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कोटा में आए दिन हो रही छात्र क्यों कर रहे हैं सुसाइड, छात्रों की मौत को लेकर मनोवैज्ञानिक का परिजनों को परामर्श

Death of students in Kota, psychologist's advice to relatives regarding the death of students

 बच्चों को मौत के मुंह में न धकेले मां बापः मनोवैज्ञानिक डॉ. रविंद्र पुरी



तहलका न्यूज। 

 पिछले दिनों कोटा में एक ही दिन में दो छात्रों द्वारा सुसाइड किए जाने पर अपने विचार देते हुए प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक और प्राचार्य डॉ रवींद्र पुरी ने कहा की मां-बाप को अपने बच्चों को मौत के मुंह में नहीं धकेलना चाहिए और जब कभी भी विद्यार्थी बच्चों को किसी हॉस्टल या कोचिंग सेंटर में भेजें तो सबसे पहले उन्हें मानसिक रूप से इसके लिए तैयार करना आवश्यक है। 






डॉ पुरी ने कहा कि यह बेहद दुख का विषय है की 2023 में अभी तक कोटा में पढ़ने गए बच्चे में से 23 बच्चे आत्महत्या कर चुके हैं और अभी कुछ दिन पूर्व एक ही दिन में दो बच्चों ने आत्महत्या की है। इसके बचाव पर कोटा के पी जी चलने वाले और कोचिंग सेंटर चलाने वाले लोगों का कहना है कि हमने बालकनी में जालियां लगवा दी हैं और पंखे ऐसी लगवा दिए हैं जिन पर स्प्रिंग लगे हुए हैं जिससे लटक कर कोई जान नहीं दे सकता। डॉ पुरी ने कहा कि यह बेहद अजीब बात है । इसकी बजाय उनको अपनी प्रणाली में सकारात्मक बदलाव करने चाहिए और मनोवैज्ञानिकों की व्यवस्था करनी चाहिए। 







डॉ पुरी ने कहा कि ज्यादातर बच्चे जो वहां जाते हैं वह बेहद छोटी उम्र के होते हैं और ऐसे कोचिंग सेंटर में गला काट प्रतियोगिता होती है और बच्चे अपने मां-बाप से दूर होते हैं और बच्चों पर कहीं न कहीं आगे बढ़ने का दबाव भी होता है। कुछ बच्चे इन दबावों को सहन नहीं कर पाते हैं लेकिन उनके पास वहां पर इस विषय पर कोई बात करने वाला भी नहीं होता है। डॉ पुरी ने कहा कि अपने बच्चों के बारे में सभी मां-बाप को जानकारी होती है अगर उन्हें लगता है उनका बच्चा संवेदनशील है और दबाव को आसानी से सहन नहीं कर सकता है तो वह उसे अपने पास ही रखकर पढ़ाने प्रयास करें।

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