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विदेशों में हरियाणवी परिधानों का परचम लहराएंगी इस गांव की बेटियां

 daughters of this village will hoist the flag of Haryanvi clothes in foreign countries

हरियाणवी परिधानों से संवरेगी बेटियों की किस्मत

एडवांस कोर्स में हरियाणवी परिधान बनाने का दिया जाएगा प्रशिक्षण
गांव की बेटियों को दिया जाएगा हरियाणवी परिधान बनाने का प्रशिक्षण
लड़कियों को उनके गांव में ही शिक्षा व रोजगार दिलवाने की दिशा में किया जा रहा है प्रयास 
छात्तर 24 छात्राओं को बेसिक बुटिक ट्रेनिंग के प्रमाण पत्र वितरित



जींद। सामाजिक संस्था राह ग्रुप फाउंडेशन के महिला सशक्तिकरण अभियान के तहत जिले के गांव छात्तर में गांव की 24 बेटियों को बुटीक एवं ब्यूटी पार्लर के पहले चरण की बेसिक ट्रेनिंग के पूरा होने पर प्रमाण पत्रों का वितरण किया गया। इस दौरान केश कलां एवं कौशल विकास बोर्ड के निदेशक नरेश सेलपाड़ ने कहा कि राह संस्था का मकसद बेरोजगार बेटियों एवं महिलाओं को हुनरमंद बना कर उन्हें स्व-रोजगार उपलब्ध करवाना है। जिससे कि युवाओं में रोजगार मांगने की बजाय रोजगार देने की सोच पैदा हो सके। उन्होंने कहा कि बेसिक सिखने के बाद चयनित 20 बेटियों को हरियाणवीं परिधान बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही उनके द्वारा तैयार परिधानों को देश के कौने-कौने से लेकर विदेशों तक पहुंचाया जाएगा।



इस दौरान राह संस्था की जिला जींद की कौशल विकास अधिकारी सुमन उचाना, राह क्लबों के जींद प्रभारी राजेश टांक, राह क्लब जींद के कार्यकारी प्रधान सुनील कुमार, छात्तर केन्द्र की संचालिका सुमन छात्तर, बबली सहित आस-पास अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।





कपड़ा नया, लुक पुरानी:- गांव छात्तर में बेटियों को हरियाणवी ड्रेस तैयार करना सिखा रही सुमन छात्तर, बबली एवं सरोज विसरवाल
के अनुसार यहां लड़कियों को पुराने लुक में हलके दामन तैयार करना सिखाया जाएगा। जिससे इनका रख-रखाव आसानी से हो सकेगा। साथ ही इसे इस्त्री भी किया जा सके, जबकि पुराने परिधानों में यह सुविधा नहीं होती थी। वैसे कपड़ा भले ही आधुनिक हो, मगर लुक के मामले में पुराना दामन अधिकांश लोगों की पहली पंसद है। पहले जहां पहले 56 कली के दामन होते थे, अब यहीं दामन 56, 52, 46, 42 व 36 एवं 32 कली के बन रहे हैं।





गुडग़ांव व विदेशों में भारी डिमांंड:-
राह क्लब जींद की कौशल विकास अधिकारी सुमन उचाना के अनुसार हरियाणवीं परिधानों के प्रति बढ़ते रुझान के चलते गुडग़ांव-फरीदाबाद के अलावा विदेशों में भी हरियाणवीं परिधानों की बहुत मांग है। आधुनिक शहरों में दर्जियों की संख्या कम होने के कारण वहां पर इस परिधानों के दाम आसमान छू रहें हैं। ऐसे में यहां की बेटियों को बाहर दामन व दूसरे हरियाणवीं परिधान बेचने में राह संस्था की ओर से मदद की जाएगी। कौशल विकास अधिकारी सुमन उचाना के अनुसार वर्तमान में गुडग़ांव में एक हरियाणवीं डे्रस (आभूषण सहित) की कीमत चार से पांच हजार रुपये आम बात है, उसके बावजूद भी उनकी डिमांड पुरी नहीं हो रही है। वैसे जींद एवं हिसार में एक औसतन एक अच्छे परिधान की कीमत तीन हजार से साढ़े तीन हजार (आभूषणों सहित) के मध्य है।





हर बेटी को बनाएंगे दक्ष:
हरियाणवी परिधान एक्सपर्ट सरोज मेहरा के अनुसार संस्था का मकसद गांव की प्रत्येक बेटी को उसकी योग्यता के अनुसार तकनीकी व उच्च शिक्षा दिलवाना है। इसके लिए गांव में राह ग्रुप फाउंडेशन की मदद से बुटिक पार्लर ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किया गया है। गांव की बेटियों को उनकी रुचि के हिसाब से न केवल प्रशिक्षण दिलवाया जाएगा, बल्कि उन्हें गांव में ही स्वरोजगार दिलवाने की भी योजना है।

सरोज मेहरा, बुटिक व ब्यूटी पार्लर कॉर्डिनेटर राह गु्रप फाउंडेशन


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