीब आठ करनाल भूमि दी थी। मिनी बैंक ने जमीन की रजिस्ट्री तो करवा ली लेकिन सन 2012 तक नहीं तो इस जमीन का इंतकाल अपने नाम करवाया और ना ही इस जगह की पैमाइस करवाई। जिससे उनको पता चल सके की ग्राम पंचायत द्वारा दी गई उनको जमीन कहां पर है। सन 2012 में भी मिनी बैंक ने राजस्व विभाग के नियमों की धज्जियां उड़ते हुए जमीन का इंतकाल तो अपने नाम करवा लिया। लेकिन उसे समय भी जमीन की निशानदेही नहीं करवाई। कोरोना काल से पहले मिनी बैंक के कर्मचारियों द्वारा ग्रामीणों को गुमराह करते हुए कहा कि उन्होंने जमीन ट्रांसफर करवा ली है और यहां पर ग्रामीणों के लिए खाद के गोदाम बनाने के लिए पंचायती जमीन पर बने तालाब में मिट्टी डलवा ली। 




ग्रामीणों को गुमराह कर डलवाई मिट्टी, फर्जी बिल पास कर बैंक कर्मचारियों ने हड़पे लाखों रुपए 

ग्रामीण ओमप्रकाश, कृष्ण ने बताया कि कर्मचारियों द्वारा ग्रामीणों को गुमराह कर जमीन की कम से कम 8 10 फीट मिट्टी डलवा कर भरती करवा ली। ग्रामीणों को बाद में पता चला कि बैंक कर्मचारियों ने सरकारी पैसे को भी चूना लगाने का काम किया है। क्योंकि बैंक कर्मचारियों ने बैंक के सदस्यों के साथ मिलकर इस मिट्टी के पैसे के बिल पास कर लाखों रुपए खुद ही हड़प लिए। जबकि यहां पर मिट्टी डालने का पूरा खर्च सभी ग्रामीणों ने अपनी जेब से उठाया था। इसलिए सरकार को इस मामले की पूरी निष्पक्षता से जांच करवानी चाहिए। यह पता चल सके की इस धंधा में किन-किन अधिकारियों और किन-किन सदस्यों का हाथ है। 


सरपंच को दी धमकी

सरपंच सुनील कुमार ने बताया कि जब उन्होंने पंचायती जमीन पर अवैध कब्जे का मुद्दा उठाया तो बैंक से जुड़े कुछ लोगों ने उन्हें धमकी डिकी तुम्हें सरस्वती पद से बर्खास्त करवा दिया जाएगा। लेकिन वो सरपति के लिए अपने गांव की पंचायती भूमि पर अवैध कब्जा किसी भी सूरत में नहीं होने दिया जाएगा। क्योंकि गांव के पास पहले ही पंचायती भूमि नहीं है और पंचायती भूमि पर बने इस तालाब में पिछले 60 वर्षों से बस्ती का गंदा पानी आता है और मिट्टी डालने से बस्ती में अनेक बीमारियां फैलने का खतरा सिर पर मंडरा रहा है। जब तक पंचायती जमीन से अवैध कब्जा नहीं जाता जाएगा उनका यह धरना प्रदर्शन जारी रहेगा। 

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