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पंचायत चुनाव में फिर अटक सकता है थोड़ा, हाईकोर्ट में दी चुनौती !

 

हरियाणा पंचायत चुनाव में पिछड़ा वर्ग ( ए ) के लिए आरक्षण प्रदान करने वाले हरियाणा पंचायती राज ( संशोधन ) अध्यादेश 2022 को भेदभावपूर्ण , असंवैधानिक और संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत बताकर पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी गई है । सोनीपत निवासी राजेश द्वारा दायर याचिका के अनुसार यदि पिछड़े वर्ग ( ए ) की आबादी ग्रामसभा क्षेत्र की कुल आबादी का दो प्रतिशत या अधिक है तो प्रत्येक ग्राम पंचायत में पिछड़े वर्ग ( ए ) से संबंधित कम से कम एक पंच होगा । ऐसे वार्डों में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित वार्डों को छोड़कर पिछड़ा वर्ग के लिए ड्रा के माध्यम से अलाट किया जाएगा । प्रत्येक चुनाव में रोटेशन के आधार पर वार्ड आरक्षित किया जाएगा ।







याचिका के अनुसार सरपंच के लिए ब्लाक वाइज आठ प्रतिशत पद पिछड़ा वर्ग ( ए ) के लिए आरक्षित किए जाएंगे । ब्लाक के जिन गांवों में पिछड़ी जाति के सर्वाधिक लोग होंगे , पहले उनमें सरपंच पद पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित किया जाएगा । आरक्षण के लिए प्रस्तावित ग्राम पंचायतों की संख्या के उच्चतम तीन गुना में से ड्रा निकाला जाएगा । जहां पर सरपंच का पद पहले से अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है , उन ग्राम पंचायतों को छोड़कर , जिन पंचायतों में पिछड़े वर्ग ( ए ) की आबादी का सबसे बड़ा प्रतिशत होगा , वहां बाद के चुनावों में रोटेशन द्वारा सरपंच के पद के लिए आरक्षण किया जाएगा । यही सिस्टम जिला परिषदों और ब्लाक समितियों में लागू होगा । याचिका में इस अधिसूचना को रद्द करने की मांग की गई है । अभी यह याचिका रजिस्ट्री में दायर हुई है ।

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